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डबल मर्डर केस: चश्मदीद गवाह पर जानलेवा हमला, तीन साल से बेटों को इंसाफ का इंतजार

Thu, 20 Dec 2018 07:32 PM IST
कपिल kapil गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 20 Dec 2018 07:32 PM IST
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double murder case meerut, attack on Witness and not justice to family
विलाप करतीं परिवार की महिलाएं और साइड में एसएसपी अखिलेश कुमार - फोटो : अमर उजाला

लगातार धमकियां मिल रही हैं। चश्मदीद गवाह पर हत्यारोपी जानलेवा हमला करा चुके हैं। इसके बावजूद पीड़ित परिवार तीन साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। माता-पिता को इंसाफ मिलने का दोनों बेटों को बेसब्री से इंतजार है। तारीख पर भरी कचहरी में पुलिस कस्टडी में हत्यारोपी ने चश्मदीद गवाहों को धमकी दी। लेकिन वह गवाही से पीछे नहीं हटे। अब दंपति की हत्या में पुलिस की गवाही होनी बाकी है। हाईकोर्ट के आदेश पर गवाहों को सुरक्षा मिली हुई है। 

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स्कूल के गेट पर हुई थी हत्या
यह मामला 15 जनवरी 2015 का है। रोजाना की तरह अधिवक्ता सतेंद्र सिंह (ग्राम प्रधान) व उनकी पत्नी चंद्रकांता मूल निवासी रामपुर मोती सरूरपुर अपने पोता-पोती को कंकरखेड़ा थाने के पास सेंट फ्रांसिस स्कूल में छोड़ने सुबह के समय गए थे। स्कूल गेट पर ही हथियारों से लैस बदमाशों ने दंपति पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थी। जिसमें दंपति की मौके पर मौत हो गई। इस मामले में अधिवक्ता सतेंद्र सिंह का भतीजा अरुण उर्फ पिंटू (मुख्य आरोपी) व उसके दोस्त रवि, अजित उर्फ सुमित, मेनपाल व जितेंद्र को पुलिस ने जेल भेजा था।

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प्रधानी चुनाव के लिए वारदात 
तत्कालीन इंस्पेक्टर कंकरखेड़ा प्रशांत कपिल ने दंपति हत्याकांड का विवेचना की। पुलिस के मुताबिक आरोपी भतीजे अरुण ने बताया कि उसे गांव में चुनाव लड़ना था। लेकिन उसके चाचा सतेंद्र गांव की प्रधानी छोड़ने को तैयार नहीं थे। साल 2015 में भी सतेंद्र अपने गांव के प्रधान थे। उसने आरोप भी लगाया था कि पंचायत में चाचा ने उसको थप्पड़ मारा था। जिसमें उसको लगता था कि गांव में उसकी बदनामी हो गई और वह प्रधान नहीं बनेगा। इसके चलते अरुण ने चाचा और चाची की हत्या की प्लानिंग अपने दोस्तों के साथ मिलकर की। सटीक रेकी के बाद वारदात को अंजाम दिया। 

इनकी हुई गवाही 
वादी पक्ष से सीनियर अधिवक्ता प्रमोद त्यागी ने बताया कि सतेंद्र और चंद्रकांता की हत्या में उसके दोनों बेटों अमित, मनीष और सतेंद्र का छोटा भाई किशोर चश्मदीद गवाह बने थे। यह केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है। तीनों चश्मदीद गवाहों की गवाही कोर्ट में हो चुकी है। तत्कालीन इंस्पेक्टर प्रशांत कपिल (विवेचक) और पंचनामा, एफआइआर लेखक समेत छह पुलिस वालों की गवाही होनी बाकी है। इस केस की 21 दिसंबर को गवाही होनी तय हुई है।

गवाही से पहले गवाह पर हमला 
पुलिस के मुताबिक साल 2016 में चश्मदीद गवाह किशोर पर जानलेवा हमला हुआ था। आरोप लगा था कि जेल में बंद हत्यारोपी अरुण उर्फ पिंटू ने हमला कराया। इसका मुकदमा भी पंजीकृत हुआ। दोनों चश्मदीद भाइयों को भी खतरा था। जिसके चलते हाईकोर्ट के आदेश पर दोनों भाइयों की पुलिस ने सुरक्षा मुहैया कराई। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि इस केस की सुनवाई जल्द हो। जिसके चलते यह केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रहा है। सतेंद्र का परिवार कंकरखेड़ा में रहता है। हत्यारोपी अरुण उर्फ पिंटू शातिर अपराधी है। गाजियाबाद से भी एक व्यापारी का अपहरण कर 55 लाख रुपये की फिरौती वसूल चुका है। इसके अलावा भी अरुण पर मुकदमे दर्ज हैं। शातिर अपराधी होने के चलते पीड़ित परिवार अभी दहशत में है। पुलिस अधिकारियों ने चश्मदीद गवाहों की सुरक्षा में लगे पुलिस वाले हटा दिए थे। पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट का हवाला देकर एसएसपी को प्रार्थना पत्र दे दिया। तब जाकर उनको दोबारा से सुरक्षा मुहैया कराई गई। 

पुलिस ने पुख्ता सुबूत जुटाए
तीनों चश्मदीद गवाहों की सुरक्षित गवाही कराई गई। पुलिस वालों की गवाही भी जल्द होगी। तारीख पर आए हत्यारोपियों पर पुलिस की नजर रहती है। इस केस में विवेचना पुलिस ने मजबूती से की और पुख्ता सुबूत भी जुटाए हैं। - अखिलेश कुमार, एसएसपी

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