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नाले में गिरकर बच्ची की मौत

Mon, 12 Oct 2015 01:40 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 12 Oct 2015 01:40 AM IST
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baby drown in sluit

मवाना रोड स्थित अम्हेड़ा गांव में घर की दहलीज से सटकर जा रहे नाले ने तीन साल की मासूम की जान ले ली। बच्ची शाम सात बजे मकान के दरवाजे से गायब हो गई थी। रात में गंगानगर इंस्पेक्टर ने फोर्स के साथ पहुंचकर छानबीन कराई तो बच्ची की लाश नाले में मिली। परिवार में कोहराम मच गया।

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गंगानगर थाना क्षेत्र के अम्हेड़ा गांव में मोनू सिंह पुत्र कुंवरपाल एसपीएस एकेडमी के नाम से स्कूल चलाता है। कसेरू बक्सर के सामने से अम्हेड़ा को जा रहे मेन रोड के बराबर में करीब पांच फीट गहरा पक्का नाला है। शाम सात बजे मोनू की पत्नी सीमा घर पर काम कर रही थी। उसी समय मोनू की बेटी काजल (3) घर के बाहर खड़ी थी। अचानक वह लापता हो गई। परिजनों ने काफी तलाश की लेकिन बच्ची का पता नहीं लगा।
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रात में परिजनों के जानकारी देने पर आसपास के लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। सूचना पर इंस्पेक्टर गंगानगर राजेश भारती और एसएसआई श्रवण यादव मौके पर पहुंचे। आसपास के लोगों ने भी बच्ची के बारे में नहीं बताया, जिसके बाद रात में पुलिस ने मकान के बाहर से जा रहे नाले में छानबीन कराई तो मुख्य गेट से करीब पांच कदम की दूरी पर बच्ची नाले में मिली।
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आनन-फानन में पुलिस बच्ची को रक्षापुरम के निजी अस्पताल मे ले गई, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बच्ची की मौत का पता चलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने पुलिस को बताया कि तीन साल की बच्ची की मौत के बाद तीन माह का मासूम लकी बचा है।

आखिर कौन है इस मौत का जिम्मेदार
मेरठ। अम्हेड़ा गांव में नाले में गिरकर तीन साल की बच्ची की मौत कोई पहली वारदात नहीं है। इससे पहले भी शहर के नाले लोगों की जान लेते रहे हैं। अम्हेड़ा गांव के लोगों ने इंस्पेक्टर से कहा कि एक पहले तो प्रशासन ने चार साल पहले घरों के बाहर नाला बनवा दिया। जिसकी कभी सफाई भी नहीं हुई।

मवाना रोड से जा रहा करीब डेढ़ किमी का नाला मकानों से सटकर जा रहा है। जिस ऊपर से कवर भी नहीं किया गया। मकानों के बाहर दरवाजों के सामने ही नाला पाट रखा है। आखिर तीन साल की बच्ची की मौत का जिम्मेदार क ौन है,इसका पुलिस प्रशासन के पास कोई जबाव नहीं है।


घर की चौखट पर ही दब गई मासूम की चीख
मेरठ। तीन साल की काजल की चीख घर की चौखट तक ही दब कर रह गई। बच्ची नाले में जा गिरी और इसकी भनक नहीं लगी। यदि बच्ची को गिरते हुए कोई देख लेता या उसकी आवाज सुनाई पड़ती तो शायद उसे बचाया जा सकता था। नाले में करीब कीचड़ समेत तीन फीट पानी भरा था। जिसमें गिरकर उसकी मौत हो गई। बच्ची की मौत का परिवार को यकीन ही नहीं हो रहा कि जहां वह हमेशा खेलती थी, वही नाला उसकी जान ले लेगा।

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