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यूपी में बदमाशों का नया ट्रेंड, पुलिस सिस्टम हुआ फेल, गवाह हैं ये बड़ी वारदातें

Wed, 06 Jan 2021 02:36 AM IST
कपिल kapil गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ
गजेंद्र चौधरी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 06 Jan 2021 02:36 AM IST
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Amar Ujala Exclusive Report: Miscreants have changed the way of looting in western UP
पुलिस गिरफ्त में बदमाश - फोटो : अमर उजाला

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपराधियों के आगे पुलिस का तकनीकी सिस्टम कमजोर पड़ रहा है। मोबाइल और इंटरनेट के युग में पुलिस का सर्विलांस सिस्टम 1998-99 का है, जबकि अपराधियों ने तौर-तरीके बदल दिए हैं। आधी-अधूरी तकनीक और जानकारी के अभाव में पुलिस बड़ी घटनाओं में बदमाश पकड़ने में नाकाम रहती है।

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आपराधिक घटनाओं का पिछला रिकॉर्ड पुलिस को आइना दिखा रहा है। बदलाव के बावजूद पुलिस का तकनीकी सिस्टम मोबाइल की सीडीआर के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता है। साइबर सेल और सर्विलांस टीम भी पुराने ढर्रे पर लकीर पीट रही हैं। कई मामलों में मोबाइल फॉरेंसिक लैब भेजने के बाद पुलिस जांच-पड़ताल से ही पीछा छुड़ा लेती है। फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आने में देरी होने से कई बार अपराधी कोर्ट से छूट जाते हैं। 
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लूट, डकैती, हत्या की घटना होते ही पूरे जनपद के पुलिस बदमाशों की तलाश में लग जाती है। अंधेरे में तीर चलाने से नतीजा शून्य रहता है। बदमाश भी यह बात समझ गए हैं। यही वजह है कि बड़ी घटनाओं में बदमाश मोबाइल साथ नहीं रखते हैं। घटना अंजाम देने से पहले रेकी कराई जाती है और बदमाश वारदात कर फरार हो जाते हैं। 
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मेरठ जिले में एक दर्जन से ज्यादा ऐसी वारदात हो चुकी हैं, जिनमें बदमाशों ने मोबाइल इस्तेमाल नहीं किया और पुलिस उनको पकड़ नहीं पाई। दिल्ली रोड स्थित पीएनबी में एक साल पहले लूट की घटना में बदमाशों ने मोबाइल इस्तेमाल नहीं किया था। बाद में प्रतापगढ़ के बदमाश बताकर पुलिस ने घटना का पटाक्षेप किया। सेंट्रल मार्केट, शास्त्री नगर में दो दिसंबर, 2019 को सराफा व्यापारी की ज्वेलरी शॉप लूटने वाले बदमाशों के पास भी मोबाइल नहीं था। जागृति विहार सेक्टर दो में सराफा व्यापारी अमन जैन की लूट के दौरान गोली मारकर हत्या में भी मोबाइल इस्तेमाल नहीं हुआ था। आनंद हॉस्पिटल मालिक हरिओम आनंद की खुदकुशी का राज आज भी उनके मोबाइल में ही है। फॉरेंसिक लैब से अब तक रिपोर्ट भी नहीं आई है। हाल में शास्त्री नगर में सर्राफा व्यापारी के घर में डकैती के दौरान भी मोबाइल इस्तेमाल नहीं हुआ।

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मुन्ना बजरंगी हत्याकांड का राज मोबाइल में
बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या, हिस्ट्रीशीटर परमवीर तुगाना, भाजपा नेता संजय खोखर और व्यापारी प्रदीप आत्रेय की हत्या समेत कई घटनाएं बागपत में हुई हैं। सभी घटनाओं में आरोपियों से मोबाइल बरामद किए हैं लेकिन मोबाइलों में छिपे राज आज तक पता नहीं चल पाए हैं। 

फॉरेंसिक लैब से देर से मिलती है रिपोर्ट 
रोहित सांडू को भूपेंद्र बाफर ने पुलिस की हिरासत में छुड़ाया था। इस दौरान दरोगा की हत्या हुई। रोहित सांडू और उसके चार साथी भी एनकाउंटर में मारे गए। बरामद मोबाइल जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजे थे, कुछ पता नहीं लगा। कचहरी में अपराधी विक्की त्यागी की गोली मारकर हत्या के मामले में भी दो मोबाइल मिले थे, फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट नहीं आई। वहीं दो युवकों सौरभ व अरुण की गैंगवार में हत्या के मौके से चार मोबाइल मिले थे। यशपाल राठी की हत्या में हत्यारोपियों ने मोबाइल इस्तेमाल नहीं किए थे। नतीजा अभी तक घटनाओं का खुलासा नहीं हो पाया है। 

निवाड़ी लैब से जल्द आ रही रिपोर्ट
तकनीकी सिस्टम से भी पुलिस की मजबूती का काम चल रहा है। मोबाइलों को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब में भेजते हैं। निवाड़ी लैब बनने से अब जांच रिपोर्ट आने में तेजी आई है। - राजीव सभरवाल, एडीजी, मेरठ जोन

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