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एमडीए की हवाई योजनाओं में 150 करोड़ की जमीन गायब   

Mon, 11 Feb 2019 02:34 AM IST
HARI om sharan अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: HARI om sharan Updated Mon, 11 Feb 2019 02:34 AM IST
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50 million land worth of MDA missing in air plans
एमडीए बिल्डिंग - फोटो : अमर उजाला
बेहतर नियोजन के दावों के बीच एमडीए की तीन योजनाओं में स्वास्थ्य केंद्र से लेकर धार्मिक स्थलों तक की डेढ़ सौ करोड़ से ज्यादा की जमीन गायब हो गई है। इस जमीन पर कहीं अवैध कब्जा है तो कहीं कॉलोनियों में शामिल कर लिया गया है। लोहियानगर, वेदव्यासपुरी तथा गंगानगर योजनाओं में हुए लैंड ऑडिट में यह खुलासा होने से एमडीए में हड़कंप की स्थिति है। अधिकारी कह रहे हैं कि सर्वे में इसका चिह्नीकरण करा लेंगे। 
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यह है पूरा मामला
एमडीए ने वर्ष 1987 में लोहियानगर, वेदव्यासपुरी तथा गंगानगर के लिए जमीन का अधिग्रहण किया था। लोहियानगर में लगभग 25 लाख वर्ग मीटर जमीन तो वेदव्यासपुरी में लगभग 33 लाख वर्ग मीटर जमीन का अधिग्रहण किया गया। गंगानगर में लगभग बीस लाख वर्ग मीटर जमीन की योजना है। समय के साथ-साथ धीरे-धीरे इन योजनाओं का विस्तार होता चला गया।
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इन सभी की जमीन की हुई थी प्लानिंग
एमडीए ने प्लानिंग में तीनाें योजनाओं का ले आउट तैयार कराया था। प्लानिंग के मुताबिक इन योजनाआें में स्वास्थ्य केंद्रों के जमीन, कूड़ा निस्तारण, पुलिस पोस्ट,  पोस्ट ऑफिस, फायर ब्रिगेड, इलेक्ट्रिक सब स्टेशन, हॉस्पिटल, धार्मिक स्थल, बस डिपो, शैक्षणिक संस्थान आदि के लिए जगह का आवंटन किया गया था।
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लैंड ऑडिट से खुला खेल
तीन योजनाओं के किसानों के साथ एमडीए का समझौता हुआ है। किसानों को एमडीए प्रतिकर के बदले भूखंड देगा। जिन किसानों का भूखंड तीस मीटर का बन रहा है, उन्हें प्लॉट की बजाय पैसा दिया जाएगा। क्योंकि एमडीए की योजना में इतना छोटा प्लॉट नहीं है। बाकी सभी को भूखंड मिलेंगे। इसी के लिए एमडीए अपनी जमीन का ऑडिट करा रहा है। इरादा यह भी है कि जोे जमीन कब्जे में है वह निकल आए। इस ऑडिट में सामने आ रहा है कि केवल गंगानगर में ही 40 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन कम है। इन सभी संस्थानों या प्रयोगों के लिए जो जमीन आरक्षित की थी उसका कोई अता-पता नहीं है। लोहियानगर और वेदव्यासपुरी में लगभग 30-30 हजार वर्ग मीटर जमीन कम है। इसे लैंड लॉस बताया जा रहा है। लेकिन इतना बड़ा लॉस नहीं हो सकता है।
150 करोड़ से ज्यादा की है जमीन
गंगानगर में जो जमीन गायब है वहां रेट बीस हजार रुपये वर्ग मीटर से ज्यादा का चल रहा है। कॉमर्शियल में तो यह रेट कहीं ज्यादा है। वेदव्यासपुरी में भी रेट यही है। लोहियानगर में रेट कम हैं। यदि औसत दस हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर भी लगाया जाए तो यह जमीन 150 करोड़ रुपये से ज्यादा है। एक तरफ एमडीए खजाना खाली होने का रोना रो रहा है और दूसरी तरफ महंगी जमीनों का पता नहीं चल रहा।
कहीं कब्जा तो कहीं कॉलोनी में काटी
दरअसल यह जमीन है तो मौके पर ही। लेकिन इस पर कब्जा हो गया है। अधिकतर स्थानों पर इस जमीन को कॉलोनियों में काट दिया गया है। बिल्डरों से सेटिंग कर मौके पर ज्यादा जमीन नाप दी गई। इसके अलावा अनाधिकृत कॉलोनियों में भी यह जमीन कब्जा की गई है। एमडीए अधिकारियों ने यह खेल बिल्डरों के साथ मिलकर किया है।
नियोजन की भी चूक
इस मामले में एमडीए के नियोजन विभाग की भारी चूक रही। जैसे वेदव्यासपुरी में बड़ा जोनल पार्क बनाया। लेकिन उसके पास ही दस हजार वर्ग मीटर का एक और पार्क बना दिया। तीनों योजनाओं में दस-दस हजार वर्ग मीटर जमीन कूड़ा निस्तारण के लिए छोड़ी। ये जमीन ऐसी जगह छोड़ी गई जहां आसानी से अवैध कब्जों में चली गई।


समायोजन करना होगा
जहां भी जमीन कब्जों में गई हैं वहां उसका समायोजन करना होगा। टीम हर जगह जमीन का पता लगा रही है। सर्वे चल रहा है। यदि कहीं कॉलोनी में अवैध जमीन गई है तो उसका भी चिह्नीकरण हम करा लेंगे। -साहब सिंह, वीसी एमडीए
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