{"_id":"5b425f004f1c1b08278b554b","slug":"171531076352-meerut-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मदरसों में छात्रवृति में घोटाला-BIJNOR","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मदरसों में छात्रवृति में घोटाला-BIJNOR
Updated Mon, 09 Jul 2018 12:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर के मदरसों में 11000
बिजनौर। जिले में मदरसों के छात्रों के आधार कार्ड में हेराफेरी कर 11000 फर्जी छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति बांट दी गई। शासन की जांच में मामले पकड़ में आने के बाद मदरसों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इनसे दी गई धनराशि की वसूली की जा सकती है, साथ ही इन्हें ब्लैक लिस्टेड करने की भी तैयारी है। इससे मदरसा संचालकों में खलबली मची हुई हैं।
जिले में 600 मदरसे संचालित हैं। वित्तीय वर्ष 2017-2018 में मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों ने वजीफे के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। आवेदन के प्रारूप में छात्र के आधार कार्ड का नंबर, जन्म और प्रवेश तिथि, पढ़ाई का विवरण भरा गया था और मदरसों के प्रधानाचार्यों ने इसे सत्यापित किया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2017-2018 की छात्रवृत्ति भेज दी गई थी। शासन ने जांच कराई तो तो उसकी लपेट में जिले के मदरसों के 11000 छात्र आ गए हैं और इन्हें दी गई छात्रवृत्ति की रकम एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्र के बताया कि आवेदन पत्रों में आधार कार्ड का जो नंबर लिखा गया था, वह छात्र का नहीं निकला। आधार कार्ड अलग नाम का पाया गया। वजीफा लेने के लिए मिलते जुलते नाम वाले आधार कार्ड के नंबर अंकित कर दिए गए। जून में मदरसों को नोटिस भेजकर स्थिति स्पष्ट करने और छात्रों का दोबारा सत्यापन करने के निर्देश दिए गए थे। 30 जून तक जवाब देना था, मात्र छह मदरसों ने जवाब दिया है।
विज्ञापन
यह मिलती है छात्रवृत्ति
कक्षा एक से 10 तक के मदरसों के छात्रों को साल में 1000 रुपये प्रति छात्र और कक्षा 10 से ऊपर 2500 रुपये प्रति छात्र वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाती है।
विज्ञापन
बिजनौर। जिले में मदरसों के छात्रों के आधार कार्ड में हेराफेरी कर 11000 फर्जी छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति बांट दी गई। शासन की जांच में मामले पकड़ में आने के बाद मदरसों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। इनसे दी गई धनराशि की वसूली की जा सकती है, साथ ही इन्हें ब्लैक लिस्टेड करने की भी तैयारी है। इससे मदरसा संचालकों में खलबली मची हुई हैं।
जिले में 600 मदरसे संचालित हैं। वित्तीय वर्ष 2017-2018 में मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों ने वजीफे के लिए ऑनलाइन आवेदन लिए गए थे। आवेदन के प्रारूप में छात्र के आधार कार्ड का नंबर, जन्म और प्रवेश तिथि, पढ़ाई का विवरण भरा गया था और मदरसों के प्रधानाचार्यों ने इसे सत्यापित किया। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2017-2018 की छात्रवृत्ति भेज दी गई थी। शासन ने जांच कराई तो तो उसकी लपेट में जिले के मदरसों के 11000 छात्र आ गए हैं और इन्हें दी गई छात्रवृत्ति की रकम एक करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
विज्ञापन
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्र के बताया कि आवेदन पत्रों में आधार कार्ड का जो नंबर लिखा गया था, वह छात्र का नहीं निकला। आधार कार्ड अलग नाम का पाया गया। वजीफा लेने के लिए मिलते जुलते नाम वाले आधार कार्ड के नंबर अंकित कर दिए गए। जून में मदरसों को नोटिस भेजकर स्थिति स्पष्ट करने और छात्रों का दोबारा सत्यापन करने के निर्देश दिए गए थे। 30 जून तक जवाब देना था, मात्र छह मदरसों ने जवाब दिया है।
विज्ञापन
यह मिलती है छात्रवृत्ति
कक्षा एक से 10 तक के मदरसों के छात्रों को साल में 1000 रुपये प्रति छात्र और कक्षा 10 से ऊपर 2500 रुपये प्रति छात्र वार्षिक छात्रवृत्ति दी जाती है।