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कक्षा नौ के छात्र ने रचा था खुद के अपहरण का ड्रामा

Sun, 30 Dec 2018 02:08 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Dec 2018 02:08 AM IST
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कक्षा नौ के छात्र ने रचा था खुद के अपहरण का ड्रामा
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200 रुपये में कबाड़ी को बेची साइकिल, खाने-पीने में उड़ा दिए पैसे
अपराध पर आधारित सीरियल देखकर बनायी पटकथा, लेकिन खुल गई पोल
अमर उजाला ब्यूरो
खरखौदा/मेरठ। लगभग 15 साल की उम्र। कक्षा नौ का छात्र। लेकिन शरारती दिमाग। महज दो सौ रुपये में कबाड़ी को साइकिल बेच दी और उस पैसे से पूरे दिन मौज मस्ती की। शाम हुई तो पकड़े जाने के डर से अपने ही अपहरण का ड्रामा रच डाला। शनिवार को इस केस का खुलासा होने पर छात्र ने थाने में सफाई दी कि उसने अपराध पर आधारित टीवी सीरियल देखकर पिता की डांट से बचने के लिए यह सब किया था। परिजनों के माफी मांगने पर पुलिस ने इस किशोर को चेतावनी देकर छोड़ दिया है।
पुलिस के अनुसार हापुड़ जिला अंतर्गत एक गांव का यह किशोर खरखौदा थाना क्षेत्र के एक इंटर कॉलेज में कक्षा नौ का छात्र है। शुक्रवार को छात्र ने दावा किया था कि कॉलेज के पास उसकी साइकिल की चेन खराब हो गई थी। वह उसे ठीक करने उतरा था तो कार सवार चार बदमाशों ने उसका अपहरण कर लिया था। शाम को खोजबीन में यह छात्र गांव पांची के जंगल में गन्ने के खेत में बंधक हालत में मिला था। परिजनों ने तहरीर नहीं दी तो शनिवार दोपहर खरखौदा पुलिस ने छात्र तथा परिजनों को थाने बुलाकर घटना की नए सिरे से जानकारी ली और घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की।
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कहानी में झोल, खुली पोल
इंस्पेक्टर खरखौदा राजेंद्र त्यागी के अनुसार छात्र की शुक्रवार और शनिवार की बतायी कहानी में विरोधाभास था। बयानों में भी झोल था। शंका होने पर मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई तो छात्र ने साइकिल को 200 रुपये में एक कबाड़ी को बेचकर पिता की डांट से बचने के लियेे कहानी रचना बताया। पुलिस छात्र को लेकर कबाड़ी के पास पहुंची तो पूरा मामला खुल गया।
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शरारत या शातिर दिमाग
इंस्पेक्टर खरखौदा के अनुसार छात्र ने बताया कि टीवी पर आने वाले एक सीरियल को देखकर उसने अपने अपहरण की पटकथा रची थी। उसने पहले अपनी साइकिल को 200 रुपये में कबाड़ी को बेचा और पूरे दिन उन पैसों से मौज मस्ती की। शाम को घर लौटने का समय हुआ तो उसने योजना के मुताबिक गांव के नलकूप पर पहुंचकर पहले अपनी किताबों को हौज में डाल दिया तथा खाली बैग व कुछ किताबें गांव को जाने वाले रास्ते पर डाल दी। उसके बाद गन्ने के खेत में जाकर अपने ही जूतों के फीते निकालकर पहले अपने पैर बांधे तथा बाद में अपने दोनों हाथ भी बांध लिए। राहगीरों ने जब बैग पड़ा देखा तो किताबों पर मिले नाम व गांव के नाम के आधार पर उसके परिजनों को सूचना दे दी। बाद में परिजनों जब खोजबीन कर रहे थे तो छात्र ने बचाने का शोर भी बचाया। इस दौरान ग्रामीण भी थाने पहुंचे और कहा कि बच्चा है गलती हो गई है।
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