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लिफाफे में चिट्ठी भेजकर मांगते रंगदारी
Updated Thu, 31 May 2018 02:28 AM IST
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मेरठ। वेस्ट यूपी में अधिकांश कुख्यात जेल में हैं या फिर उनका खात्मा हो चुका है। जरायम की नई पौध तैयार हो रही हैं। जिनका अपराध करने का तरीका भी अलग है। पुलिस से बचने के लिए मोबाइल से ज्यादा देसी तरीका इस्तेमाल कर रहे हैं।
अपराध जगत में छोटे कारतूस के नाम से चर्चित ऐसे छुटभैये बदमाश रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यातों के नाम का सहारा ले रहे हैं। कुख्यात के नाम से किसी व्यापारी या कारोबारी को लिफाफे में चिट्ठी भेजते हैं। थोड़ी दहशत फैलाने के लिए लिफाफे में 315 बोर का कारतूस भी डाल देते हैं। पुलिस रंगदारी के ऐसे चार केसों का खुलासा कर चुकी है, जिसमें किसी कुख्यात का लेना-देना न होने का दावा किया। कुख्यात योगेश भदौड़ा, ऊधम सिंह, मोनू जाट, सतीश गिरि के नाम से ये बदमाश रंगदारी मांग रहे हैं।
भदौड़ा के बजाय निकला पड़ोसी
आदर्श नगर कंकरखेड़ा निवासी रिटायर्ड बैंक मैनेजर श्रीचंद कर्दम के घर 24 मई को कुख्यात योगेश भदौड़ा के नाम से चिट्ठी आई थी। जिसमें 10 लाख की रंगदारी मांगी गई थी। धमकी मिली थी कि रकम नहीं मिली तो उनके इकलौते बेटे की हत्या कर दी जाएगी। पुलिस ने शुभम पुत्र महिपाल को पकड़ा, जोकि श्रीचंद कर्दम का पड़ोसी निकला। महंगे शौक पूरे करने के लिए उसने रंगदारी मांगने का यह आसान तरीका अपनाया। पुलिस ने शुभम को दो दिन पहले सोमवार को ही जेल भेजा है।
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मैंने नहीं भेजी चिट्ठी
शास्त्रीनगर में एक सप्ताह पहले फर्नीचर व्यापारी को चिट्ठी मिली कि उसने 50 लाख रुपये नहीं दिए तो उसकी हत्या हो जाएगी। यह मामला नौचंदी थाने में दर्ज हो गया। पुलिस ने काफी जांच की। लेकिन पता नहीं चला कि आखिर किस बदमाश ने 50 लाख रुपये मांगे हैं। बदमाश ने खुद को कुख्यात सतीश गिरि बताया था। पुलिस की जांच में यह चिट्ठी सतीश गिरि ने नहीं भेजी। पुलिस ने सतीश गिरि से पूछताछ भी की थी।
यहां भी सुबूत हाथ में नहीं
ब्रह्मपुरी में भाजपा पार्षद राजीव काले से कुख्यात सतीश गिरि नाम के बदमाश से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। पुलिस ने बताया कि सतीश गिरि मुरादाबाद जेल में बंद है। यह चिट्ठी डाक द्वारा राजीव काले के घर पर आयी है। पुलिस ने काफी जांच पड़ताल कर ली। लेकिन अभी ऐसा कोई सुबूत हाथ नहीं लगा। जिससे साबित हो कि कुख्यात ने 50 लाख की रंगदारी मांगी है।
मोनू जाट नहीं मोनू गुर्जर निकला
किठौर में किराना व्यापारी को लिफाफे में चिट्ठी भेजकर दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। लिफाफे में एक कारतूस भी भेजा, ताकि व्यापारी का परिवार दहशत में आ जाए। ये चिट्ठी कुख्यात मोनू जाट के नाम से भेजी गई। व्यापारियों में इसको लेकर आक्रोश था। गाजियाबाद में मोनू गुर्जर नाम का एक आरोपी पकड़ा गया था। पुलिस ने बताया है कि उक्त मोनू गुर्जर ने खुद को मोनू जाट बताकर दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी।
खास बातें:
इंवेस्टीगेशन
- योगेश भदौड़ा, ऊधम सिंह, मोनू जाट, सतीश गिरि के नाम से बढ़ा धमकी देने का सिलसिला
- पुलिस की जांच सही मानें तो कुख्यात नहीं छुटभैये मांगते हैं रंगदारी
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अपराध जगत में छोटे कारतूस के नाम से चर्चित ऐसे छुटभैये बदमाश रंगदारी वसूलने के लिए कुख्यातों के नाम का सहारा ले रहे हैं। कुख्यात के नाम से किसी व्यापारी या कारोबारी को लिफाफे में चिट्ठी भेजते हैं। थोड़ी दहशत फैलाने के लिए लिफाफे में 315 बोर का कारतूस भी डाल देते हैं। पुलिस रंगदारी के ऐसे चार केसों का खुलासा कर चुकी है, जिसमें किसी कुख्यात का लेना-देना न होने का दावा किया। कुख्यात योगेश भदौड़ा, ऊधम सिंह, मोनू जाट, सतीश गिरि के नाम से ये बदमाश रंगदारी मांग रहे हैं।
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भदौड़ा के बजाय निकला पड़ोसी
आदर्श नगर कंकरखेड़ा निवासी रिटायर्ड बैंक मैनेजर श्रीचंद कर्दम के घर 24 मई को कुख्यात योगेश भदौड़ा के नाम से चिट्ठी आई थी। जिसमें 10 लाख की रंगदारी मांगी गई थी। धमकी मिली थी कि रकम नहीं मिली तो उनके इकलौते बेटे की हत्या कर दी जाएगी। पुलिस ने शुभम पुत्र महिपाल को पकड़ा, जोकि श्रीचंद कर्दम का पड़ोसी निकला। महंगे शौक पूरे करने के लिए उसने रंगदारी मांगने का यह आसान तरीका अपनाया। पुलिस ने शुभम को दो दिन पहले सोमवार को ही जेल भेजा है।
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मैंने नहीं भेजी चिट्ठी
शास्त्रीनगर में एक सप्ताह पहले फर्नीचर व्यापारी को चिट्ठी मिली कि उसने 50 लाख रुपये नहीं दिए तो उसकी हत्या हो जाएगी। यह मामला नौचंदी थाने में दर्ज हो गया। पुलिस ने काफी जांच की। लेकिन पता नहीं चला कि आखिर किस बदमाश ने 50 लाख रुपये मांगे हैं। बदमाश ने खुद को कुख्यात सतीश गिरि बताया था। पुलिस की जांच में यह चिट्ठी सतीश गिरि ने नहीं भेजी। पुलिस ने सतीश गिरि से पूछताछ भी की थी।
यहां भी सुबूत हाथ में नहीं
ब्रह्मपुरी में भाजपा पार्षद राजीव काले से कुख्यात सतीश गिरि नाम के बदमाश से 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। पुलिस ने बताया कि सतीश गिरि मुरादाबाद जेल में बंद है। यह चिट्ठी डाक द्वारा राजीव काले के घर पर आयी है। पुलिस ने काफी जांच पड़ताल कर ली। लेकिन अभी ऐसा कोई सुबूत हाथ नहीं लगा। जिससे साबित हो कि कुख्यात ने 50 लाख की रंगदारी मांगी है।
मोनू जाट नहीं मोनू गुर्जर निकला
किठौर में किराना व्यापारी को लिफाफे में चिट्ठी भेजकर दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी गई। लिफाफे में एक कारतूस भी भेजा, ताकि व्यापारी का परिवार दहशत में आ जाए। ये चिट्ठी कुख्यात मोनू जाट के नाम से भेजी गई। व्यापारियों में इसको लेकर आक्रोश था। गाजियाबाद में मोनू गुर्जर नाम का एक आरोपी पकड़ा गया था। पुलिस ने बताया है कि उक्त मोनू गुर्जर ने खुद को मोनू जाट बताकर दस लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी।
खास बातें:
इंवेस्टीगेशन
- योगेश भदौड़ा, ऊधम सिंह, मोनू जाट, सतीश गिरि के नाम से बढ़ा धमकी देने का सिलसिला
- पुलिस की जांच सही मानें तो कुख्यात नहीं छुटभैये मांगते हैं रंगदारी