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क्यूने
Updated Mon, 25 Sep 2017 01:35 AM IST
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मेरठ। क्यूनेट के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के प्रकरण में फरार पांच आरोपी पुलिस के लिए मुसीबत बने हुए हैं। पीड़ित लगातार पुलिस अफसरों से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करता रहा और पुलिस आरोपियों को दबाने में रही। सिविल लाइन थाने के जिस दरोगा पर विवेचना थी, वह भी ट्रांसफर हो गया। पीड़ित ने थाने पहुंचकर पूरे मामले में जानकारी मांगी है।
टीपीनगर निवासी आशू रस्तौगी ने पुलिस अफसरों से शिकायत में आरोप लगाया था कि ऑनलाइन बिजनेस के नाम पर झांसा देकर उससे साढ़े चार लाख रुपये ठग लिए गए। इस मामले में साइबर सेल ने भी जांच की। 13 अगस्त को सात लोगों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज किया। इनमें शहर के एक बड़े डॉक्टर को भी नामजद कराया गया। पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह क्यूनेट के नाम पर करोड़ों की ठगी कर चुका है। इस मामले में दो आरोपियों को पुलिस जेल भेज चुकी है। जबकि पांच आरोपी फरार हैं। पीड़ित आशू ने एसपी सिटी और अन्य अधिकारियों से शिकायत में आरोप लगाया कि यदि पुलिस फरार आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती है तो वह विदेश में फरार हो सकते हैं।
पुलिस के अनुसार इस मामले में नामजद आरोपी दीपक शर्मा ने 13 सितंबर और उसके बाद कई पोस्ट फेसबुक पर अपलोड की हैं, जो दुबई के अलग-अलग स्थानों की मानी जा रही हैं। पीड़ित का आरोप है कि क्यूनेट के नाम पर ठगी करने का मुख्य आरोपी दुबई में है। सिविल लाइन थाने में दर्ज मुकदमे में जो नामजद हैं, वह भी पुलिस की ढील के चलते दुबई फरार हो चुके हैं।
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डॉक्टर दंपति ने बनाया था गैंग:
पुलिस का कहना है कि इस मामले में नवीन सिंह और सजल मुतरेजा को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वहीं दीपक शर्मा व उनकी पत्नी मोनिका शर्मा और विभोर फरार हैं। एक डॉक्टर दंपति ने क्यूनेट के नाम पर ठगी करने वाला गैंग बनाया था। मुख्य आरोपी डॉक्टर भी मेरठ से फरार बताया गया है।
विवेचक का हुआ ट्रांसफर
इंस्पेक्टर सिविल लाइन धीरज शुक्ला का कहना है कि इस केस की विवेचना पहले एसआई श्रीपाल कर रहे थे। अब उनका मुंडाली ट्रांसफर हो गया। विवेचना दूसरे दरोगा विजय सिंह को दी गई है। इंस्पेक्टर का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम लगी हुई हैं।
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टीपीनगर निवासी आशू रस्तौगी ने पुलिस अफसरों से शिकायत में आरोप लगाया था कि ऑनलाइन बिजनेस के नाम पर झांसा देकर उससे साढ़े चार लाख रुपये ठग लिए गए। इस मामले में साइबर सेल ने भी जांच की। 13 अगस्त को सात लोगों के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मामला दर्ज किया। इनमें शहर के एक बड़े डॉक्टर को भी नामजद कराया गया। पुलिस की जांच में सामने आया कि यह गिरोह क्यूनेट के नाम पर करोड़ों की ठगी कर चुका है। इस मामले में दो आरोपियों को पुलिस जेल भेज चुकी है। जबकि पांच आरोपी फरार हैं। पीड़ित आशू ने एसपी सिटी और अन्य अधिकारियों से शिकायत में आरोप लगाया कि यदि पुलिस फरार आरोपियों को गिरफ्तार नहीं करती है तो वह विदेश में फरार हो सकते हैं।
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पुलिस के अनुसार इस मामले में नामजद आरोपी दीपक शर्मा ने 13 सितंबर और उसके बाद कई पोस्ट फेसबुक पर अपलोड की हैं, जो दुबई के अलग-अलग स्थानों की मानी जा रही हैं। पीड़ित का आरोप है कि क्यूनेट के नाम पर ठगी करने का मुख्य आरोपी दुबई में है। सिविल लाइन थाने में दर्ज मुकदमे में जो नामजद हैं, वह भी पुलिस की ढील के चलते दुबई फरार हो चुके हैं।
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डॉक्टर दंपति ने बनाया था गैंग:
पुलिस का कहना है कि इस मामले में नवीन सिंह और सजल मुतरेजा को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। वहीं दीपक शर्मा व उनकी पत्नी मोनिका शर्मा और विभोर फरार हैं। एक डॉक्टर दंपति ने क्यूनेट के नाम पर ठगी करने वाला गैंग बनाया था। मुख्य आरोपी डॉक्टर भी मेरठ से फरार बताया गया है।
विवेचक का हुआ ट्रांसफर
इंस्पेक्टर सिविल लाइन धीरज शुक्ला का कहना है कि इस केस की विवेचना पहले एसआई श्रीपाल कर रहे थे। अब उनका मुंडाली ट्रांसफर हो गया। विवेचना दूसरे दरोगा विजय सिंह को दी गई है। इंस्पेक्टर का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीम लगी हुई हैं।