आस्तीन के सांप: जिन पर किया भरोसा, उन्होंने ही दिया दगा, ज्यादातर मामलों में करीबी निकल रहे अपराधी
मेरठ और आसपास के क्षेत्रों में अपराध की वारदातों की संख्या तो बढ़ ही रही है। वहीं साथ इन अपराधों में जो एक बात समान निकलती है वह है कि इन वारदातों के पीछे किसी करीबी का हाथ ही निकलता है। हाल ही कुछ घटनाओं पर प्रकाश डालती ये रिपोर्ट।
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विस्तार
जो घर में बेहद करीबी थे, इंचौली के धनपुर गांव में उन्होंने ही छह साल के बच्चे की 10 हजार रुपये के लिए हत्या कर दी। आंख बंद करके जिन कर्मचारियों पर भरोसा कर मेरठ के डायमंड कारोबारी ने साढ़े तीन करोड़ के जेवरात दिए। वही आस्तीन के सांप निकले। लगातार ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जिसमें अपराधी अपने ही करीबी निकल रहे हैं।
कहीं पर नौकर तो कहीं पर रिश्तेदार और कर्मचारी। तमाम वारदातों में अपनों ने ही जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई लूट ली। कत्ल करने से भी उनके हाथ नहीं कांपे। ऐसे आस्तीन के सांपों से सतर्क रहने की जरूरत है।
ये खबर आपको डराने के लिए नहीं है। ये हकीकत है, समाज के उस स्याह सच की, जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए। मेरठ में हाल ही में शास्त्रीनगर में रहने वाले हैंडलूम कारोबारी चंद्रमोहन गोयल के घर दो बदमाशों ने दिनदहाड़े दो लाख रुपये लूट लिए।
पुलिस ने बदमाशों को पकड़ा तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई। लूट करने वाला बदमाश चंद्रमोहन गोयल के घर काम करने वाली नर्स का सगा भाई निकला। उसको पता था कि चंद्रमोहन और उनकी पत्नी अकेले रहते हैं। घर में लाखों रुपये कैश है। इन्हीं जानकारियों के चलते बदमाशों ने उनको आसान टारगेट समझा और वारदात को अंजाम दे डाला।
एक साल से करती थी मजदूरी, छह साल के पोते को मार डाला
9 जून 2024 को मेरठ में इंचौली के धनपुर गांव में सिपाही के छह साल के बेटे पुनीत यादव की हाथ-पैर बांधकर निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई। वारदात को किसी अंजान ने नहीं, बल्कि घर में काम करने वाले नौकर की पत्नी सुमन यादव ने अंजाम दिया। उसने पुनीत के दादा जयभगवान से 10 हजार रुपये उधार मांगे थे। पैसे देने से इन्कार करने पर उसने बच्चे की हत्या कर दी। सुमन 18 साल से पुनीत के दादा जयभगवान के घर मजदूरी करती थी।
पोते को याद करके दिन-रात आंसू बहा रहे दादा जयभगवान
इकलौते पोते पुनीत को खोने वाले दादा जयभगवान यादव का दर्द शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। पोते को याद करते हुए वह दिनभर दुखी रहते हैं। रात को अचानक नींद से जागकर पुनीत को याद करके रोने लग जाते हैं।
बार-बार यही कहते रहते हैं कि मेरा तो बुढ़ापे का सहारा ही चला गया, अब कुछ नहीं बचा है। जयभगवान यादव बताते हैं कि अभी भी ऐसा लगता है मानो वह बाबा कहते हुए बाहर से आवाज लगाता हुआ मेरे पास आ जाएगा।
मेरी गोद में खेलकर ही उसने चलना सीखा। छह साल के मासूम को इतनी बेरहमी से मारते हुए कातिलों के हाथ नहीं कांपे। भर्राए गले से कहते हैं कि पुनीत की मां सुप्रभा और दादी सतभावा की तबीयत ठीक नहीं हो पा रही है। वह उस दिन से ठीक से खाना भी नहीं खा रहीं। पुनीत की बहन खुशी हर समय उसके बारे में पूछती रहती है। हमें तो जिंदगी भर का गम मिल गया कहकर जयभगवान रोने लग जाते हैं।
जिन कर्मचारियों पर था भरोसा उन्होंने ही रच दी जेवरात लूट की पटकथा
मेरठ निवासी प्रदीप अग्रवाल के बेटे प्रियांक अग्रवाल का अटायर डायमंड के नाम से ज्वेलरी का कारोबार है। जिन कर्मचारियों पर भरोसा करके वो करोड़ों रुपये की ज्वेलरी ऐसे ही दे देते थे, उन्होंने ही भरोसे का कत्ल कर दिया।
छह जून 2024 को साढ़े तीन करोड़ की ज्वेलरी लूट की सहारनपुर में झूठी पटकथा तैयार कर ली। पुलिस ने कर्मचारियों को गिरफ्तार करके खुलासा किया तो प्रियांक अग्रवाल भी अवाक रह गए। पुलिस ने सत्यम शर्मा, तरुण सैनी के साथ फर्जी घटना की पटकथा लिखने वाले डंपी, कंवरपाल और प्रिंस को गिरफ्तार किया।
तीसरी वारदात और भी दिल दहला देने वाली है
22 जून 2024 को ब्रह्मपुरी के इंद्रानगर मोहल्ले में घर में घुसकर महिला सुनीता मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। खुलासा हुआ तो हर कोई अवाक रह गया। कातिल सुनीता का सगा भाई निकला।
उसकी माली हालत आजकल सही नहीं होने के चलते उसने बहन को ही टारगेट बना लिया। भाई को पता था कि बहन के पास जेवरात और कैश रहता है। रात को 12 बजे वह बहन से मिलने के बहाने घर पहुंचा। सुनीता की गोली मार कर हत्या करने के बाद लूट को अंजाम दे डाला।
बाहर के नौकर लगातार कर रहे दगा
टीपीनगर के कमलानगर निवासी बिल्डर प्रदीप गुप्ता के भरोसे का किस तरह से कत्ल हुआ, ये वही जानते हैं। नेपाल निवासी नौकर ने उनके घर करोड़ों की चोरी को अंजाम दिया। बेटी की शादी के लिए पूरी जिंदगी जो पाई-पाई जोड़कर रखी थी। जो जेवरात बनवाए थे, नौकर सब ले गया। पुलिस ने गिरफ्तारी की, कुछ बरामदगी भी हुई, लेकिन सबकुछ नहीं मिला। उस दिन को याद करते हुए प्रदीप गुप्ता आज भी भावुक हो जाते हैं।
इन वारदातों में भी करीबी निकले आरोपी
रिश्तेदार ने कराई वारदात
16 जनवरी 2024 : सहारनपुर के खाताखेड़ी में लकड़ी कारोबारी फुरकान अहमद के घर हथियारों के बल पर बदमाशों ने लूट की थी। एक आरोपी बिलाल का रिश्तेदार रिजवान कारोबारी के यहां नौकरी करता था। उसने वारदात कराई थी।
नौकर ने दिया घटना को अंजाम
24 फरवरी 2024 : मुजफ्फरनगर के नई मंडी के वकील रोड निवासी कारोबारी नीरज जैन के घर नेपाल निवासी सुनील खडगा नौकर था। साथियों के साथ मिलकर लाखों की चोरी और जेवरात चोरी कर लिए।
कंपाउडर निकला लूट का मास्टरमाइंड
5 अप्रैल 2024: बिजनौर के नगीना में चिकित्सक डॉक्टर आनंद के घर पर हुई लूट की घटना में उनका कंपाउडर सचिन ही लूट का मास्टरमाइंड निकला।
नौकर निकला आरोपी
15 सितंबर 2023: सहारनपुर की पैरामाउंट कॉलोनी निवासी दवा कारोबारी गिरीश बजाज से दिल्ली रोड पर बदमाशों ने एक लाख की नकदी लूट थी। वारदात का मास्टरमाइंड दवा कारोबारी का पूर्व नौकर अमन निवासी रानी बाजार निकला।
पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर रची लूट की कहानी
15 नवंबर 2023: बिजनौर के रायपुर सादात में थोक व्यापारी की पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर घर में लूट की झूठी कहानी गढ़ दी। पुलिस ने आरोपी व्यापारी की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया।
घर पर काम करने वालों से रहें सतर्क
घर में लंबे समय तक आने वाले मजदूर, मिस्त्री या दूसरे लोगों से निजी जानकारी शेयर करना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका उदाहरण कोतवाली के स्वामीपाड़ा में रहने वाली मोना स्वरूप की हत्या से लगाया जा सकता है। 16 जून 2024 को मोना स्वरूप की हत्या घर में पत्थर का काम करने वाले मिस्त्री उमर ने लूट के इरादे से की। मोना की मां मजदूरों को सबके सामने ही अलमारी खोलकर पैसे दे देती थीं। उमर को पता चल गया था कि अलमारी में कैश और जेवरात रखे रहते हैं। इसी के चलते उसके मन में लूट की बात आ गई।
सतर्कता से रोकी जा सकती हैं घटनाएं: अजय मोहन
रिटायर्ड आईपीएस अजय मोहन शर्मा बताते हैं कि बहुत घटनाओं को मामूली सतर्कता से रोका जा सकता है। वे बताते हैं कि पहले जो चौकीदार रहते थे, अधिकतर बाहर के होते थे। तब कोई सत्यापन नहीं होता था। बहुत से बाहरी नौकरों ने वारदातें कीं। लेकिन अभी भी लोग जागरूक नहीं हैं। बिना पुलिस सत्यापन कराए ही नौकरों को रख लेते हैं। अगर
सत्यापन होता है तो साइकोलॉजिकल नौकर को डर भी रहता है कि अगर कुछ किया तो पकड़ा जाएगा। अजय मोहन बताते हैं कि छोटे बच्चों को लेकर सावधानी बरतें। कई बार आप बाहर होते हैं और बच्चे घर पर अकेले। कोई घर फोन करता है तो बच्चा बोल देता है कि वह अकेला है, इससे दूसरे को वारदात के बारे में सोचने का मौका मिल सकता है।
बीट सिस्टम दुरुस्त हो
अजय मोहन शर्मा कहते हैं कि दिल्ली में बीट सिस्टम यूपी से बेहतर है। हर बीट सिपाही को उसकी बीट में कितने घर हैं, कितने बुजुर्ग अकेले रहते हैं, इसकी जानकारी होनी चाहिए। बीट सिपाही का नंबर हर व्यक्ति के पास भी हो। ताकि अगर वह किसी अंजान आदमी को देखता है जिसकी गतिविधि संदिग्ध है तो वह सिपाही को जानकारी दे सके।
नौकरों का पुलिस सत्यापन कराएं
अगर आप बाहर का कोई नौकर रख रहे हैं तो उसका पुलिस सत्यापन जरूर कराएं। अगर घर में सीनियर सिटीजन ही रहते हैं तो उनके बारे में थाना पुलिस को जानकारी दें। सभी कप्तानों को इस संबंध में दिशा निर्देश दिए गए हैं। अगर आप ज्यादा नकदी लेकर जा रहे हैं तो इसमें थाना पुलिस की मदद ले सकते हैं। -ध्रुवकांत ठाकुर, एडीजी जोन मेरठ