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कोरोना से जंग: महिलाओं ने घर की रसोई के जायके से आपदा को अवसर में बदला, पढ़िए कैसे
Tue, 04 Aug 2020 10:54 AM IST
कपिल kapil
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
शालू अग्रवाल, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Tue, 04 Aug 2020 10:54 AM IST
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छाया रस्ताेगी।
- फोटो : अमर उजाला
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रठ की पाक कला में निपुण महिलाओं ने कोरोना आपदा की घड़ी को अवसर में बदला। जब शहर के होटल-रेस्तरां बंद हुए तो इन्होंने घर बैठे लोगों को घर जैसा भोजन का स्वाद चखाया। संक्रमण से बचाव, अशुद्धता की चिंता से दूर सात्विक रसोई से निकले स्वाद ने मांग बढ़ाई।
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चिकित्सकों से सलाह कर कोरोना पीड़ितों को पहुंचाया भोजन
थापर नगर की छाया लॉकडाउन से पहले सामान्य गृहिणी थीं। लॉकडाउन में इन्होंने अपनी रसोई से फूड डिलिवरी का काम शुरू किया और इससे इनकी एक नई पहचान बनी। छाया बताती हैं कि लोगों को ऐसा खाना भी चाहिए था जो साफ सफाई के साथ बना और सात्विक हो। लॉकडाउन में कई ऐसे बुजुर्ग थे जिनके पास कोई नहीं रहता, जिनके नौकर भी नहीं हैं, खाना बनाने वाला कोई नहीं। वो क्या करें, तो ऐसे लोगों को मैंने खाना देना शुरू किया। कई ऐसे परिवार जहां कोई संक्रमित हो गया, पूरा परिवार ही पॉजिटिव हो गया। उनके यहां खाना बनाने की समस्या आ गई। ऐसे परिवारों से भी खाने की मांग आई। इसे पूरा करना एक चुनौती था। चिकित्सकों की मदद से कोरोना पीड़ितों की डाइट को समझा, उसी के अनुसार उन्हें खाना देना शुरू किया। आज रोजाना करीब 10 ऑर्डर आ जाते हैं।
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आत्मविश्वास बढ़ा... आज मैं भी कुछ कर सकती हूं
शास्त्रीनगर की रिया रस्तोगी लॉकडाउन में आम दिनों से ज्यादा व्यस्त हैं। रिया का अधिकांश वक्त रसोई में गुजरता है। रसोई में रिया अपने परिवार के साथ ही उन लोगों के लिए भी खाना बनाती हैं, जिनका मन लॉकडाउन में कुछ चटपटा और अच्छा खाने का होता है। रिया बताती हैं, लगभग सालभर पहले पति गुजर गए। पति के जाने के बाद अकेलापन, फिर लॉकडाउन, बच्चे भी घर पर थे। सहेलियों ने राय दी कि अपना कोई काम शुरू करो, जिससे आर्थिक सहारा मिले और मैंने सहेलियों की मदद से यह शुरू किया।
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कक्षाएं बंद हुईं तो शौक को ही अवसर बना लिया
मानसरोवर कॉलोनी निवासी शिल्पी अंग्रेजी की शिक्षिका हैं। लोग शिल्पी को उनकी अच्छी अंग्रेजी के लिए जानते हैं, लेकिन अब उनकी पहचान पाक कला विशेषज्ञ की बन गई है। वह पहले अंग्रेजी की कक्षाएं लेती थीं। लॉकडाउन में कक्षाएं बंद हो गईं। खाना बनाने का शौक शुरू से था। लेकिन समय नहीं मिल पाता था। काम और शौक को आय का अवसर बनाया। होम फूड डिलीवरी का काम शुरू किया। पहले सहेलियों और जानने वालों के ऑर्डर पर उन्हें घर का बना खाना भिजवाया। सहेलियों को भोजन और स्वाद पसंद आया, फिर दूसरे लोग भी जुड़ते गए। अब रोजाना 10 से 12 ऑर्डर हो जाते हैं। अप्रैल में काम शुरू किया था।
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