शादी के जश्न में मामा, बुआ, चाची-ताई ही न हों तो जश्न फीका नजर आता है, लेकिन कोराना महामारी ने सोशल डिस्टेंसिंग को तो बढ़ावा दिया ही साथ ही रिश्तों में भी दूरियां पैदा कर दी हैं। चाहकर भी लोग अपनों की शादी जैसे आयोजनों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। कोराना के खौफ ने लोगों को इस कदर मजबूर कर दिया है कि मेजबान और मेहमान दोनों की संक्रमण के खौफ में हैं। पढ़ें ये रिपोर्ट-
कोरोना ने दूरी बढ़ाई, शादी में मामा न ताई, मेजबान से मेहमान तक में संक्रमण का खौफ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केस 2 - घर की शादी में बेगानी
शास्त्रीनगर निवासी दीपा गुप्ता के मायके में नवंबर अंत में शादी है। दीपा कहती हैं अपने घर में शादी है और मैं ही नहीं जा पा रही। हमने योजना बनाई थी इस आखिरी शादी पर खूब धमाल करेंगे लेकिन सारी योजना फेल हो गई। घर में सभी ने मना कर दिया कि बाहर जाने पर सेहत बिगड़ने का खतरा है इसलिए नहीं जाना।
सुधा, दीपा और अनुभव की आपबीती तो बानगी है। इनकी तरह शहर में कई ऐसे परिवार हैं जिनकी शादी अपनों के बिना सूनी-सूनी रहेगी। देवोत्थान एकादशी से सहालग प्रारंभ हो रहे हैं। लेकिन किसी ने सोचा न था ऐसी शादियां इस बार होंगी। अपनों के बिना ही शादी समारोह होंगे। यह पहली बार है जब शादियों में रिश्तेदार या कुटुंब नहीं घर के ही लोग पूरी तरह शामिल नहीं होगे। बहन, भाई, ताई, चाचा के बिना विवाह और रस्में होंगी।
केस 3 - न लौटकर आएंगे ये पल
शिवशक्ति नगर निवासी सुधा शर्मा के सबसे करीबी भाई के यहां शादी है, मगर सुधा उसमें नहीं जा पा रहीं। जबकि शादी के सभी नेग बुआ के नाते सुधा को करने हैं। सुधा कहती हैं ये पल लौटकर कभी नहीं आंएगे। शादी एक बार होती है मगर कोरोना के कारण सारे अरमानों पर पानी फिर गया। क्योंकि भीड़ में संक्रमण का खतरा है इसलिए शादी में जाना कैसिंल किया है।
यह भी पढ़ें: मुजफ्फरनगर: गंग नहर में गिरी कार, एक युवती की मौत, दूसरी को राहगीरों ने बचाया, दो युवक लापता
मेजबान, मेहमान दोनों कर रहे बचाव
सरकार ने सीमित मेहमानों में समारोह करने की सख्ती लागू की है। अनलॉक के बाद भी यातायात बाधित है। लोगों को ट्रेन, फ्लाइट से आने-जाने में परेशानी हो रही है। किसी को खुद कोरोना है तो किसी को संक्रमण होने का खतरा है इसलिए पारिवारिक आयोजनों में जाने से बच रहे हैं। मेजबान भी मजबूरी में अधिक मेहमान नहीं बुला रहे।
मिलने का होता है बहाना
शादी समारोह व अन्य संस्कार परिवार के मिलने का बहाना होते हैं। जब आयोजनों के बहाने पूरा परिवार, दोस्त, रिश्तेदार सालों बाद एक दूसरे से मिलते हैं। कुशलता जानते हैं। इसी बहाने नई पीढ़ियां रिश्तों का महत्व समझती हैं। खुशियों में सब साझेदार बनते हैँ। लेकिन कोरोना के कारण इस साल अपनों से मिलने का यह बहाना भी छूट गया।