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कोरोना का कहर: स्वतंत्रता सेनानी की बेटी-पत्नी को नहीं मिले चार कंधे, हर तरफ बेबसी, बेटी ने किया पिता का अंतिम संस्कार

Sat, 08 May 2021 02:23 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 08 May 2021 02:23 PM IST
सार

देश की स्वतंत्रता के लिए जीवन पर भर प्रयासरत रहे रामनिवास गोयल की पत्नी और बेटी को अंत समय में चार कंधे भी नहीं मिले। रिश्तेदारों के साथ आसपास के लोग भी मदद के लिए आगे नहीं आए।

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Corona: Daughter and wife of freedom fighter has not come of neighbours for funeral in Meerut
अंतिम संस्कार करते कर्मचारी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

देश की स्वतंत्रता के लिए जीवन पर भर प्रयासरत रहे रामनिवास गोयल की पत्नी और बेटी को अंत समय में चार कंधे भी नहीं मिले। रिश्तेदारों के साथ आसपास के लोग भी मदद के लिए आगे नहीं आए। 12 घंटे वृद्ध महिला का शव घर में पड़ रहा। सामाजिक संगठन के प्रयास के बाद नगर निगम की एंबुलेंस को बुलाकर शव को श्मशान घाट पहुंचाया गया। मृतक महिला के बेटे ने अंतिम संस्कार किया।

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मेरठ में सोफीपुरम इंद्रप्रस्थ एस्टेट निवासी योगेंद्र ने बताया कि उनके पिता रामनिवास गोयल का स्वतंत्रता संग्राम में योगदान रहा है। उनकी 38 वर्ष पूर्व मृत्यु हो चुकी है। गुरुवार सुबह उनकी बहन और वर्तमान में सिंचाई विभाग में क्लर्क के रूप में सेवारत साधना बंसल की मृत्यु हो गई। तमाम प्रयास के बाद भी बहन का अंतिम संस्कार की व्यवस्था में असमर्थ रहे। उन्होंने जन कल्याण वेलफेयर सोसायटी के वॉलेटियर्स को फोन कर मदद मांगी। टीम की मदद से देर शाम साधना का अंतिम संस्कार हुआ। भाई उसका अंतिम संस्कार कर लौटा भी नहीं था कि स्वतंत्रता सेनानी की पत्नी किरण देवी का भी निधन हो गया। वह 85 वर्ष की थीं।
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योगेंद्र गोयल ने मां की मृत्यु हो जाने पर पुन: समिति से मदद मांगी। समिति अध्यक्ष दुष्यंत रोहटा ने टीम के साथ पहुंचकर शव को एंबुलेंस तक पहुंचाया। सूरजकुंड श्मशान में अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई। दुष्यंत रोहटा ने कहा कि अंतिम संस्कार के लिए अगर किसी कोविड मृतक को समस्या आ रही है तो 9837572425 पर संपर्क कर सकता है।
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बेटी ने किया पिता का अंतिम संस्कार
कोरोना महामारी के कारण आसपास के लोग भी पड़ोसियों की मौत में शामिल नहीं हो रहे हैं। ऐसे में बेटियां ही बेटे की सभी कमी को पूर्ण करते हुए व्यवस्था कर रही हैं। शास्त्री नगर डी ब्लॉक निवासी मनोज खरे फार्मा कंपनी में कार्यरत था। पत्नी एमपीजीएस स्कूल में सुपरवाइजर हैं। कोरोना के चलते मनोज की शुक्रवार को मृत्यु हो गई। पड़ोसियों सहित अन्य दूर रिश्तेदार भी महामारी के चलते मदद के लिए नहीं पहुंच पाए। बेटी अविका खरे ने पिता का अंतिम संस्कार किया। सूरजकुंड श्मशान में इस महामारी के दौरान 15 दिन में ऐसे चार मामले सामने आ चुके हैं जहां बेटी ने संस्कार किया।

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