Shamli : आयोग ने मोबाइल फोन कंपनी के मैनेजर पर लगाया 50 हजार का जुर्माना, ये है पूरा मामला
Shamli News : आयोग ने मोबाइल फोन कंपनी के मैनेजर पर 50 हजार का जुर्माना लगाया गया है। जानिए आखिर पूरा मामला क्या है।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली ने त्रुटियुक्त मोबाइल फोन बाजार में विक्रय के लिए उपलब्ध कराने पर कंपनी के जनरल मैनेजर पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
गांव सिलावर निवासी प्रवेश तरार ने 31 जुलाई 2017 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली में परिवाद दायर कराया था कि उसने प्रो. मैसर्स अवर ड्रीम हाउस वर्मा मार्केट शामली से इंटैक्स कंपनी का एक मोबाइल फोन 16 जनवरी 2017 को 9600 रुपये में खरीदा था। इसकी एक वर्ष की वारंटी थी।
मोबाइल फोन वारंटी अवधि में खराब हो गया, जिसकी शिकायत उसने विक्रेता से की तो उसने सर्विस सेंटर प्रो. मैसर्स रॉयल कम्यूनिकेशन वर्मा मार्केट शामली पर दिखाने के बात की और कहा कि अगर फोन ठीक नहीं हुआ तो सर्विस सेंटर से दूसरा फोन दिया जाएगा। सर्विस सेंटर पर फोन को चैक करके कहा गया कि मोबाइल फोन को कंपनी की वारंटी से 377 दिन बाहर हो गया है और इसे अब बदला नहीं जा सकता।
इसके बाद उसने विक्रेता से फोन बदलने या उसकी कीमत वापसी की मांग की तो उसने कहा कि सीलबंद फोन बेचा है। अगर मोबाइल के विनिर्माण संबंधी त्रुटि है तो कंपनी उसकी जिम्मेदार है। इसके बाद उसने कंपनी के जनरल मैनेजर कारपोरेट ऑफिस नई दिल्ली से बात की तो उसने बताया कि कंपनी के पोर्टल की तकनीकी खराबी के कारण 377 दिन पहले वारंटी खत्म होना बता रहा है। उन्हें हैंडसैट बदलकर दे देंगे। इसके बाद उसने हैंडसैट को को सर्विस सेंटर पर जमा करा दिया। इसके बाद वह नया हैंडसैट लेने के लिए कई बार सर्विस सेंटर पर गया, लेकिन उसे नया हैंडसैट नहीं दिया और पुराना हैंडसैट दे दिया।
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आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता व सदस्य अभिनव अग्रवाल ने परिवाद की सुनवाई करने के बाद परिवादी को देने के लिए विक्रेता, सर्विस सेंटर संचालक और कंपनी के मैनेजर को मोबाइल की कीमत 9600 रुपये मय नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज, शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के 10 हजार रुपये और परिवाद व्यय 10 हजार रुपये आयोग में जमा करने का आदेश सुनाया। इसके अलावा आयोग ने त्रुटियुक्त मोबाइल विक्रय के लिए बाजार में उपलब्ध कराने के कारण मोबाइल कंपनी के जनरल मैनेजर को अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड की धनराशि नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी।
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