गर्मी में बच्चों पर हीट स्ट्रोक का कहर, ये लक्षण दिखें तो ऐसे करें बचाव
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मई के महीने के शुरू में ही तापमान बढ़ना शुरू हो गया था। अब जून माह शुरू हो गया है। इस माह के पहले दो दिन में भी गर्मी अपना विकराल रूप दिखा रही है। बढ़ते तापमान के साथ गर्मी जनित बीमारियां भी बढ़ रही हैं। गर्मी से वैसे तो हर उम्र के लोग प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक असर मासूम बच्चों पर पड़ रहा है।
गर्मी के कारण 10 साल तक के बच्चे सबसे अधिक बीमार हो रहे हैं। लू और गर्मी के चलते बच्चे हीट स्ट्रोक का शिकार हो रहे हैं। हीट स्ट्रोक से पीड़ित बच्चों की निजी और सरकारी अस्पतालों में भीड़ लगी हुई है।
ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह लेकर बच्चे का उपचार कराना चाहिए। इसके अलावा बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर वेदभानू मलिक ने बताया का कहना है कि उनके यहां कुल बच्चों में 25 से 30 प्रतिशत बच्चे हीट स्ट्रोक से पीड़ित आ रहे हैं। उनका कहना है कि हीट स्ट्रोक से मासूमों को बचाने के लिए गर्मी से बचने वाले उपाय करने चाहिए।
अस्पताल में भर्ती बच्चों के नाम
सायान तीन माह, कृष्ण सात माह, देवांश साढ़े तीन साल, हुसैन साढ़े पांच माह, आदिल नौ माह, अर्जुन पांच माह, कृष्णा छह माह आदि अस्पताल में भर्ती है, जिनका उपचार चल रहा है।
स्कूलों की छुट्टियों में बढ़े हीट स्ट्रोक के केस
चिकित्सकों का कहना है कि स्कूल की छुट्टियां होने के बाद से हीट स्ट्रोक के केस तेजी से बढ़े हैं। उनका मानना है कि दो साल से लेकर 10-12 साल तक के बच्चों में हीट स्ट्रोक होता है।
स्कूल खुले होने पर बच्चों को खेलने की आजादी कम मिलती है। स्कूल की छुट्टी होने के बाद बच्चे इधर-उधर खेलते हैं। बच्चे तेज धूप में दोपहर के समय खेलते हैं। उस समय तो इसका पता नहीं चलता, लेकिन बाद में तेज बुखार और उल्टी होने पर इसका पता चलता है।
क्या है हीट स्ट्रोक
गर्मी में शरीर में पानी की कमी होने को हीट स्ट्रोक कहा जाता है। गर्मी के मौसम में सबसे ज्यादा खतरा हीट स्ट्रोक यानी लू लगने का रहता है। जैसे ही तापमान बढ़ता है तो लू लगने का खतरा बन जाता है। इसमें शरीर में पानी की कमी होने पर उल्टी के साथ तेज बुुखार होता है और शरीर में पानी की कमी होने पर बेहोशी आने लगती है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह ले। तेज बुखार होने पर माथे पर ठंडे पानी की पट्टी रखे।
बचाव के उपाय
1. धूप में निकलने से पहले अपने सिर को सूती कपड़े से ढकना चाहिए।
2. धूप में बाहर निकले तो थोड़ी-थोड़ी देर बाद तरल पदार्थों का सेवन करते रहें।
3. तरल पेय पदार्थों का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए।
4. ज्यादा ठंडे खाने व पीने के पदार्थों का सेवन करने से बचें।
5. प्यास बुझाने के लिए कुल्फियां, बर्फ व अन्य बाजारी वस्तुओं का सेवन कम से कम करें।
6. घर पर बने तरल पदार्थ शिकंजी, छाछ, जूस, पानी के साथ ग्लूकोज आदि का सेवन करें।
7. पीड़ित बच्चे के शरीर में पानी की कमी न होने दें, कुछ न हो तो सादा पानी पीते रहें।
8. खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन करें।
तेज बुखार के साथ उल्टी होना।
उल्टी और बुखार के साथ दस्त होना।
बच्चों में बेचैनी होना, बेहोशी छा जाना।
गर्मी में उल्टी दस्त से बचाव के लिए 28 मई से नौ जून तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा चलाया जा रहा है। इसके तहत जिले की सभी सात सीएचसी पर ओआरएस के काउंटर बनाए गए हैं। इनके अलावा घर-घर अभियान चलाकर उल्टी दस्त से पीड़ित बच्चों को ओआरएस का घोल पिलाने व बनाने के तरीके समझाए जा रहे हैं। हीट स्ट्रोक और गर्मी से बचाव के लिए दवा और उपचार की सुविधा सभी सीएचसी और पीएचसी पर उपलब्ध हैं। - डॉक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।