अमर उजाला ने जाना पीड़ितों का दर्द, इन्हें चाहिए सरकार की मदद, 'छपाक' से कम नहीं ये कहानियां
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एसिड अटैक की शिकार बेटियों पर क्या गुजरती है। यह उनसे बेहतर कोई नहीं जान सकता। बाहर कैसे निकलेंगी। अब कैसे पढ़ेंगी। शादी कैसे होगी। कौन साथ देगा और भी न जाने कितने सवाल उनके जेहन में कौंधते रहते हैं। इसके बावजूद उनमें हौसले की कमी नहीं है। उनका कहना है कि जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए हौसला काफी नहीं है, इसके लिए समाज और सरकार से भी सहयोग की जरूरत है।
एसिड अटैक पर बनी फिल्म ‘छपाक’ का जिक्र आते ही जिले में एसिड अटैक पीड़िताओं का दर्द भी छलक आया। इन पर किए गए हमलों को काफी समय बीत चुका हो। मगर इन हमलों ने उन्हें शारीरिक ही नहीं मानसिक तौर पर भी काफी झुलसाया है। अब वे खुद और परिजनों के हौसले के सहारे ही फिर से जिंदगी जीने और कामयाब होने के प्रयास में जुटी हैं।
बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने पीड़िताओं और उनके परिजनों से बातचीत की तो उनका दर्द, उनका हौसला और आगे बढ़ने की उनकी बेताबी से लेकर कई अन्य जज्बात उभरकर सामने आए। छपाक में दीपिका पादुकोण ने एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल के किरदार को जीवंत किया है। फिल्म में उनका नाम मालती है। प्रस्तुत है चंद्रशेखर शर्मा की ये रिपोर्ट...
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सरकार और समाज को भी बदलना होगा
देवबंद क्षेत्र के गांव बास्तम निवासी शिवानी कहती हैं कि 2016 में उस पर एसिड अटैक हुआ था। काफी समय बीत चुका है। मगर उनकी आंखों में वह मंजर हमेशा याद रहता है। किसी लड़की के लिए चेहरे से लेकर शरीर के ज्यादातर हिस्से का जलना क्या होता है, इसके बारे में या तो वो जानती है या फिर उसका परिवार। काफी जद्दोजहद के बाद खुद को संभाला है। अफसोस इस बात का है कि पापा अब साथ नहीं हैं। मां है मगर वह चाहकर भी उसके सपने पूरे नहीं कर सकी क्योंकि घर की हालत ठीक नहीं है। वह वकील या प्रतिष्ठित जॉब कर नाम चमकाना चाहती है। सरकार या समाज से मदद मिलती तो शायद आगे बढ़ जाती। दीपिका की मूवी हो सकता है ऐसे में उन जैसों को नया हौसला दे पाए। मेरा एक अनुरोध समाज और सरकार से है कि एसिड जैसे खतरनाक पदार्थ पर पाबंदी में सख्ती से आगे आएं और सहयोग करें। तभी ऐसे हमले रुक रुकेंगे। ऐसा कृत्य करने वालों को जल्द और कड़ी सजा जरूरी है।
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आंखों में अब तक दिक्कत, हिम्मत नहीं छोड़ी
शहर के रायवाला क्षेत्र में रहने वाली एसिड अटैक पीड़िता नबीहा इस समय एक स्कूल में कक्षा 11 में पढ़ रही है। उसके पिता मोबिन एक प्राइवेट जॉब कर रहे हैं। मां नाजिमा उसका पूरा ध्यान रखती है। कुछ माह पहले ही बाइक सवार युवकों ने स्कूल से लौटते समय एसिड से हमला किया तो उसकी आंखों को काफी नुकसान पहुंचा। नबीहा और उसके अब्बू बताते हैं कि आंखों में अब भी दिक्कत हैं। मगर हौसला नहीं खोया है। नबीहा का कहना है कि 12वीं करने के बाद ही वह आगे का करियर तय करेगी। उसका कहना है कि ऐसे हमलावरों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। छपाक मूवी के बारे में सुना है। इससे उसकी जैसी अन्य बेटियों को हौसला मिलेगा।
पुराने जख्मों को भूल आगे बढ़ेंगे
नागल क्षेत्र में एसिड अटैक का शिकार हो चुकी एक बेटी और उसके परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की तो परिवार के सदस्यों ने इतना ही कहा कि पुरानी बातों का अब जिक्र क्या करना और क्या मलाल करना। इस बेटी की मां शहनवाज ने इतना ही कहा कि पुराने जख्मों को भूलकर आगे बढ़ेंगे। हां, इतना जरूर है कि ऐसी पीड़िताओं को आगे बढ़ने के लिए सभी को सहयोग करना चाहिए।
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