फिल्म 'छपाक' जैसी रियल कहानी... दर्द के आगे नहीं टूटा हौसला, यासमीन ने पाया राट्रीय पुरस्कार
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जिस तरह फिल्म छपाक में दीपिका पादुकोण ने मालती नाम से एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी को रुपहले पर्दे पर बयां किया है, ऐसी ही पीड़ा शामली जिले की कई युवतियों ने भी सही है। वह पीड़िताएं कभी इकतरफा प्यार की शिकार बनी हैं, तो कई बार रिश्तों में आई खटास के कारण पीड़ा झेली। इन युवतियों को ऐसा दर्द मिला, जो रह रहकर तड़पाता है। लेकिन जिंदगी जद्दोजहद में वह हारी नहीं, बल्कि हौसला रखते हुए आगे बढ़ने की कोशिश में लगी रहीं।
शामली शहर के अलावा कांधला और कैराना में भी एसिड अटैक के मामले पूर्व में सामने आ चुके हैं। शामली शहर के अंसारियान मोहल्ले में सात अप्रैल 2004 को अंसारियान मोहल्ला निवासी सलीम मंसूरी की दो बेटियों पर छत पर सोते समय रात में एसिड अटैक किया गया था। दोनों बहनें यासमीन और आसमा का चेहरा और आंखें बुरी तरह झुलस गई थी। यह कांड लखनऊ और दिल्ली तक गूंजा था। दोनों बहनों का इलाज दिल्ली के अस्पताल में लंबे समय तक चला। इसके बाद यह परिवार दिल्ली चला गया था।
परिजनों का कहना है कि उस समय सरकार की तरफ से कुछ मदद मिली थी, लेकिन इलाज में खर्च अधिक आने के कारण वह मदद पर्याप्त नहीं थी। दोनों बहनों के इलाज में हुए खर्च को लेकर परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भी परिवार ने जैसे-तैसे कर दोनों बहनों का इलाज कराया। शामली में सलीम के भतीजे अकरम ने बताया कि यासमीन ने नर्सिंग का कोर्स किया है और एक अस्पताल में स्टाफ नर्स की नौकरी कर रही है।
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अकरम का कहना है कि दिल्ली में रहने के कारण उन्हें उनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। सलीम मंसूरी से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि वे अभी कहीं बाहर है। इस बारे में बात नहीं कर सकते। इनके अलावा कांधला में चार बहनों पर एसिड अटैक किया गया था, तो कैराना में भी एक महिला एसिड अटैक की शिकार हुई थी।
राट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हुई यासमीन
एसिड अटैक पीड़ित यासमीन ने हौसला नहीं छोड़ा। एसिड अटैक के बाद भी यासमीन ने दिल्ली में पढ़ाई जारी रखी और दिल्ली यूनिवर्सिटी से कला वर्ग में स्नातक करने के बाद मल्टीमीडिया में डिप्लोमा किया। कुछ समय पहले ही दिल्ली में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से आयोजित कार्यक्रम में यासमीन को दिव्यांगजन सशक्तिकरण हेतु दृढ़ संकल्प शक्ति एवं निश्चय हेतु बहु दिव्यांगता वर्ग में 2017 कर सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी होने का राष्ट्रीय पुरस्कार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिया गया।
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