यूपी पुलिस की ‘तीसरी आंख’ ही ले उड़े शहर के शातिर चोर, कंट्रोल रूम रहा बेखबर
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व्यापारियों और आम जनता को सीसीटीवी कैमरे लगाने की नसीहत देने वाली मेरठ पुलिस खुद कितनी सतर्क है, इसकी पोल शहर के शातिर चोरों ने खोलकर रख दी है। करीब तीन माह पहले शहर के आठ प्रमुख चौराहों व स्थानों से पुलिस के सीसीटीवी कैमरे चोरी हो गए और इसका पता भी दस दिन पहले ही चला।
यानी इसकी कलई भी खुल गई कि पुलिसकर्मी कंट्रोल रूम से शहर की कैसी निगरानी कर रहे हैं, जो उन्हें कैमरे चोरी होने का दो माह 20 दिन बाद पता चला। अब एसपी सिटी ने संबंधित थानेदारों से इसकी रिपोर्ट तलब कर ली है।
पुलिस महकमे ने एक निजी कंपनी के सहयोग से शहर में 52 स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए थे। इन कैमरों का कंट्रोल रूम घंटाघर स्थित एसपी सिटी के कार्यालय में बनाया गया। यहां लगीं एलईडी स्क्रीन के माध्यम से पुलिसकर्मी पूरे शहर की गतिविधियों पर निगाह रखते हैं।
साल 2018 में पुलिस लाइन में बने ट्रैफिक कंट्रोल रूम से भी इस कंट्रोल रूम को जोड़ दिया गया। साथ ही 32 अन्य स्थानों पर एचडी कैमरे लगाए गए। इन कैमरों का मकसद यही है कि वारदात कर अपराधी भागें तो उन्हें शहर के चौराहों और प्रमुख मार्गों पर धर लिया जाए।
- शहर में 52 प्रमुख स्थानों पर लगे हैं पुलिस के सीसीटीवी कैमरे
- 08 प्रमुख चौराहों और स्थानों से आठ चोरी हो गए कैमरे
- पुलिस को 03 माह बाद पता चला, रोजाना निगरानी पर उठे सवाल
आठ जगहों पर चोरी
हापुड़ अड्डा चौराहा, ईव्ज चौराहा, बच्चा पार्क चौराहा, समर गार्डन रोड, फतेहल्लापुर, लिसाड़ी रोड, बेगमपुल और रेलवे रोड।
ऐसे चला पता
एसपी सिटी रणविजय सिंह के अनुसार शहर में कुछ स्थानों पर निगरानी के दौरान सीसीटीवी कैमरे बंद मिले हैं। जब इन कैमरों की जांच कराई तो पता चला कि कैमरे पूर्व में चोरी हो चुके हैं। इनकी जांच कराएंगे।
तीसरी आंख ही खोलेगी राज
जिन स्थानों से ये कैमरे चोरी हुए उनमें से चार चौराहे शहर के मुख्य चौराहों में शुमार हैं। यहां 24 घंटे पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। यह भी कह सकते हैं कि चेन और पर्स स्नेचिंग के ये साफ्ट टारगेट एरिया हैं। पुलिस इस एंगल पर जांच कर रही है कि कहीं किसी साजिश के चलते तो प्रमुख प्वाइंटों से कैमरे चोरी नहीं हुए ताकि किसी अपराध को कंट्रोल रूम की निगरानी से छिपाया जा सके।
संभव है कि इन प्वाइंटों के आसपास लगे दूसरे कैमरों से ही चोरों का पता चले। एसपी सिटी का कहना है कि सभी संबंधित थानेदारों से जांच रिपोर्ट मांगी गई है। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा।