CCSU : विवि के डिप्टी रजिस्ट्रार की होगी सेवा समाप्त, बीटेक में ईई ब्रांच बंद
हाईरैंक बिजनेस स्कूल गौतमबुद्धनगर द्वारा स्ववित्त पोषित योजना के अंतर्गत चल रहे बीएड कोर्स की मान्यता रदद कर दी गई।
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सीसीएसयू के डिप्टी रजिस्ट्रार अरुण यादव की सेवा समाप्त होगी। उनके निष्कासन के लिए विवि प्रशासन ने शासन को रिपोर्ट भेजने का निर्णय लिया है। सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में संचालित बीटेक इलेक्ट्रॉनिक एंड इंस्टूमेंटेशन ब्रांच में कम एडमिशन होने के कारण घाटे के चलते इस साल से बंद करने का निर्णय लिया गया।
शुक्रवार को कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में कार्य परिषद की बैठक हुई। कार्य परिषद की बैठक में समिति की संस्तुति को स्वीकृत किया गया, जिसके अनुसार उप कुलसचिव अरुण यादव के निष्कासन के संबंध में शासन को कार्रवाई की जाने के लिए पत्र भेजे जाने का निर्णय लिया गया।
कर्मचारियों व शिक्षकों के लिए उचित नियुक्ति पत्र, अनुबंध पत्र स्वीकृत किए। सेल्फ अप्रेजल फॉर्म तैयार कर प्रत्येक संकाय के डीन को अपने-अपने संकाय के ऐसे अनुबंध पत्रों को तैयार करवाने के लिए आदेशित किया गया।
निर्णय लिया गया कि स्ववित्त पोषित संस्थानों में कार्यरत किसी भी शैक्षिक, गैर शैक्षणिक कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने की स्थिति में उसी संस्थान में उपलब्ध बजट को देखते हुए मृतक आश्रित कोटे से परिवार के एक सदस्य को उसकी योग्यता के अनुरूप नौकरी दी जाएगी।
सर छोटूराम इंस्टीटयूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी में शिक्षकों को पुनर्नियोजन के लिए समिति का गठन कर आवेदन करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया। समिति की अनुशंसा के आधार पर ही पुनर्नियोजन की प्रक्रिया की जाएगी। अन्यथा की स्थिति में आवश्यकतानुसार चयन प्रक्रिया शुरू होगी। 14 छात्रों को शोध उपाधि प्रदान की गई।
बीटेक में ईई ब्रांच बंद होने के बाद इस बात की संभावना पर भी विचार किया जाएगा कि ऐसे विषय प्रारंभ किए जाएं, जो आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप हो जिससे अधिक से अधिक शिक्षकों एवं कर्मचारियों को आवश्यकतानुसार समायोजित किया जा सके।
पिछले साल इस ब्रांच में 60 में से चार ही एडमिशन हुए थे। हाईरैंक बिजनेस स्कूल गौतमबुद्धनगर द्वारा स्ववित्त पोषित योजना के अंतर्गत चल रहे बीएड कोर्स की मान्यता रदद कर दी गई।
एमबीबीएस कॉपी प्रकरण में गिरी गाज
वर्ष 2018 में एसटीएफ ने एमबीबीएस की कॉपियों में गड़बड़ी के चलते विवि के कर्मचारियों समेत नौ लोगों को जेल भेजा था। ये सभी एमबीबीएस में कॉपियों की अदला-बदली के खेल में जुड़े हुए थे। दो एमबीबीएस के छात्र भी जेल गए थे। पूरे मामले की लखनऊ एसआईटी द्वारा जांच की जा रही है।
एसआईटी कई बार कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है। दोनों छात्रों का जांच जारी रहने तक रिजल्ट रोकने के आदेश दिए थे। लेकिन बाद में दोनों छात्रों का रिजल्ट जारी हो गया था। जानकारी मिलते ही कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने रिजल्ट रोके जाने के आदेश देकर चार कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया था। डिप्टी रजिस्ट्रार अरुण यादव को कार्य से हटा दिया था। जांच समिति गठित कर दी गई थी।