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उपचुनाव: कर्नाटक के बाद कैराना पर टिकी सभी राजनीतिज्ञ दलों की निगाहें, नेताओं ने डाला डेरा

Wed, 23 May 2018 07:01 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, आनंद प्रकाश, शामली
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, आनंद प्रकाश, शामली Updated Wed, 23 May 2018 07:01 PM IST
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Byelection: After the Karnataka, all the politicians' parties looked at Kairana
सभा को संबोधित करते हुए रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन - फोटो : अमर उजाला

वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के साथ ही कई बड़े आंदोलनों की साक्षी है शामली की धरती। यही नहीं शास्त्रीय संगीत के लिए किराना घराना ने पूरे विश्व में सुर्खियां बटोरी है। इसी धरती पर कर्नाटक के बाद अब कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर सभी राजनीतिज्ञ दलों की निगाहें टिकी हुई हैं। यही वजह है कि राजनीति के धुरंधर शामली जिले में डेरा जमाए हुए हैं। राजनीतिक मंचों से भी यही कहा जा रहा है कि कैराना उपचुनाव का संदेश देश की राजनीति को नई दिशा प्रदान करेगा।

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इतिहास गवाह है, जब भी कोई बड़ा आंदोलन हुआ तो उसमें शामली पीछे नहीं रहा। वर्ष 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ते हुए लोगों ने उस समय तहसील तक फूंक दी थी। शामली रेलपार निवासी बाबा मोहर सिंह और कैराना निवासी रहमतुल्ला सहित अनेक लोगों ने अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे। वहीं, बिजली की दरें बढ़ाने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन का पहला बड़ा आंदोलन एक मार्च 1987 को शामली के खेड़ीकरमू बिजलीघर से ही हुआ था। उस आंदोलन में पुलिस से टकराव होने पर किसान जयपाल और अकबर अली की मौत भी हो गई थी, जिसके बाद भाकियू में दम भर गया था। किसानों की आवाज बुलंद करते हुए लगातार आंदोलन शुरू कर दिए गए थे। वहीं, 2016 में कैराना से उठा पलायन प्रकरण ने भी देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक सुर्खियां बटोरी, जिसे भाजपा ने भी हाथोंहाथ लिया और गुंडागर्दी के खिलाफ बड़ा मुद्दा बना दिया था। इसी का असर रहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भाजपा के पक्ष में उठी लहर के कारण विधानसभा चुनाव 2017 में भाजपा को प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिला।
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अब कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव ने भी शामली जिले को राजनीति के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है। तीन फरवरी को सांसद हुकुम सिंह के निधन होने के कारण कैराना लोकसभा सीट रिक्त हुई। इस लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में भाजपा सीट बचाए रखने और गठबंधन जीतने के लिए संग्राम में उतर पड़ा है। भाजपा ने कैराना लोकसभा सीट पर मृगांका सिंह और रालोद ने तबस्सुम हसन को चुनाव मैदान में उतारा है। राजनीति के धुरंधरों ने जिले में डेरा डाल दिया है। आलम यह है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री, सह संगठन महामंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों ने शामली में डेरा डाल रखा है। साथ ही भाजपा ने दूसरे जनपदों के पदाधिकारियों की टीम और आरएसएस के जिला विस्तारक से लेकर अन्य पदाधिकारियों को चुनाव में लगाया हुआ है।
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पढ़ें : सीएम योगी बोले- मुजफ्फरनगर दंगों के खून से रंगे हैं अखिलेश के हाथ, नहीं आ सकते कैराना

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मंच पर बोलते भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्रनाथ पांडेय - फोटो : अमर उजाला

वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को ही गंगोह में जनसभा की, तो उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अब शामली पहुंच गए हैं। फिर 24 मई को शामली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उपमुख्यमंत्री की जनसभा होगी। वहीं, सपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल, नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी के अलावा रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, सपा के गोरखपुर सांसद प्रवीण निषाद, फूलपुर सांसद नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल सहित कई पूर्व मंत्री, सांसद और विधायक भी कई दिन से शामली जनपद में डेरा डाले हुए हैं। लब्बोलुआब यही है कि राजनीतिक वजह से ही सही, एक बार फिर शामली पर देश की नजरें टिकी हुई हैं। क्योंकि हर राजनीतिक दल यही मान रहा है कि कैराना उपचुनाव का परिणाम आगामी 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर संदेश देगा कि भाजपा का जनाधार कायम है या फिर विपक्षी गठबंधन पर जनता भरोसा करने लगी है। इसका नतीजा 28 मई को मतदान के बाद 31 मई को मतगणना से सामने आ ही जाएगा।  

शास्त्रीय संगीत के लिए विश्वविख्यात है किराना घरना  
बेशक कस्बा कैराना गुंडागर्दी की वजह से बदनाम हुआ, लेकिन शास्त्रीय संगीत की दुनिया में कस्बा कैराना का कोई सानी नहीं है। शास्त्रीय संगीत की दुनिया में किराना घराने का नाम बेहद अदब से लिया जाता है। किराना घराना के जनक अब्दुल करीम खां कस्बा कैराना के ही रहने वाले थे। इस घराने ने पंडित भीमसेन जोशी, गंगूबाई हंगल सहित अनेक नामचीन शास्त्रीय कलाकार दिए हैं। इन कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत की दुनिया में शामली का धरती का विश्वमंच पर नाम रोशन कर रखा रहा।
 

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