Budget 2019: किसान नेता बोले- इससे नहीं होगा भला, यह सिर्फ चुनावी बजट
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केंद्र सरकार के अंतरिम बजट को जहां आम किसानों ने तोहफा और राहत देने वाला बताया, वहीं किसान नेताओं को बजट नागवार गुजरा। किसान नेताओं का कहना है कि यह चुनावी बजट है, जिसमें लुभावनी घोषणाएं की गई हैं, लेकिन इससे किसानों का भला होने वाला नहीं है। उनका कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य समय पर दिलाने, फसलों का वाजिब दाम दिलाने, कीटनाशक दवाओं के दाम में कमी करके ही किसानों का फायदा हो सकता है।
किसान नेताओं की प्रतिक्रिया
भारतीय किसान संघ के प्रांतीय संयोजक श्यामवीर त्यागी का कहना है कि किसानों को जितनी उम्मीद थी, उतना नहीं मिला है, लेकिन किसानों के खाते में सीधा पैसा भेजने और किसान क्रेडिट कार्ड के ऋण पर ब्याज दर में कटौती करना सराहनीय कदम है। यह एक अच्छी शुरुआत है।
भाकियू जिलाध्यक्ष चौधरी चरण सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार का यह चुनावी बजट है, इससे किसानों का भला नहीं होगा। किसानों को ऋणमाफी की उम्मीद थी। समय से गन्ना मूल्य भुगतान और बकाया मूल्य पर ब्याज दिलाया जाता, तो किसानों को ज्यादा फायदा होता।
पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा का कहना है कि भाजपा का अंतरिम बजट किसानों के लिए महज लॉलीपाप है। एक हेक्टेयर के गन्ना किसान को प्रति वर्ष 200000 कम गन्ना मूल्य दिया जा रहा है तो मात्र 6000 रुपये सालाना में अन्नदाता क्या कर पाएगा। किसानों के सभी कर्ज समाप्त किए जाएं। देश के किसानों को उनकी फसलों के लाभकारी मूल्य दिलाया जाए। मनरेगा को सीधा किसानों से जोड़ा जाए। देश के किसानों की क्रय शक्ति बढ़ने से ही देश आर्थिक रूप से मजबूत हो सकता है।
किसान नेता फरहाद आलम गाड़ा का कहना है कि एक साल के बजट में दस साल आगे की झूठी बातें हैं, बहुसंख्यक भूमिहीन किसानों व श्रमिकों के लिए इसमें कुछ भी राहत नहीं है। पांच साल की प्रताड़ना और पीड़ा के बाद देश के किसान, व्यापारी, कारोबारी, बेरोजगार युवा अब भाजपा से मुक्ति चाहते हैं।
भाकियू (अंबावत) के पश्चिमी उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज चौधरी का कहना है कि भाजपा सरकार ने दो हेक्टेयर जमीन वाले किसानों को छह हजार रुपये सालाना देने की घोषणा की है। इस लिहाज से मात्र 500 रुपये प्रतिमाह से किसानों का भला होने वाला नहीं है। महंगी बिजली, महंगे खाद व कीटनाशक दवाओं के अलावा गन्ना मूल्य में बढ़ोत्तरी न होने, भुगतान समय पर नहीं मिलने से किसान परेशान है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद का कहना है कि इसे बजट कहना भी ठीक नहीं है, क्योंकि लोकसभा चुनाव के नजदीक आने पर केंद्र सरकार ने यह चुनावी बजट जारी किया है। यह घोषणा जब तक लागू होंगी, तब तक केंद्र की सरकार बदल जाएगी। बजट में जो राहत देने की बात कही गई है, वह जनता के लिए भविष्य में नुकसानदेह साबित होगी।
पूर्व विधायक शशिबाला पुंडीर का कहना है कि केंद्र सरकार का आखिरी बजट है, देश का किसान भी आगामी चुनाव में भाजपा को आखिरी श्रद्धांजलि देने का कार्य करेगा। क्योंकि दो हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को सालाना छह हजार रुपये देने की घोषणा हुई है, जिसमें प्रतिमाह 500 रुपये किसान को मिलेंगे। जिस किसान के परिवार में पांच सदस्य हैं, उनका 500 रुपये में क्या होगा।
किसानों ने की सराहना
गांव बुड्ढाखेड़ा निवासी किसान महावीर का कहना है कि केंद्र सरकार के बजट ने किसानों को काफी राहत दी है। खासकर छोटी जोत वाले किसानों के सामने आर्थिक तंगी रहती है। सालाना मिलने वाली सहायता राशि से मदद मिलेगी।
--किसान रामशरण का कहना है कि भाजपा ने किसानों के हित में अच्छा फैसला लिया है। पूर्व में ऋणमाफी करके किसानों को राहत दी गई थी। अब सालाना आर्थिक सहायता देकर भी अच्छा कार्य किया है।
--किसान सहदेव का कहना है कि सरकार ने बजट में राहत दी है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले यह कदम उठाया गया है। यदि पहले ही ऐसी घोषणा कर दी जाती, तो अब तक किसानों को उसका फायदा मिलना शुरू हो जाता।
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