अमर उजाला स्टिंग में बड़ा खुलासा: सीसीएसयू में दलाल राज, रुपये दो और हाथोंहाथ लो डिग्री-मार्कशीट
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में जिस काम को करने में तमाम सरकारी अड़ंगे लगाए जाते हैं, उसे दलाल तीन घंटे में पूरा करा दे रहे हैं। घूसखोरी का आलम यह है कि फोटो स्टेट की दुकानों से लेकर चाय और पान के खोखे तक वाले युवाओं से पैसे लेकर हाथोंहाथ डिग्री निकलवा रहे हैं।
यह कोई किस्सा-कहानी नहीं, बल्कि हकीकत है। यूनिवर्सिटी के उस दागदार सिस्टम की, जिसका रोजाना कितने ही बेरोजगार युवा शिकार बन रहे हैं। घूसखोरी की गंदी तस्वीर को जानने के लिए अमर उजाला ने जब स्टिंग ऑपरेशन किया तो महज छह सौ रुपये देकर ढाई घंटे में ही डिग्री हाथ में आ गई। जो युवा घूस नहीं दे रहा वह या तो सिर पकड़कर रो रहा है या फिर महीनों कैंपस के चक्कर लगाने को मजबूर है।
यूनिवर्सिटी में रोजाना करीब 200-300 छात्र-छात्राएं डुप्लीकेट मार्कशीट, डिग्री, ट्रांसक्रिप्ट और अन्य प्रमाणपत्र बनवाने के लिए तमाम राज्यों तक से आते हैं। कई साल पहले यूनिवर्सिटी ने इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम की शुरुआत की थी। अब छात्रों को कैंपस स्थित इलाहाबाद बैंक से फार्म लेना होता है। फार्म भरकर कागजात लगाने के बाद उसको बैंक के बराबर में वहीं बनाए गए छात्र समस्या निवारण केंद्र पर जमा करा दिया जाता है।
शुरू में यह व्यवस्था ठीक चली। लेकिन इसके बाद दलालों ने पूरे सिस्टम को भेद डाला। महीनों तक भी छात्रों के प्रमाणपत्र नहीं मिलने की शिकायतें आनी शुरू हो गईं। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दावा किया कि गोपनीय विभाग में कोई गड़बड़ी नहीं है। वहां पर सारा काम नियम कायदे से हो रहा है। अमर उजाला ने गोपनीय विभाग में हो रहे काम और यूनिवर्सिटी प्रशासन के दावों की हकीकत जानी तो चौंकाने वाली स्याह तस्वीर सामने आई।
डिग्री 600-1000, मार्कशीट के 1500 तक...
अमर उजाला रिपोर्टर ने इलाहाबाद बैंक से डिग्री का फार्म लिया तो यहीं से दलालों का मिलना शुरू हो गया। दलाल छात्र-छात्राओं से पूछ रहे थे कि साथ के साथ मार्कशीट या डिग्री चाहिए तो कुछ खर्च करना पड़ेगा। दोपहर डेढ़ बजे ऐसे ही एक दलाल से रिपोर्टर की बातचीत शुरू हो गई-
रिपोर्टर: 2009 की एमएससी की डिग्री निकलवानी है। आज ही चाहिए।
दलाल: हां, हां चिंता मत करो। आज ही निकल जाएगी।
रिपोर्टर : कितने पैसे लगेंगे?
दलाल: छह सौ रुपये और फार्म भरकर दे दो।
रिपोर्टर : ज्यादा नहीं हैं, पांच सौ रुपये कर लीजिए?
दलाल: भइया, हमें तो सौ रुपये ही मिल रहे हैं, पांच सौ रुपये भीतर कर्मचारी को देने हैं, ऐसे में मजबूरी है। ऐसा नहीं करोगे तो कर्मचारी तुमको घुमाते रहेंगे।
रिपोर्टर: ठीक है, अच्छा मार्कशीट कितने में बन जाएगी?
दलाल : उसके लिए एक हजार लगेंगे। डिग्री एक दिन में और मार्कशीट दो दिन में मिलेगी। यहां सबसे कम हैं। भीतर जाओगे तो वहां पर मार्कशीट के 15 सौ तक देने पड़ेंगे।
रिपोर्टर: ठीक है भइया।
शाम साढ़े चार बजे बाहर से व्यक्ति कैंपस जाता है और यूनिवर्सिटी के कर्मचारी से तीन डिग्री ले आता है। रिपोर्टर और दो अन्य छात्रों से पैसे लेकर डिग्री दे दी। एक सज्जन पत्नी के साथ दिल्ली से आए थे। उन्होंने बताया कि जिस काम के लिए चक्कर काट चुके थे, वो आज छह सौ रुपये में हो गया।
आखिर क्या कर रहे अफसर
यूनिवर्सिटी प्रशासन का दावा था कि रोजाना 150 से 200 डिग्री-मार्कशीट छात्रों को उनके लिखे लिफाफों पर पोस्ट की जाती हैं। सवाल ये है कि जब छात्रों के एक मार्च तक किए गए आवेदन भी पूरे नहीं हुए तो 25 मार्च को भरे गए फार्म पर डिग्री कैसे जारी हो गई। वह भी हाथोंहाथ। ऐसे में साफ हो गया है कि दलाल पूरे सिस्टम पर कितने हावी हैं। कई छात्रों का तो आरोप है कि इसमें कई अफसर भी लिप्त हैं। यूनिवर्सिटी कैंपस में घूमते इन दलालों पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही। ऐसे में सवाल ये है कि उच्च शिक्षा की डिग्री बांटने वाले संस्थान में ऐसा होगा तो युवा किस दिशा में जाएगा।
घूसखोरों को बख्शा नहीं जाएगा
कार्यवाहक रजिस्ट्रार को पूरे मामले में तलब किया जा रहा है। सारे रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। पिछले दिनों जो भी डिग्री-मार्कशीट बनाई गई हैं। उनके रिपोर्ट मांगी गई है। घूसखोर कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा। -प्रो. एनके तनेजा, कुलपति सीसीएसयू
सीसीएसयू में सिर्फ डिग्री ही नहीं मिलती, बल्कि दलाली क्या होती है, यह भी यहां पर देखने-सीखने को मिल जाता है। ये कहना है उन छात्र-छात्राओं का जिन्हें अपनी पढ़ाई की डिग्री पैसे देकर निकलवानी पड़ी। कैंपस में दलालों के इस नेटवर्क पर छात्र-छात्राओं ने साफ कहा कि इस यूनिवर्सिटी का कुछ नहीं हो सकता है। शर्मनाक है। केवल सोमवार को ही कर्मचारियों ने 15 से 20 हजार रुपये ले लिए। गाजियाबाद और नोएडा के कॉलेजों से आठ-दस छात्र-छात्राएं भी सोमवार को कैंपस पहुंचे थे। इनमें कई को तुरंत डिग्री चाहिए थी। जिससे भी बात हुई उसने यही बताया कि 10 से 15 दिन कम से कम लगेंगे।
परेशान छात्र-छात्राएं कैंपस में घूम ही रहे थे कि गोपनीय विभाग के पास एक दलाल खुद उनके पास आ गया। दलाल ने डिग्री निकलवाने के 10 हजार रुपये मांग लिए। मजबूर छात्र-छात्राओं को पैसे देने पड़े। सबको डिग्री मिल गई। गाजियाबाद से आए एक छात्र को अपनी मार्कशीट में कुछ बदलाव कराना था। उससे पैसे तो ले लिए गए लेकिन काम पूरे पैसे देने के बाद ही करने की बात कही गई। दलाल शाम पांच बजे तक छात्र को घुमाता रहा।
छात्र समस्या केंद्र पर भटक रहे इन छात्र-छात्राओं से बात हुई तो उनका दर्द जुबां पर आ गया। एक छात्रा ने बताया कि वो असम की रहने वाली है। गाजियाबाद के कॉलेज से मेडिकल की छात्रा है। बुधवार को उसको घर जाना है। अगर डिग्री नहीं मिलती तो कई हजार रुपये असम से आने में लग जाते। ऐसे में दलाल को पैसे देना मजबूरी हो गया। छात्र-छात्राओं का कहना था कि भ्रष्ट सिस्टम के बारे में मूवी में देखते आए थे। लेकिन आज तो खुद पैसे देकर काम कराना पड़ा।
मैं तो 10 दिन से भटक रहा हूं
15 मार्च से पहले डिग्री के लिए आवेदन करने वाले जाग्रति विहार निवासी छात्र सोमवार को आवेदन का पता करने आए थे। कैंपस में कर्मचारियों ने उनको बताया कि होली की छुट्टियां थीं, ऐसे में अभी कुछ और समय लगेगा। गोपनीय विभाग से अभी फार्म नहीं आया है। छात्र ने बताया कि जो पैसे नहीं दे रहा है, उसको इस तरह से भटकना पड़ता है।
आम तौर पर 15 से 30 दिन में मिलते हैं प्रमाण पत्र
अगर कोई छात्र-छात्रा सीधे प्रमाण पत्र बनवाता है तो उसको 15 से 30 दिन तक लग जाते हैं। सहारनपुर से आए बीएड के छात्र रितेश ने बताया कि सवा महीने से चक्कर काट रहा हूं। लेकिन अभी तक मेरी मार्कशीट नहीं पहुंची है।