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काला मोतिया का वार... आंखों को कर रहा बीमार

Tue, 07 Jan 2020 02:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 07 Jan 2020 02:09 AM IST
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Black cataract attack ... sick to the eye
काला मोतिया का वार... आंखों को कर रहा बीमार
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मेरठ। अगर आप उच्च रक्तचाप और मधुमेह के मरीज हैं और आंखों में परेशानी भी है तो सावधान हो जाएं और इसकी जांच कराएं। दरअसल, ऐसे लोगों को ग्लूकोमा (काला मोतिया) का खतरा ज्यादा रहता है। मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में ग्लूकोमा के 500-600 मरीज आ रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से जनवरी 2020 ग्लूकोमा जागरूकता माह मनाया जा रहा है।
काला मोतिया या मोतियाबिंद के दौरान मस्तिष्क को संकेत भेजने वाली आंख की ऑप्टिक तंत्रिकाएं बुरी तरह से प्रभावित होती हैं और उनकी कार्यक्षमता धीमी हो जाती है। इससे दूसरी आंख पर अधिक दबाव पड़ता है यह स्थिति काफी खतरनाक होती है। यह बहुत जरूरी है कि ग्लूकोमा की पहचान शुरुआती अवस्था में ही कर ली जाए, क्योंकि एक बार ग्लूकोमा पूरी तरह होने के बाद इसको ठीक करना काफी मुश्किल हो जाता है। ग्लूकोमा के शुरुआती लक्षणों को पहचानना काफी मुश्किल होता है, लेकिन जैसे जैसे यह रोग बढ़ता जाता है आंखों की ऊपरी सतह और देखने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। कई बार काला मोतिया गंभीर हो जाता है, जिस कारण अंधापन भी हो सकता है। समय रहते अगर ग्लूकोमा के लक्षणों को पहचान लिया जाए तो मरीज को नेत्रहीन होने से बचाया जा सकता है।
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मेडिकल के प्राचार्य और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि चश्मे का नंबर बार बार बदलना, अंधेरे में देर से नजर आना, रोशनी में अलग अलग रंग दिखना ग्लूकोमा के संकेत हो सकते हैं। देश में इस रोग के बारे में जागरूकता बहुत कम हैं, लेकिन सतर्कता बरतने पर इससे बचा जा सकता है। जो व्यक्ति स्टेरॉयड का किसी भी रूप में इस्तेमाल करता है तो उन्हें भी ग्लूकोमा का खतरा अधिक होता है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेश कुमार ने बताया कि अगर आपकी उम्र 40 साल से अधिक है, परिवार में किसी को काला मोतिया है, उच्च रक्तचाप या डायबिटीज है और आंख में कभी चोट लगी है तो काला मोतिया का खतरा हो सकता है।
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यह है काला मोतिया
यह आंखों की बीमारी है। इसे आम भाषा में काला मोतिया भी कहा जाता है। आंख गुब्बारे की तरह होती है। इसमें एक तरल पदार्थ भरा होता है। यह तरल पदार्थ आंखों के अंदर बनता रहता है। ग्लूकोमा में यह तरल पदार्थ आंखों से बाहर नहीं निकल पाता, जिससे आंखों पर दबाव बनने लगता है। आंखों पर पड़ा दबाव ऑप्टिक नर्व को डेमेज करने लगता और रोशनी कम होने लगती है।
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