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बायो वेस्ट निस्तारण में समझौते का सर्टिफिकेट

Wed, 16 Mar 2016 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Wed, 16 Mar 2016 01:53 AM IST
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bio medical waste
बायोवेस्ट। - फोटो : फाइल फोटो

बायो वेस्ट यानी मेडिकल कचरे के निस्तारण की जांच में ही गंभीर अनियमितताएं बरती जा रही हैं। बायो कचरा कैसे उठता है और इसे नष्ट करने की क्या व्यवस्था है, यह मेन प्वाइंट ही तीन सरकारी विभागों की जांच से गायब हो गया। जिस फर्म के पास इसके निस्तारण का कांट्रेक्ट है, उसके पास इसके लिए पर्याप्त संसाधन तक नहीं हैं। बस अस्पतालों को खानापूर्ति के नाम पर नोटिस जारी कर समझौते का सर्टिफिकेट थमा दिया गया है। 

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जिले में बायो वेस्ट को नष्ट करने का काम एक ही फर्म के हाथों में है, जिसका बायो वेस्ट प्लांट बाईपास पर स्थित है। हालांकि गाजियाबाद स्थित एक अन्य कांट्रेक्टर का प्लांट भी गाजियाबाद में ही हैै, जिसके पास कुछ अस्पताल का ठेका है। जबकि मेरठ में प्लांट संचालित करने वाली फर्म के पास 90 फीसदी निजी अस्पतालों के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब आधा दर्जन जिलों का भी काम है। ऐसी स्थिति में अस्पतालों से बायो वेस्ट रोजाना नहीं उठ रहा। इसमें कई अस्पतालों का तो दो से तीन सप्ताह बाद तक नंबर आता है। नियमों की बात करें तो बायो कचरा रोजाना उठना चाहिए। अगर यह कचरा कहीं पर ज्यादा होता है तो दिन में दो बार भी उठाने की व्यवस्था की जा सकती है।
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एक चिकित्सा अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया है कि जिस कंपनी से बायो मेडिकल कचरे को नष्ट करने का समझौता किया गया है, उसके बाद समुचित व्यवस्था ही नहीं है। ऐसे में कुछ अस्पतालों ने महज समझौते का सर्टिफिकेट ले लिया है, बाकी उनका बायो कचरा निगम की गाड़ियों में जा रहा है, क्योंकि कंपनी उतना कचरा एक दिन में उठा ही नहीं सकती है। यह कचरा खुले में फेंक कर प्रदूषण अलग से फैल रहा है। ऐसे में जांच के नाम पर कागजी खानापूर्ति हो रही है।
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जांच में हुआ बड़ा खेल
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण विभाग, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने रस्म अदायगी के लिए अस्पतालों और केमिस्ट को नोटिस जारी किए। जबकि बायो कचरा उठाने और उसे नष्ट करने की व्यवस्था की न तो जांच की और न इसका रिपोर्ट में उल्लेख किया। जबकि जांच इसी मेन प्वाइंट पर करनी थी। किसी ने भी यह जानने या पूछने की जहमत नहीं उठाई कि जिन अस्पतालों के पास कागजात पूरे हैं, उनके यहां से क्या बायो वेस्ट समय से उठ रहा है और उसका निस्तारण किस तरह से किया जा रहा है। यही नहीं, अस्पतालों के अंदर कचरे को डालने तक की व्यवस्था को नहीं देखा गया। आरोप लग रहे हैं कि मेरठ में संचालित कंपनी के पास उतने वाहन ही नहीं है कि वो प्रतिदिन कचरा उठा सके। क्योंकि बाकी जिलों से भी उसे कचरा लाना होता है। 


क्या था मामला 
निजी और सरकारी अस्पतालों से रोजाना बायो वेस्ट निस्तारण की समुचित व्यवस्था न होने पर आरटीआई कार्यकर्ता लोकेश खुराना ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। हाईकोर्ट ने इसकी सुनवाई पर जिला प्रशासन को फटकार लगाई थी। जिसके बाद डीएम पंकज यादव ने नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के कुछ अफसरों का वेतन रोकते हुए जांच रिपोर्ट मांग ली थी। इसके बाद तीन विभागों ने निजी अस्पतालों में ताबड़तोड़ छापे तो मारे लेकिन जांच के अहम बिंदु ही गायब कर दिए।

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