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बिना चिकित्सकों को दिखाए ही चले गए मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 29 May 2018 12:08 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मेडिकल कॉलेज में सोमवार को मरीजों की भरमार थी, मगर पर्चा काउंटर पर इस्तेमाल होने वाले चार में से दो कंप्यूटर तकनीकी खामी के कारण खराब थे। जिस कारण पर्चे बनने में दिक्कत आई और मरीज-तीमारदार परेशान रहे। काफी मरीज ऐसे भी रहे, जो पर्चा न बनने या बन जाने के बाद ओपीडी का समय खत्म होने के कारण बिना दिखाए ही वापस लौट गए।
मेडिकल कॉलेज के पर्चा काउंटर पर रखे चार कंप्यूटर में से दो खराब हो गए। सोमवार को ओपीडी में मरीजों व तीमारदारों की भीड़ हो गई। करीब तीन हजार मरीज आए। कंप्यूटर खराब के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, उन दो कंप्यूटर की लाइनों में खड़े मरीज भी दूसरी लाइनों में घुसने लगे, इससे मरीजों में आपस में कहासुनी भी हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई मरीज ऐसे थे, जिनका पर्चा एक बजे के बाद बना, जब वह ओपीडी में दिखाने गए तो लाइन लंबी थी, दो बजे तक नंबर आने की उम्मीद नहीं थी, लिहाजा वह बिना दिखाए ही चले गए। ऐसे मरीजों की संख्या भी काफी रही। इस संबंध में मेडिकल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी का कहना है कि कंप्यूटर खराब नहीं हुए थे, बल्कि इंटरनेट धीमा होने और तकनीक कमी के कारण धीमी गति से पर्चे बन रहे थे। सोमवार को भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए कई बार परेशानी हो जाती है, लेकिन सभी लोगों के पर्चे बनाए गए हैं।
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मेडिकल कॉलेज के पर्चा काउंटर पर रखे चार कंप्यूटर में से दो खराब हो गए। सोमवार को ओपीडी में मरीजों व तीमारदारों की भीड़ हो गई। करीब तीन हजार मरीज आए। कंप्यूटर खराब के चलते लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, उन दो कंप्यूटर की लाइनों में खड़े मरीज भी दूसरी लाइनों में घुसने लगे, इससे मरीजों में आपस में कहासुनी भी हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कई मरीज ऐसे थे, जिनका पर्चा एक बजे के बाद बना, जब वह ओपीडी में दिखाने गए तो लाइन लंबी थी, दो बजे तक नंबर आने की उम्मीद नहीं थी, लिहाजा वह बिना दिखाए ही चले गए। ऐसे मरीजों की संख्या भी काफी रही। इस संबंध में मेडिकल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. अजीत चौधरी का कहना है कि कंप्यूटर खराब नहीं हुए थे, बल्कि इंटरनेट धीमा होने और तकनीक कमी के कारण धीमी गति से पर्चे बन रहे थे। सोमवार को भीड़ ज्यादा होती है, इसलिए कई बार परेशानी हो जाती है, लेकिन सभी लोगों के पर्चे बनाए गए हैं।
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