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हाईकोर्ट ने अल्पसंख्यक कॉलेजों को दिया बड़ा झटका, कहा- बीएड में बिना एंट्रेंस किए गए दाखिलें...

Fri, 23 Dec 2016 11:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Fri, 23 Dec 2016 11:41 AM IST
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High Court gave a blow to minority colleges, said BEd admission without entrance
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

हाईकोर्ट ने अल्पसंख्यक कॉलेजों को बड़ा झटका दिया है। बीएड में बिना एंट्रेंस किए गए दाखिलों को अवैध माना है। क्षतिपूर्ति के आधार पर प्रत्येक छात्र को तीन लाख रुपये देने होंगे। अगर निर्धारित अवधि में पैसे नहीं दिए गए तो कोर्ट कॉलेजों की मान्यता निरस्त कर सकता है।

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हाईकोर्ट ने यह आदेश शैक्षिक सत्र 2014-15 के लिए दिया है। चौधरी चरण सिंह विवि से संबंधित 12 अल्पसंख्यक कॉलेजों की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अल्पसंख्यक कॉलेज अपने कोटे की सीटों को ही निर्धारित प्रावधानों के तहत सीधे प्रवेश से भर सकते हैं। अगर कॉलेज राज्य कोटे के तहत निर्धारित सीटों को अपने स्तर पर भरते हैं तो यह स्टेट पॉलिसी का खुला उल्लंघन है। गौरतलब है कि बीएड में अल्पसंख्यक कॉलेजों को 50 फीसदी सीटें अपने स्तर से भरने का अधिकार होता है, जबकि शेष 50 फीसदी सीटें राज्य सरकार की तरफ से की जाने वाली काउंसिलिंग के जरिये भरी जाती हैं। अब शैक्षिक सत्र 2014-15 में स्टेट कोटे की 20 से 25 सीटें हर कॉलेज में खाली रह गई थीं, जिन पर अल्पसंख्यक कॉलेजों ने सीधे प्रवेश ले लिया था। विवि ने ऐसे छात्रों की परीक्षा कराने से इनकार कर दिया था। कॉलेजों की तरफ से कोर्ट में यह कहते हुए याचिका दाखिल की गई कि जिस तरह से बीटीसी में खाली सीटों को भरने का अधिकार कॉलेजों को है तो वही अधिकार बीएड में भी होना चाहिये। कोर्ट ने कॉलेजों के इस तर्क को आधारहीन मानते हुए कड़ा फैसला लिया है। इस फैसले से प्रदेश भर के अल्पसंख्यक कॉलेज प्रभावित होंगे।
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तीन महीने में लौटाने होंगे 12 करोड़
कोर्ट के फैसले के बाद चौधरी चरण सिंह विवि से जुड़े अल्पसंख्यक कॉलेजों को करीब 12 करोड़ रुपये छात्रों को लौटाने होंगे। अनुमान है कि इन कॉलेजों ने 20 से 25 सीटों पर सीधे प्रवेश लिया। ऐसे छात्रों की संख्या करीब 400 बैठती है, जिन्हें तीन लाख रुपये प्रति छात्र के हिसाब से देने होंगे।

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