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कुत्तों से रहें सावधान, रैबीज मतलब मौत, पढ़िए ये जरूरी बातें

Thu, 28 Sep 2017 12:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ अरीश रिज़वी, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ अरीश रिज़वी, मेरठ Updated Thu, 28 Sep 2017 12:24 PM IST
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Be careful with dogs, rabies means death, such caution
कुत्तों से रहें सावधान - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

मेरठ में एक तरफ एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने को लेकर मारामारी है, तो दूसरी ओर कुत्तों का आतंक जारी है। मेरठ में करीब नौ माह में 48 हजार 439 लोगों को कुत्तों ने काटा है, यानि हर रोज करीब 180 से ज्यादा लोगों को। ये तो वह आंकड़ा है, जो स्वास्थ्य विभाग के फाइलों में दर्ज है और इन लोगों को एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगाए गए हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हकीकत इससे भी भयावह होगी, क्योंकि जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी पर हर रोज ऐसे लोगों की भी काफी तादाद रहती है, जिन्हें एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए बिना ही टरका दिया जाता है।

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यह हालात तब हैं, जबकि रैबीज बेहद खतरनाक बीमारी है। रैबीज हो जाने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है। यह रोग 19 वर्ष तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है। एक समय ऐसा भी था, जब कुत्ते के काटने पर 16 इंजेक्शन लगवाने पड़ते थे, वह भी पेट में। कहते भी हैं, रैबीज मतलब मौत या साइलेंट किलर। यही वजह है कि लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 28 सितंबर को वर्ल्ड रैबीज डे मनाया जाता है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के पास एंटी रैबीज वैक्सीन तक पर्याप्त मात्रा में नहीं है। वैक्सीन की किल्लत के कारण इंजेक्शन लगवाने आने वाले मरीजों को डॉक्टर काउंसिलिंग के दौरान कुत्तों का पीछा करने की सलाह तक देते हैं। पता करें कि वह मरा है या नहीं। देहात से आए मरीजों को जिला अस्पताल में इंजेक्शन लगाया जाता है। इंजेक्शन लगाने से पहले आधार कार्ड तक मांगा जाता है। इस पर अधिकारियों का तर्क होता है कि वैक्सीन की पूरे उत्तर प्रदेश में ही कमी है। इसलिए जरूरी लोगों को ही इंजेक्शन लगाए जाते हैं।
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वर्ष 2017 का हाल 
माह     कुत्तों द्वारा काटे गए लोगों की संख्या
जनवरी     8389
फरवरी     4096
मार्च      4459
अप्रैल     3259
मई       10892
जून     4776
जुलाई      4916
अगस्त     5482
सितंबर      2170

कुत्ते के काटने पर न लगाएं लाल मिर्च

Be careful with dogs, rabies means death, such caution
जिला अस्पताल मे सोते कुत्त्ते - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि कुत्तों के काटने पर खासकर गांवों में मरीज के पिसी हुई मिर्च लगा देते हैं, जो कि गलत है। इससे ठीक होने के बजाय घाव में इंफेक्शन होने का खतरा ज्यादा रहता है। कुत्ते या किसी जानवर के काटने पर 72 घंटे केअंदर एंटी रैबीज वैक्सीन का इंजेक्शन जरूर लगवाएं।

कैसा होता है रैबीज
कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रैबीज नामक बीमारी होने का खतरा रहता है। रैबीज रोग सीधे रोगी के मानसिक संतुलन को खराब कर देता है, जिससे रोगी का अपने दिमाग पर कोई संतुलन नहीं रहता है।

लक्षण
रैबीज रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। रोगी को रोशनी से डर लगता है। यहां तक कि वह भौंकना भी शुरू कर देता है। वह किसी भी बात को लेकर भड़क सकता है।

उपचार
रैबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवा 28 दिन के बाद लगाया जाता है।

यह बरतें सावधानी
कुत्ता कुछ खा पी रहा हो तो उसके पास न जाएं
अगर कुत्ते के पिल्ले उसके साथ हों तो उसके नजदीक न जाएं
कुत्ते आपस में लड़ रहे हों तो भी उनसे दूर रहें
सोते हुए कुत्ते को न छेड़ें
कुत्तों के एकदम नजदीक से भागदौड़ न करें
बच्चों को भी बताएं, कुत्तों के कान, पूंछ आदि न खींचें

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