फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   baghpat: warriors were buried in sinauli? a look at history

क्या सिनौली में तो नहीं दफनाए गए योद्धा? इतिहास पर डाले एक नजर

Thu, 07 Jun 2018 02:57 PM IST
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, बागपत
यूपी अमर उजाला ब्यूरो, बागपत Updated Thu, 07 Jun 2018 02:57 PM IST
विज्ञापन
baghpat: warriors were buried in sinauli? a look at history
उत्खनन में मिली शाही कब्रगाह

बागपत के सिनौली में उत्खनन के बाद इतिहासकारों के बीच नई बहस छिड़ गई है। क्या सिनौली की सभ्यता हड़प्पा से प्राचीन है और भारतीय इतिहास को एक नई संस्कृति और मानव सभ्यता मिलने वाली है। शहजाद राय शोध संस्थान के निर्देशक अमित राय जैन दावा करते हैं कि यह भी संभव है कि महाभारत युद्ध के योद्धाओं को सिनौली में दफनाया गया हो।

विज्ञापन


वह बताते हैं कि कुरू जनपद की राजधानी हस्तिनापुर गंगा नदी के किनारे थी और महाभारत का युद्ध स्थल यमुना नदी के किनारे पर। कुरूक्षेत्र के निकट ही करनाल-पानीपत और सोनीपत हैं। इसके नजदीक ही सिनौली का यह पूरा क्षेत्र है। पांडवों ने यमुना नदी के दोनों ओर प्राचीन वयाग्रप्रस्त (बागपत), वार्णावृत (बरनावा), स्वर्णप्रस्त (सोनीपत) एवं पर्णप्रस्त (पानीपत) गांव मांगे थे। कुरू जनपद में यही यमुना नदी के दोनों ओर का यही हिस्सा है कि जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण रहा होगा। महाभारत युद्ध में जिन हथियारों का इस्तेमाल कर युद्ध लड़ा गया।
विज्ञापन


पढ़ें : बागपत Pics: पांच हजार साल पुरानी कब्रगाह, एतिहासिक खोज में मिले 2 रथ और नर कंकाल

विज्ञापन
विज्ञापन

सिनौली में कब्रगाह तो कहां रहते थे लोग

baghpat: warriors were buried in sinauli? a look at history
उत्खनन में मिले ताबूत - फोटो : अमर उजाला

सिनौली फिर से चर्चा में है। दूसरी बार उत्खनन में फिर कब्र गाह मिला है। यह तो साबित हो गया कि यहां का इतिहास पांच हजार साल या इससे भी अधिक पुराना है, लेकिन अभी कई सवाल बाकी है। सिनौली में अगर कब्रगाह था तो आबादी कहां थी और यहां से कितनी दूर थी। किस तरह का शहर बसाया गया था या फिर कोई बड़ा ग्रामीण संस्कृति का गांव था। अनुमान तो यह है कि यमुना नदी नजदीक ही है। इसके आसपास ही कोई बड़ा गांव या शहर रहा होगा, गांव या शहर के लोगों के शवों को सिनौली और इसके आसपास के क्षेत्र में दफनाया जाता रहा है। 
 
वहीं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. केके शर्मा कहते हैं कि यहीं लंबी जांच और सर्वेक्षण का विषय है। पिछले पांच हजार साल में कितने गांव, कितने शहर उजड़े और फिर दोबारा बसाए गए। वर्तमान समय में भी आबादी से दूर ही श्मशान घाट या कब्रिस्तान को दूर बनाया जाता है, तब भी इसी तरह की परंपरा रही होगी।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed