जंग-ए-आजादी: पढ़िए स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के कुछ अनसुने किस्से, काफी रोचक था ये किस्सा भी
Freedom Fighters Stories: स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के कुछ रोचक अनसुने किस्से हैं, जिनके बारे में जानकर आप भी सलाम करेंगे। एक यह किस्सा भी काफी रोचक है।
विस्तार
Freedom Fighters Stories: आजादी के 75 वर्ष पूर्ण होने पर मनाए जा रहे अमृत महोत्सव में अगर दौराला के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की बात न हो तो यह महोत्सव अधूरा सा लगेगा। दौराला के चौधरी महाशय कनक सिंह ने महात्मा गांधी व जवाहर लाल नेहरू के साथ मिलकर जंग-ए-आजादी में अहम भूमिका निभाई थी। उनके पौत्र आज भी इस बात पर गर्व महसूस करते हैं।
चौधरी महाशय कनक सिंह का जन्म 1899 में हुआ था। 1921 में 22 साल की उम्र में ही उन्होंने कांग्रेस कमेटी के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई में हिस्सा लिया। सन् 1930, 1932, 1941, 1942 में वह जेल भी गए। उस दौरान उन पर दर्ज मुकदमे को लेकर 100 रुपये का जुर्माना भी अंग्रेजों ने लगाया। दौराला निवासी उनके पौत्र संजीव कुमार उर्फ योगी ने बताया कि दादा कनक सिंह जेल से बाहर होने पर भी अंग्रेजों से बचने के लिए इधर-उधर ही रहते थे। उनकी गिरफ्तारी को लेकर अंग्रेज घर पर आकर परेशान करते थे।
बताया कि उनके दादा को विजयी विश्व तिरंगा प्यारा गाना बहुत पसंद था। वह अक्सर उन्हें वहीं गाना गाकर सुनाते थे। आजादी के 25 वर्ष पूर्ण होने पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक त्यागी के हाथों उन्हें ताम्रपत्र भिजवाया था। हालांकि तब दादा का निधन हो चुका था।
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कनक सिंह से प्रेरित होकर कांग्रेस में शामिल हुए थे चौधरी चरण सिंह
1929 में चौधरी महाशय कनक सिंह को सरधना तहसील का सचिव मनोनीत किया गया। उस दौरान मेरठ व वर्तमान में गाजियाबाद जिले में कांग्रेस का सम्मेलन था। वहां पर पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह भी मौजूद थे। कनक सिंह के विचारों से प्रभावित होकर चौधरी चरण सिंह कांग्रेस में शामिल हुए थे।
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रोचक किस्सा
संजीव कुमार उर्फ योगी के अनुसार, उनके दादा बताया करते थे कि एक बार पंडित जवाहर लाल नेहरू व महात्मा गांधी ने मेरठ के काली पलटन मंदिर में सभा के आयोजन के लिए पत्र भेजा। इस सभा की जानकारी अंग्रेजों को लगी तो दौराला में सड़क किनारे स्थित एक बाग पर सभा रखी गई। काफी लोग सभा देखने पहुंचे। इसी बीच पता चला कि किसी ने अंग्रेजों को मुखबिरी कर दी है। इस पर वह आनन-फानन वहां से निकल गए और दौराला के काला महादेव मंदिर में नेहरू व महात्मा गांधी के साथ छोटी सी सभा की। इसके बाद सरधना, करनाल में भी सभा करते हुए शामली चले गए।