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Meerut News: अपर नगर आयुक्त और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा
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मेरठ। महानगर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन करने वाली बीवीजी कंपनी की समीक्षा और बिना जांच पड़ताल के भुगतान कराने वाले अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। कमिश्नर ह्नषिकेश भास्कर यशोद ने भी बैठक में अपर नगर आयुक्त को फटकार लगाई और कार्रवाई करने के निर्देश नगर आयुक्त को दिए। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांग लिया है।
शहर के 73 वार्डों का कूड़ा कलेक्शन करने के मामले में नगर निगम का बीवीजी कंपनी के साथ सात साल के लिए अनुबंध है। प्रतिमाह निगम कूड़ा कलेक्शन करने के एवज में कंपनी को 2.40 करोड़ रुपया देता है। कंपनी द्वारा किए गए कार्यों से संतुष्ट होने पर प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी और अपर नगर आयुक्त के हस्ताक्षर पर तीन साल से निगम भुगतान कर रहा था। पांच महीने पहले आईएएस सौरभ गंगवार ने नगर आयुक्त की कमान संभाली। मॉनीटरिंग की और नगर निगम की वित्तीय हानि का आरोप लगाकर कंपनी को अनुबंध निलंबित कर दिया। कंपनी को निरस्त करने के लिए विभागीय कमेटी गठित की और 15 दिन में रिपोर्ट मांग ली। जांच में निगम अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे।
नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने स्वास्थ्य विभाग प्रभारी अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह से स्पष्टीकरण मांगा और नोटिस जारी कर दिया। बुधवार को कमिश्नर ने निलंबित चल रही बीवीजी कंपनी और निगम अधिकारियों का तर्क सुना। कमिश्नर ने वित्तीय हानि पर नाराजगी जताते हुए कंपनी को 2-3 महीने का मौका देकर निगम के अनुसार कार्य न करने पर निरस्त करने की बात नगर आयुक्त से कही है। तीन साल बीवीजी कंपनी की मॉनीटरिंग करने और भुगतान कराने वाले निगम अधिकारियों को भी जमकर फटकार लगाई है। अपर नगर आयुक्त और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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कमिश्नर के निर्देश पर बीवीजी कंपनी को लेकर निर्णय लिया जाएगा। अपर नगर आयुक्त और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद कंपनी के कार्यों पर मंथन करेंगे। कंपनी द्वारा निगम को करीब एक करोड़ की वित्तीय हानि प्रतिमाह हो रही है, जो बर्दाश्त नहीं करेंगे।
सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त
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शहर के 73 वार्डों का कूड़ा कलेक्शन करने के मामले में नगर निगम का बीवीजी कंपनी के साथ सात साल के लिए अनुबंध है। प्रतिमाह निगम कूड़ा कलेक्शन करने के एवज में कंपनी को 2.40 करोड़ रुपया देता है। कंपनी द्वारा किए गए कार्यों से संतुष्ट होने पर प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी और अपर नगर आयुक्त के हस्ताक्षर पर तीन साल से निगम भुगतान कर रहा था। पांच महीने पहले आईएएस सौरभ गंगवार ने नगर आयुक्त की कमान संभाली। मॉनीटरिंग की और नगर निगम की वित्तीय हानि का आरोप लगाकर कंपनी को अनुबंध निलंबित कर दिया। कंपनी को निरस्त करने के लिए विभागीय कमेटी गठित की और 15 दिन में रिपोर्ट मांग ली। जांच में निगम अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे।
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नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने स्वास्थ्य विभाग प्रभारी अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह से स्पष्टीकरण मांगा और नोटिस जारी कर दिया। बुधवार को कमिश्नर ने निलंबित चल रही बीवीजी कंपनी और निगम अधिकारियों का तर्क सुना। कमिश्नर ने वित्तीय हानि पर नाराजगी जताते हुए कंपनी को 2-3 महीने का मौका देकर निगम के अनुसार कार्य न करने पर निरस्त करने की बात नगर आयुक्त से कही है। तीन साल बीवीजी कंपनी की मॉनीटरिंग करने और भुगतान कराने वाले निगम अधिकारियों को भी जमकर फटकार लगाई है। अपर नगर आयुक्त और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
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कमिश्नर के निर्देश पर बीवीजी कंपनी को लेकर निर्णय लिया जाएगा। अपर नगर आयुक्त और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट के बाद कंपनी के कार्यों पर मंथन करेंगे। कंपनी द्वारा निगम को करीब एक करोड़ की वित्तीय हानि प्रतिमाह हो रही है, जो बर्दाश्त नहीं करेंगे।
सौरभ गंगवार, नगर आयुक्त