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ISI को सेना की गोपनीय सूचनाएं लीक करने वाले 'फौजी' के खिलाफ होगी रिपोर्ट दर्ज

Tue, 18 Dec 2018 07:13 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Tue, 18 Dec 2018 07:13 PM IST
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Army man Kanchan used to leak secret information of Army to ISI, case will be registered in Meerut
आरोपी कंचन सिंह का फाइल फोटो

पाकिस्तान खुफिया एजेंसी आईएसआई को सेना की गोपनीय सूचनाएं लीक करने के आरोप में पकड़े गए फौजी कंचन सिंह के कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया चल रही है। कंचन सिंह फिलहाल चंडीगढ़ में है। कोर्ट मार्शल की कार्रवाई के दौरान उसे मेरठ लाया जाएगा। इसके बाद सेना की तरफ से थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में अभी दो से तीन महीने का समय लगेगा। 

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बागेश्वर (उत्तराखंड) के गढ़िया गांव का निवासी कंचन सिंह साल 2011 में हल्द्वानी से सेना में भर्ती हुआ था। दो साल की ट्रेनिंग के बाद उसे पहली तैनाती अरुणाचल प्रदेश में मिली थी। यहां पर तीन साल की तैनाती के बाद ढाई साल पहले वो मेरठ में आया था। यहां उसकी तैनाती सिग्नलमैन के तौर पर सिग्नल रेजीमेंट में हुई थी। सेना ने खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद आईएसआई को गोपनीय सूचनाएं लीक करने के आरोप में उसे पकड़ा था। कंचन सिंह से चंडीगढ़ वेस्टर्न कमांड, मेरठ यूनिट और सेना के विशेष दस्ते द्वारा कई दौर की पूछताछ की जा चुकी है। फिलहाल कंचन चंडीगढ़ में है। वहां पर कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया चल रही है। कोर्ट मार्शल की सुनवाई शुरू होते ही उसे मेरठ लाया जाएगा। जिसके बाद उस पर आरोप तय किए जाएंगे। कोर्ट मार्शल के बाद उसको मेरठ में सिविल पुलिस के हवाले किया जाएगा।

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हो चुकी है कोर्ट ऑफ इंक्वायरी
कोर्ट मार्शल से पहले कोर्ट ऑफ इंक्वायरी की जाती है। इसमें किसी तरह का अपराध या अनुशासनहीनता होने पर सबसे पहले कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश जारी होते हैं। जांच में आर्मीपर्सन पर लगाए गए आरोप प्रमाणित होने और गंभीर मामला होने पर जांच अधिकारी तुरंत ही सजा दे सकता है।

इसके अलावा बड़ा मामला होने पर केस समरी ऑफ एविडेंस को रिकमेंड कर दिया जाता है। दूसरा चरण समरी ऑफ एविडेंस है। इसमें प्रारंभिक जांच में दोषी सिद्ध होने पर सक्षम अधिकारी मामले और सुबूत जुटाने के लिए जांच करता है। इस आधार पर तुरंत सजा देने का भी प्रावधान है। इस दौरान सभी कानूनी दस्तावेज एकत्र किए जाते हैं। इनकी जांच के बाद अधिकारी तुरंत सजा या कोर्ट मार्शल के लिए संस्तुति करता है। कंचन की गिरफ्तारी ही मिलिट्री इंटेलीजेंस ने उस वक्त की थी जब सारे सुबूत जुटा लिए गए थे। ऐसे में उस पर लगाए गए आरोप पहले ही साबित हो चुके हैं।

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