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अपराजिता: हादसे ने पहुंचाया अस्पताल, कोमा से बाहर आईं तो सलामत नही थे हाथ-पांव, मगर नहीं मानी हार

Fri, 11 Jan 2019 02:29 PM IST
Priyesh Mishra वाहिद अली, अमर उजाला, मेरठ
वाहिद अली, अमर उजाला, मेरठ Published by: Priyesh Mishra Updated Fri, 11 Jan 2019 02:29 PM IST
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Aparajita: inspiring story of fatima khatoon from meerut setting  inspiration for differently abled
फातिमा खातून

‘ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा हैं, हम वो हैं जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं’ ये चंद पंक्तियां मेरठ की राधना निवासी 27 वर्षीय फातिमा खातून पर सटीक बैठती हैं। एक सड़क हादसे के बाद फातिमा ने महीनों जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया। छह महीने कोमा में रहीं। होश आया तो खुद को व्हीलचेयर पर पाया। इसके बाद भी उन्होंने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। फिर से जिंदगी की शुरूआत की और खेलों में नए मुकाम की तलाश की। पैरा खेलों में राष्ट्रीय स्तर के पदक जीतने के बाद अब वह एशियन चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हैं। पढ़ें उनकी ये प्रेरणादायक कहानी:-

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फातिमा खातून

बिजली विभाग में स्टेनोग्राफर के पद पर तैनात फातिमा ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह खेलों में अपना करियर बनाएंगी। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उसकी नौकरी लग गई थी। वह बेगमपुल स्थित बिजली विभाग की टेस्ट डिवीजन में नौकरी कर रही थीं। 2014 में राधना गांव से वह एक्टिवा से ऑफिस आ रही थीं। किठौर स्थित आरके कालेज के सामने कार चालक ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हुईं। दोनों हाथ और पैर टूट गए। शरीर में 194 टांके लगे। घर वाले फातिमा के जिंदा रहने की उम्मीद छोड़ चुके थे। करीब छह माह बाद फातिमा कोमा से बाहर आईं। हादसे के बाद उसके दोनों हाथों व पैरों में रॉड डाली गई। रॉड के साथ नौ जगह बोल्ट लगाए गए। इसके बाद वो व्हील चेयर पर आ गई। दुर्घटना के बाद फातिमा डेढ़ वर्ष तक बिस्तर पर रहीं। 

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फातिमा खातून

फातिमा ने खेलों से जोड़ा नाता
सड़क हादसे से पहले फातिमा का खेलों से कोई नाता नहीं था। हादसे के बाद वो ऑफिस से निकलते हुए कभी कभी व्हील चेयर से भामाशाह पार्क घूमने जाती थीं। 4 जुलाई 2017 को उनकी मुलाकात एथलेटिक कोच गौरव त्यागी से हुई। गौरव ने उन्हें पैरा खेलों में हाथ आजमाने को कहा। यहां से फातिमा ने खेलों में शुरूआत की। आज फातिमा आत्मविश्वास से लबरेज हैं और यही उनकी ताकत है। 

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फातिमा खातून

एक ही प्रतियोगिता में जीते तीन गोल्ड 
मार्च 2018 में लखनऊ में आयोजित पैरा स्टेट प्रतियोगिता में फातिमा ने एक साथ तीन गोल्ड मैडल जीते। उन्होंने डिस्कस थ्रो, जेवलिन थ्रो, शॉटपुट में पदक जीता। इसके बाद चंडीगढ़ में पैरा नेशनल में सिल्वर मेडल, दो जनवरी को फातिमा ने दिल्ली में आयोजित पैरा एशियन चैंपियनशिप के लिए ट्रायल दिया है। उन्हें उम्मीद है उनका चयन पैरा एशियन चैंपियनशिप के लिए हो जायेगा। 

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फातिमा खातून

फातिमा एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैरा खेलों में मेरठ का नाम रोशन करेगी। इतने संघर्ष के बाद उसने जिंदगी से हार नहीं मानी। खिलाड़ियों के जीवन में आत्मविश्वास सबसे अहम होता है। वो फातिमा के पास है। -गौरव त्यागी, एथलेटिक कोच 

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