अपराजिता 100 मिलयिन स्माइल्स अभियान: साहसी बनकर आगे बढ़ें बेटियां, दिए ये टिप्स
- कार्यक्रम में छात्रा व शिक्षिकाएं शपथपत्र भरकर अमर उजाला के इस अभियान से जुड़ीं
- शुभारंभ में प्रधानाचार्य कर्ण सिंह ने कहा कि अपराजिता कार्यक्रम बेटियों को पराजित न होने के साथ आगे बढ़ने की शिक्षा देता है
- कार्यक्रम का संचालन शिक्षक पुष्पेंद्र बालियान ने किया
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अमर उजाला फाउंडेशन की अनूठी पहल अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत दयानंद आर्यवीर इंटर कॉलेज में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में छात्राओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
छात्राओं ने कन्या भ्रूण हत्या व बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए पुरुष प्रधान समाज में बेटियों को समान अधिकार देने की बात कही। कार्यक्रम में छात्रा व शिक्षिकाएं शपथपत्र भरकर अमर उजाला के इस अभियान से जुड़ीं।
शुभारंभ में प्रधानाचार्य कर्ण सिंह ने कहा कि अपराजिता कार्यक्रम बेटियों को पराजित न होने के साथ आगे बढ़ने की शिक्षा देता है। इस दौरान उन्होंने छात्राओं को सरकार द्वारा चलाई जा रही हेल्पलाइन डायल-100, 181 व 1091 के अलावा अन्य नंबरों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
छात्रा रश्मि, प्रतिभा, वेदिका, ज्योति, दिशा, रचना, अंजलि आदि ने कन्या भ्रूण हत्या व बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ पर अपने उद्गार व्यक्त किए। छात्राओं ने कहा कि बेटियों को आगे बढ़ने के लिए साहसी होना होगा। अपनी सुरक्षा के साथ अपने कर्तव्य का पालन करते हुए समाज में अन्य बेटियों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम का संचालन शिक्षक पुष्पेंद्र बालियान ने किया।
इन्होंने कहा...
- समाज में पुरुष महिलाओं का सम्मान करें। स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था कि जिस देश में महिलाओं का सम्मान नहीं होता वह देश प्रगति नहीं कर सकता। बेटों की तरह बेटियों को भी समान अधिकार देकर उन्हें सशक्त बनाएं।
- प्रमोद देवी, शिक्षिका
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- कन्या भ्रूण हत्या समाज के लिए अभिशाप है। इसे रोकने के लिए सरकार ने जो कानून बनाए हैं उनका कड़ाई से पालन होना चाहिए। महिलाओं को इसके खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठानी चाहिए। - तनु, छात्रा।
- पुरुष प्रधान समाज में बेटियों को पराया धन कहकर उन्हें सुविधाओं से वंचित रखा जाता है। बेटियों को किताबी ज्ञान के साथ सामाजिक ज्ञान भी होना अति आवश्यक है। उन्हें परिवार का विश्वास हासिल कर सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। - नैना, छात्रा।
- दहेज प्रथा एक सामाजिक बुराई है। इस बुराई को खत्म करने के लिए सरकारों के अलावा सामाजिक संगठनों के मुहिम चलाने के बावजूद यह खत्म नहीं हो सकी। इस बुराई से निपटने के लिए बेटियों को आत्मनिर्भर बनना पड़ेगा। - स्वाति, छात्रा।
- बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से पीछे नहीं हैं, फिर भी उन्हें कमजोर समझा जाता है। बेटियों को सशक्त बनाने के लिए समाज में बेटे व बेटी का भेदभाव दूर करना होगा। यदि बेटियां सशक्त होंगी तो देश, समाज व परिवार का भविष्य उज्ज्वल होगा। - साक्षी, छात्रा।
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