दिव्या और शिवानी को मिलेगा अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक, एक प्रोफेसर तो एक बनना चाहती है आईएएस
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सीसीएसयू के दीक्षांत समारोह में इस बार स्वर्गीय मुरारी लाल माहेश्वरी स्वर्ण पदक दिव्या तेवतिया और शिवानी बर्मन को दिया जाएगा। 30 सितंबर को होने वाले दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति दोनों होनहारों को सम्मानित करेंगी।
बुलंदशहर के आईपी कॉलेज से दिव्या तेवतिया ने एमकॉम में टॉप किया है। चक्रानुक्रमानुसार कुलाधिपति रजत पदक एमकॉम विषय में दिए जाने के कारण वो भी दिव्या को ही मिलेगा। उन्होंने 2000 में से 1738 अंक प्राप्त किए हैं। हाईस्कूल में 88 फीसदी और 12वीं में 79 फीसदी अंक प्राप्त किए थे। दिव्या ने बीकॉम दिल्ली यूनिवर्सिटी से की।
मुजफ्फरनगर के रैदासपुरी निवासी शिवानी बर्मन ने मुजफ्फरनगर के श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज से मास्टर इन जर्नलिज्म परीक्षा 2019 में यूनिवर्सिटी में 83.10 फीसदी अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान हासिल किया। उन्होंने हाईस्कूल में 81 फीसदी, इंटरमीडिएट में 68.20, बीसीए में 72 फीसदी अंक हासिल किए हैं। कक्षा में अव्वल रहने की वजह से उनको स्कॉलरशिप मिलती रही। बता दें कि श्री मुरारी लाल माहेश्वरी अमर उजाला के संस्थापक रहे हैं और श्री अतुल माहेश्वरी नवोन्मेषक हैं। इन्हीं के नाम पर ये दोनों स्वर्ण पदक दिए जाते हैं।
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प्रोफेसर बनना चाहती हैं दिव्या
एमकॉम में पूरे यूनिवर्सिटी में टॉप करने वाली दिव्या तेवतिया प्रोफेसर बनना चाहती हैं। वह नेट भी क्वालीफाई कर चुकी हैं। अब पीएचडी करना चाहती हैं। शांति निकेतन कॉलोनी बुलंदशहर निवासी दिव्या के पिता अशोक कुमार तेवतिया सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अब गाजियाबाद में कार्यरत हैं। माता सुनीता ग्रहणी हैं। भाई अभिजीत तेवतिया गुजरात में सिविल इंजीनियर हैं। दिव्या बताती हैं कि साथियों के सहयोग से विवि टॉप किया है। उन्होंने हमेशा मोटीवेट किया। आईपी कॉलेज के कॉमर्स विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार अग्रवाल बताते हैं कि इससे पहले साल 2012, 2013, 2014, 2016 और 2018 और अब 2019 में उनके कॉलेज की छात्रा ने पूरे यूनिवर्सिटी में टॉप किया है। दीक्षांत को लेकर परिवार में भी खुशी का माहौल है।
शिवानी का लक्ष्य आईएएस बनना
श्री अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक के लिए नामित शिवानी बर्मन के लिए इस मुकाम तक पहुंचना आसान नहीं रहा। उन्होंने स्कॉलरशिप से पढ़ाई की। पिता मजदूरी करते हैं। पढ़ाई के साथ ही वह अध्यापन भी कर रही हैं। आर्थिक रूप से बेहद कमजोर परिवार से होने के बावजूद शिवानी हिम्मत के साथ आगे बढ़कर आईएएस बनकर देश की सेवा करना चाहती हैं। वह बताती हैं कि बचपन से ही उनकी अध्ययन और अध्यापन में विशेष रुचि रही है। उन्होंने अपना अधिकतर समय किताबों, अखबारों और खासकर देश-विदेश में हो रही घटनाओं की जानकारी करने में व्यतीत किया। शिवानी के पिता मजदूरी करने वाले हरीश कुमार और माता सविता देवी बेटी की इस उपलब्धि पर खुश हैं। शिवानी के छोटे भाई सत्यम और छोटी बहन सलोनी हैं। शिवानी बताती हैं सफलता में परिजनों के साथ चाचा प्रदीप बर्मन और शिक्षकों का बहुत योगदान है।
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