अमर उजाला खास रिपोर्ट: अब मेरठ में लगेगा बायोगैस प्लांट, गोबर और कूड़ा से बनेगा ईंधन
पेट्रोलिय मंत्रालय की ओर से आवागमन को सस्ता करने के लिए खास योजना तैयार की गई है, जिसमें कॉम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट से ईंधन बनाया जाएगा।
विस्तार
परिवहन सेवाओं के विस्तार के बाद अब मेरठ में कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट (सीबीजी) लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड कंपनी ने प्रशासन को पत्र लिखकर दस एकड़ जमीन मांगी है। इस पर गंभीरता दिखाते हुए कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने जल्द जमीन देने का आश्वासन कंपनी को दिया है।
पेट्रोलिय मंत्रालय की ओर से आवागमन को सस्ता करने के लिए योजना तैयार की गई है। जिसमें कॉम्प्रेस्ड बायोगैस प्लांट से ईंधन बनाया जाएगा। ये ईंधन पर्यावरण को साफ रखने के साथ-साथ खर्च भी कम करेगा। इसी के तहत मेरठ सहित दिल्ली-एनसीआर में बायोगैस, सोलर एनर्जी आदि के इस्तेमाल की योजना तैयार हो रही है। देश की नवरत्न कंपनी ओएनजीसी के सहायक कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी ने ये बीड़ा उठाया है। देशभर में 100 सीबीजी प्लांट लगाए जाएंगे। इसमें से 11 प्लांट का संचालन शुरू कर दिया गया है। इसमें मेरठ का नाम भी शामिल हो गया है। प्लांट लगने के बाद गोबर और कूड़ा की समस्या से परेशान शहरवासियों को राहत मिल सकती है।
ये है योजना
वर्ष-2018 में पेट्रोलियम मंत्रालय ने सस्ते ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिये सतत विकल्प योजना की शुरुआत की थी। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों को कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाने के लिए उद्यमियों से रुचि पत्र आमंत्रित किए गए। इन प्लांटों के लगने के बाद वर्ष 2023 तक डेढ़ करोड़ टन सीबीजी का उत्पादन होने का अनुमान है।
ये मिलेगा लाभ
इन प्लांट्स में तैयार होने वाली कंप्रेस्ड बायोगैस को सरकार खरीदेगी और उसका इस्तेमाल वाहनों के ईंधन के तौर पर कराएगी। इस योजना के जरिए सरकार सस्ता वाहन ईंधन जनता को देगी। वहीं, पर्यावरण को साफ करने के लिए कृषि अवषेशों का सही इस्तेमाल होगा और पशुमल तथा शहरी कचरे का इस्तेमाल भी होगा।
2500 डेयरियों से निकलता है 400 मीट्रिक टन गोबर
मेरठ में गोबर की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। इसके लिए लोकेश खुराना ने कई बार हाईकोर्ट में डेयरियों को शहर से बाहर करने के लिए जनहित याचिका दायर की। हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे के मुताबिक शहर में 27 हजार पशु हैं। 2500 डेयरियों से रोजाना 400 मीट्रिक टन गोबर निकलता है। हाईकोर्ट ने प्रशासन को डेयरियों को शहर से बाहर करने के आदेश दिए लेकिन जमीन की उपलब्धता न होने के कारण कुछ नहीं हो सका। अब पेट्रोनेट एलएनजी के इस प्रयास से शहर को बड़ी राहत मिल सकती है।
अभी तक यहां लगा है प्लांट
गुजरात के सूरत, सुरेंद्र नगर और सुंदलपुरा, महाराष्ट्र के सांगली, कोल्हापुर और पुणे, तमिलनाडु के नामक्कल, तेलंगाना के शादनगर, हरियाणा के रोहतक, आंध्र प्रदेश के कड़ापा, पंजाब के लुधियाना में प्लांट लगा है।