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खास रिपोर्ट: सात दशक में भी नहीं बदले अंग्रेजों के जमाने के कई कानून, इनके तहत दर्ज नहीं हुआ कोई मुकदमा

Mon, 24 Jan 2022 12:48 PM IST
कपिल kapil दिशांत त्रिवेदी, अमर उजाला, मेरठ
दिशांत त्रिवेदी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 24 Jan 2022 12:48 PM IST
सार

अंग्रेजों के जमाने के कई कानून सात दशक में भी नहीं बदले हैं। खास बात यह है कि सात दशक से थानों में इनके तहत कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। अमर उजाला की यह खास रिपोर्ट पढ़िए।

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Amar Ujala Special News: Many laws of British era did not change even in 70 years
फाइल फोटो।

विस्तार

देश 26 जनवरी को 73वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है, लेकिन अभी भी पुलिसिंग में अंग्रेजी जमाने के कई कानून वजूद में बने हुए हैं। हालांकि बीते सात दशक से इनके तहत मेरठ जिले के किसी भी थाने में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।

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अंग्रेजों के जमाने में डकैती अधिनियम बना था। जिस इलाके में डकैती की ज्यादा वारदात होती थीं उस क्षेत्र को डकैती प्रभावित क्षेत्र घोषित कर दिया जाता था। जिले में पुलिस ने इस अधिनियम के तहत किसी क्षेत्र को डकैती प्रभावित घोषित नहीं किया है। इसी तरह से ब्याज पर पैसा लेकर न लौटाने वालों पर ब्याज अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती थी। यह भी अभी वजूद में है पर इसमें कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। पहले बाजार में तांबे के सिक्के आते थे। कुछ लोग उन सिक्कों को गलाकर सोने में मिक्स कर दिया करते थे। जब ऐसा करते हुए आरोपी पकड़े जाते थे तो छोटे सिक्के अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती थी। ठीक इसी तरह अंग्रेजों ने विष अधिनियम बनाया था। जब कोई विष पी लेता या फिर किसी पिला देता था, तो उस स्थिति में विष अधिनियम लगा करता था। इस अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाती थी। यह एक्ट है पर अब पुलिस इसका प्रयोग नहीं करती है। 
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बदलाव जरूरी 
कई पुराने कानून हैं, जिनका इस्तेमाल नहीं होता है। नए थानेदार और पुलिसकर्मियों को इन पुराने कानूनों के बारे में जानकारी भी नहीं है। कई कानूनों में संशोधन भी हो चुका है। - सुधीर कुमार, रिटायर्ड डिप्टी एसपी

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कानून की किताबों तक सिमटे कई कानून 
कई पुराने कानून ऐसे थे, जिसके तहत सजा हुआ करती थी, लेकिन अब पुराने कानून का इस्तेमाल थानों में नहीं होता है। कई ऐसे कानून हैं, जो किताबों तक सीमित रह गए हैं। - रामकुमार शर्मा, वरिष्ठ अधिवक्ता

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