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अमर उजाला एक्सक्लूसिव: कोरोना काल में बढ़ी सैनिटाइजर की मांग, दौराला मिल में रोजाना पांच हजार लीटर का उत्पादन

Mon, 26 Apr 2021 05:32 PM IST
कपिल kapil अमर उजाला नेटवर्क, राजदीप जाखड़, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, राजदीप जाखड़, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 26 Apr 2021 05:32 PM IST
सार

कोरोना महामारी की बढ़ती रफ्तार के बीच सैनिटाइजर की मांग भी तेजी से बढ़ी है।

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Amar Ujala Exclusive Report: The demand for sanitizer has increased during the Corona period in Meerut
मेरठ में बढ़ी सैनिटाइजर की मांग। - फोटो : amar ujala

विस्तार

कोरोना महामारी की बढ़ती रफ्तार के बीच सैनिटाइजर की मांग भी तेजी से बढ़ी है। मेरठ जिले की दौराला शुगर मिल में सैनिटाइजर बोटलिंग प्लांट की क्षमता 5000 लीटर प्रतिदिन की है, लेकिन इस समय मांग दोगुना हो गई है। पहली लहर के धीमी होने के बाद मांग 500 लीटर तक पहुंच गई थी, लेकिन अब 20 गुना तक बढ़कर 10 हजार लीटर तक की हो गई है। यह मिल 500 एमएल से लेकर एक लीटर तक की बोतल बना रही है। इसके अलावा पांच लीटर से 35 लीटर की केन और 200 लीटर का बैरल दिया जा रहा है। मिल प्रबंधन का कहना है कि पूरी क्षमता से उत्पादन के बावजूद सैनिटाइजर की मांग पूरी नहीं की जा रही है। 

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पश्चिमी देशों के साथ ही गुजरात में सैनिटाइजर का अधिक उत्पादन होता है। यहां आइसो प्रोपीन अल्कोहल से सैनिटाइजर का उत्पादन होता रहा है। पिछले साल कोरोना संक्रमण को देखते हुए सैनिटाइजर की मांग में बड़ी वृद्धि हुई थी। इसे देखते हुए कई शुगर मिलों ने सैनिटाइजर का उत्पादन शुरू किया था। प्रदेश सरकार ने लाइसेंस भी दिए थे। जिले की दौराला और मवाना ने सैनिटाइजर बनाने में प्रयुक्त होने वाले एक्स्ट्रा न्यूट्रल अल्कोहल बनाने का लाइसेंस लिया था। वहीं, हापुड़ की ब्रजनाथपुर शुगर मिल ने भी आठ हजार लीटर सैनिटाइजर प्रतिदिन बनाने का लाइसेंस लिया था। लेकिन इन मिलों में केवल दौराला मिल ही उत्पादन कर रही है। मिल ने केंद्र और प्रदेश सरकार को भी दस हजार लीटर से ज्यादा सैनिटाइजर निशुल्क उपलब्ध कराया था। 
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डिनेचर्ड इथाइल अल्कोहल से बना रहे सैनिटाइजर
पहले सैनिटाइजर निर्माण में आइसोप्रोपिल अल्कोहल का इस्तेमाल किया जा रहा था, लेकिन कोरोना संक्रमण से देश में आइसोप्रोपिल अल्कोहल की कमी हो गई। इससे सैनिटाइजर उत्पादन भी प्रभावित हुआ। इस कमी को पूरा करने के लिए आइसोप्रोपिल अल्कोहल के विकल्प डिनेचर्ड इथाइल अल्कोहल का प्रयोग किया जा रहा है। यह एथनॉल बनने से पहले चरण का एल्कोहल है, जो गन्ना उत्पादन में नंबर वन यूपी की मिलों के पास काफी मात्रा में उपलब्ध है।  
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क्या कहते हैं अधिकारी 
मिल ने पिछले साल से सैनिटाइजर बनाना शुरू किया है। बीच में कोरोना की रफ्तार धीमी होने से मांग में कमी आ गई थी। लेकिन दूसरी लहर तेज होने के बाद से सैनिटाइजर की मांग में बीस गुना तक की वृद्धि हो गई है। इसके चलते प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने के बाद भी मांग पूरी नहीं हो पा रही है।  - संजीव खाटियान, महाप्रबंधक (केन) दौराला शुगर मिल

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