उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद में बेड और ऑक्सीजन के अभाव में तमाम मरीज इलाज के लिए तड़प रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग से लेकर प्रशासन तक इनकी कोई सुनने वाला नहीं। कोई मदद करना भी चाहे तो कर नहीं पा रहा है।
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अस्पताल में के बाहर तड़प रहे मरीज।
- फोटो : amar ujala
रविवार को दिल्ली के भजनपुरा से एंबुलेंस में मेडिकल कॉलेज पहुंचे उत्तम सिंह को भर्ती नहीं किया गया। बोले, जीटीबी में भर्ती करने से मना कर दिया। गाजियाबाद होते हुए मेरठ कई निजी अस्पतालों में गया। कहीं भी भर्ती नहीं किया। एक घंटे से मेडिकल कॉलेज में हूं। इमरजेंसी में भर्ती होने के लिए कोशिश कर रहा हूं लेकिन, बेड फुल बताकर उन्हें भर्ती नहीं किया गया। आखिरकार वह वहां से चले गए। कहां गए, नहीं पता। उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो वह स्विच ऑफ आया।
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रोते परिजन।
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वहीं, टीपी नगर के रहने वाले महेश कुमार सुबह नौ बजे मेडिकल कॉलेज पहुंचे। ऑक्सीजन वाला बेड नहीं है, यह कहकर इमरजेंसी में भर्ती करने से मना कर दिया। बेड खाली होने का इंतजार कर दोपहर 1:00 बजे वह भी चले गए। कसेरूखेड़ा के रहने वाले बृजपाल सिंह एंबुलेंस में बैठे रहे। इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया गया। इंतजार करते रहे कभी तो बेड खाली होगा। मेडिकल इमरजेंसी में एक महिला अपनों के स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना करती नजर आईं।
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मरीज को भर्ती कराने के लिए लाए परिजन।
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स्ट्रेचर नहीं मिला, कुर्सी पर ले जाना पड़ा, ऑक्सीजन भी खुद लेकर आए
एल ब्लॉक शास्त्री नगर की नैना को सांस लेने में दिक्कत थी। मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में ले गए। स्ट्रेचर नहीं मिला तो कुर्सी पर ले गए। बाहर से परिवार वाले खुद ही ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर आए और भर्ती कराया। इसी तरह बिजेंद्र कुमार को भी सांस लेने में दिक्कत थी, मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी में आए थे। स्ट्रेचर नहीं मिला तो इनके परिवार वाले गोद में उठाकर इमरजेंसी में ले गए।
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अपनी ऑक्सीजन के साथ भर्ती हो रहे मरीज।
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कोविड अस्पताल से महिला की ज्वैलरी 'गायब'
हापुड़ निवासी सुरेश बाला (63) को 20 अप्रैल को मेडिकल के कोविड अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी रात उनकी मृत्यु हो गई थी। अब उनकी ज्वेलरी नहीं मिल रही है। उनके भांजे मनीष ने बताया की वह कलेक्ट्रेट में बाबू हैं। अधिकारियों से फोन भी करा चुके हैं, मगर सुनवाई नहीं हो रही है। उनकी मौसी के कंगन, कुंडल, सैंपिल और लौंग थी। सीसीटीवी फुटेज में भी वह दिख रही है, लेकिन जब उनकी मृत्यु के बाद शव पैक किया गया तो वह नहीं थी। इसकी शिकायत प्रधानाचार्य से भी की जा चुकी है। प्रधानाचार्य का कहना है कि ज्वेलरी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।