यूपी: नहीं बढ़ रहे गन्ने के दाम, किसानों पर बढ़ रहा बोझ, खास रिपोर्ट में पढ़िए पूरी हकीकत
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पिछले दो पेराई सत्रों में गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं हुई है, जबकि गन्ने की फसल की लागत लगातार बढ़ रही है। गन्ना शोध संस्थान मुजफ्फरनगर के आंकलन के अनुसार पिछले साल के मुकाबले गन्ने की फसल की लागत में दस रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है। इस साल तो अभी तक गन्ना मूल्य घोषित ही नहीं हुआ है।
पेराई सत्र 2018-2019 और 2019-2020 में 325 रुपये प्रति क्विंटल अगेती और 315 रुपये सामान्य प्रजाति का गन्ना खरीदा गया। पूरे साल की मेहनत के बाद किसान को 18 से 28 रुपये प्रति क्विंटल ही बच रहे हैं।
गन्ना शोध केंद्र के निदेशक डॉ. वीरेश कुमार का कहना है कि शोध केंद्र पर गन्ने पर कुल खर्च 297 रुपये 58 पैसे प्रति क्विंटल आया है। पिछले वर्ष यह 287 रुपये प्रति क्विंटल था। इसमें कटाई, ढुलाई, बंधाई का खर्च भी शामिल है।
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भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट को सरकार ने आज तक लागू नहीं किया है। किसान को लागत पर एक क्विंटल पर कम से कम 125 रुपये का लाभ तो मिलना ही चाहिए। हम 450 रुपये क्विंटल गन्ना मूल्य की मांग कर रहे हैं।
15 बीघा गन्ना फसल पर खर्चा
मद खर्च
खेत तैयार 10080
बीज की तैयारी 34280
बुवाई 3358
पैड़ी प्रबंधन 17130
सिंचाई 25300
खाद 7937
दवाई 8000
बंधाई, कटाई-ढुलाई 128037
विविध व्यय 66222
(खर्च प्रति हेक्टेयर रुपये में, 800 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज के आधार पर प्रति क्विंटल लागत निकाली गई है।)
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