एक्सक्लूसिव: नगर पंचायत दौराला में वित्तीय अनियमितताओं का बोलबाला, सीएम तक पहुंची शिकायत, जांच में होगा बड़ा खुलासा
- नगर पंचायत दौराला में वित्तीय अनियमितताओं का बोलबाला
- मुख्यमंत्री तक पहुंची चहेतों को ठेके देने की शिकायत
- शिकायत के बाद भी महीनों तक नहीं हुई कार्रवाई
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भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की प्रदेश सरकार की कोशिशें अफसरों की फाइलों से आगे नहीं बढ़ती हैं। अगर वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें इन फाइलों से निकलती भी हैं तो इनकी जांच में जान-बूझकर देर की जाती है। दौराला नगर पंचायत के कई मामले ऐसे हैं, जिनकी शिकायत फरवरी में की गई थी।
नगर पंचायत दौराला में वित्तीय अनियमितताएं ही नहीं की गई हैं, अपने चहेतों को उपकृत करने के लिए नियमों को भी दरकिनार कर दिया गया है। पिछले साल यहां आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की आपूर्ति में एक ऐसी फर्म को टेंडर दे दिया गया, जो कई शर्तें पूरी नहीं करती थी। यही नहीं, फर्म को 50 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया। अब इसकी जांच शुरू हो गई है।
हालांकि शिकायतें यह भी हैं कि नगर पंचायत के आला अधिकारी अपने नजदीकी लोगों और रिश्तेदारों को ठेका देने में मनमानी करते हैं। नगर पंचायत के ज्यादातर काम उन तीन फर्मों को ही दिए जाते हैं, जो आपस में मिलीभगत कर टेंडर डालते हैं। अपात्रों को ठेके दिए जाने की बात इससे जाहिर है कि 10.85 लाख की हैसियत वाली फर्म को डेढ़ करोड़ और 14.03 लाख की हैसियत वाली फर्म को साढ़े पांच करोड़ से अधिक के काम दे दिए गए। इसमें एक फर्म की ओर से दिए गए दस्तावेजों में हेराफेरी की गई है। जांच होने पर बड़ा खुलासा हो सकता है।
विधायक ने मुख्यमंत्री को लिखा था पत्र
मेरठ दक्षिण के विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर ने 28 फरवरी 2020 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दौराला नगर पंचायत में की गई जा रही अनियमितताओं का ब्योरा देते हुए पत्र लिखा था। पत्र में मांग की गई थी कि शासन स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में जांच समिति का गठन किया जाए। मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी आरएन सिंह ने इसी पत्र के आधार पर नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव से पूरे मामले की जांच कराने का आग्रह किया था। इस पत्र पर कोई कार्यवाही ही नहीं हुई।
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- स्वच्छ भारत अभियान के तहत कूड़ा उठाने के लिए खरीदी गई एक एसी गाड़ी का उपयोग निजी कार्यों के लिए किया जा रहा है। इस गाड़ी के तेल, मेंटीनेंस और ड्राइवर के वेतन का भुगतान नगर पंचायत कर रही है।
- नगर पंचायत द्वारा पीर वाले तालाब के पास वार्ड 4 में 15 लाख रुपये खर्च कर पांच दुकानें बनवाई गईं। इन दुकानों की नीलामी मात्र 11-11 हजार रुपये में कर 500 रुपये प्रतिमाह किराए पर दे दिया गया।
- नगर पंचायत ने वाटर कूलर के नाम पर टेंडर निकाले जाने के बाद एक ही वाटर कूलर की धरोहर राशि जमा कराई गई। बावजूद इसके 20 वाटर कूलर का भुगतान कर दिया गया।
- राष्ट्रीय ध्वज लगाने के लिए खरीदे गए एक पिलर की बाजार में कीमत 3.50 लाख रुपये है, जबकि इसके लिए चहेते ठेकेदार को 22 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
शुरू कर दी है जांच
मंडलायुक्त कार्यालय के निर्देश पर शिकायतों की जांच शुरू कर दी है। जांच कब तक पूरी होगी, अभी नहीं बताया जा सकता है। - संदीप भागिया, एसडीएम, सदर
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