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यूपी: पीवीवीएनएल के बिलिंग साफ्टवेयर में बड़ा खेल, रोजाना लगाया जा रहा साढ़े चार लाख का चूना

Fri, 13 Nov 2020 01:00 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 13 Nov 2020 01:00 PM IST
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Amar Ujala Exclusive Report: Consumers are being cheated for fraud of four lakhs per day in PVVNL's billing software
बिजली का बिल

बिजली उपभोक्ताओं को देय तिथि से पहले बिल जमा करने पर मिलने वाली एक फीसदी छूट को पीवीवीएनएल का बिलिंग सॉफ्टवेयर ही गटक रहा है। उपभोक्ताओं को रोजाना करीब साढ़े चार लाख रुपये का चूना लगाया जा रहा है। 

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उप्र विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश की बिजली कंपनियों का राजस्व बढ़ाने के लिए देय तिथि से पहले बिल जमा करने पर बिल राशि पर एक फीसदी की छूट देने का प्रावधान कर रखा है। पीवीवीएनएल ने इसे बिलिंग सॉफ्टवेयर में अपडेट भी किया है। बिल में देय तिथि से पहले भुगतान करने पर एक फीसदी कम राशि अंकित की जाती है। बाद में भुगतान करने पर जो छूट बिल पर दिखाई जाती है, वह अगले बिल में एरियर के नाम पर जोड़कर भेज दी जाती है।
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औसतन एक हजार रुपये के बिल पर दस रुपये छूट मिलती है। पीवीवीएनएल 14 जिलों में रोजाना डेढ़ लाख उपभोक्ता बिल जमा करते हैं। इनमें से करीब 30 फीसदी यानि 45 हजार उपभोक्ताओं को छूट नहीं मिलने से 4.50 लाख रुपये निगम के खाते में जा रहे हैं। मेरठ में 40 हजार रुपये रोजाना डकारा जा रहा है। 
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केस-1
कंकरखेड़ा स्थित आदर्श कॉलोनी के वरुण हर माह अपना घरेलू बिल देय तिथि से पहले जमा कराते हैं। इसके बाद भी बिल में मिली छूट अगले माह के बिल में जोड़कर भेज दी जाती है। सितंबर में उन्हें 21 रुपये छूट मिली थी। अक्तूबर के बिल में वह जुड़कर आ गई। इसी तरह जून में मिली 23 रुपये की छूट जुलाई के बिल में जुड़कर आ गई।

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केस-2
थापर नगर निवासी हरीश चंद बत्रा के पास तीन किलोवाट का कॉमर्शियल कनेक्शन है। उनके बेटे भानू बत्रा ने बताया कि बिल की देय तिथि 12 नवंबर है। 1501 रुपये के बिल में छूट के बाद 1486 रुपये अंकित हैं। सात नवंबर को बिल जमा कराने पर कैशियर ने 1501 रुपये लिए। छूट की बाबत पूछने पर कहा कि सॉफ्टवेयर 1501 रुपये दिखा रहा है। 

केस-3
गंगानगर स्थित पार्क व्यू कॉलोनी निवासी अमित ने बताया कि वह छूट पाने के लिए कई महीनों से अपना बिल देय तिथि से पहले जमा कराते आ रहे हैं। बावजूद इसके बिल पर मिली छूट अगले बिल में एरियर के नाम से जोड़कर भेज दी जाती है। परेशान होकर अब वह भुगतान की आंतिम तिथि के हिसाब से ही अपना बिल जमा कराने लगे हैं। 

अधिकारी झाड़ रहे पल्ला
उपभोक्ताओं के हितों से खिलवाड़ के मामले को अधिकारी सॉफ्टवेयर की गलती बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खामी के चलते कभी-कभी ऐसा हो जाता है। कुछ ही उपभोक्ताओं के बिलों में शिकायत है। 

बिलिंग एजेंसी से बात करेंगे
विद्युत बिल में गलती के मामले पहले भी संज्ञान में आए थे। इसे ठीक करने के लिए कहा गया था। अगर अभी तक ठीक नहीं हुआ है तो बिलिंग एजेंसी से बात कर इस समस्या को दूर कराया जाएगा।  - अरविंद मल्लप्पा बंगारी, एमडी, पीवीवीएनएल, मेरठ

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