अमर उजाला पड़ताल: आंगनबाड़ी नदारद, तो कहीं नहीं मिले बच्चे, चल रहा है राष्ट्रीय पोषण माह
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मंगलवार को अमर उजाला ने जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की तो कहीं आंगनबाड़ी नदारद मिली तो कहीं बच्चे ही नहीं थे। राष्ट्रीय सुपोषण माह होने के बावजूद आंगनबाड़ी केंद्रों का ये हाल है।
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बच्चों को कुपोषण से बचाने और लोगों में जागरुकता लाने के लिए इन दिनों राष्ट्रीय सुपोषण माह चल रहा है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मंगलवार को अमर उजाला ने जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों की पड़ताल की तो कहीं आंगनबाड़ी नदारद मिली तो कहीं बच्चे ही नहीं दिखाई दिए। कुछ जगहों पर आंगनबाड़ी कार्य करती हुई मिली, लेकिन ज्यादातर जगहों पर लापरवाही नजर आई। इसी पर प्रस्तुत है रिपोर्ट...
दो सहायिका ही मिलीं मौजूद
नागल में दस आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इन पर नौ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं आठ सहायिका तैनात हैं। मंगलवार की सुबह दो सहायिका उपस्थित थीं, जबकि केंद्र पर कोई बच्चा नहीं मिला। वहीं, सीडीपीओ अनीता सोनकर कहना कि अगर कहीं लापरवाही बरती जा रही है तो उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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यहां भी मिली लापरवाही
बलियाखेड़ी ब्लॉक के गांव कोटा में छह सेंटर हैं। इन पर छह आंगनबाड़ी और छह सहायिका तैनात हैं। यहां भी सिर्फ दो आंगनबाड़ी उपस्थित मिलीं। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने जानकारी दी कि बाकी आंगनबाड़ी और सहायिका गांवों में बच्चों को बुलाने एवं अभिभावकों को जागरूक करने के लिए गई हैं, लेकिन क्षेत्र में कहीं भी आंगनबाड़ी नजर नर्हीं आइं।
यहां भी मिली अनियमितता
तीतरों क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर गुर्जर में आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति देखी तो यहां भी अनियमितता मिली। यहां तैनात चार आंगनबाड़ी और चार सहायिकाओं में एक आंगनबाड़ी व तीन सहायिका उपस्थित मिलीं। इन केंद्रों पर 50 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें से एक भी बच्चा केंद्र पर उपस्थित नहीं मिला, जबकि राष्ट्रीय सुपोषण माह चल रहा है।
सभी केंद्रों पर आंगनबाड़ी तैनात हैं। राष्ट्रीय सुपोषण माह के तहत घर-घर जाकर भी बच्चों के अभिभावकों को जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही पोषाहार भी वितरित किया जा रहा है। इसलिए हो सकता है कुछ जगहों पर आंगनबाड़ी व सहायिकाएं नहीं मिली हों। अगर कहीं लापरवाही बरती जा रही तो कार्रवाई की जाएगी। -आशा त्रिपाठी, जिला कार्यक्रम अधिकारी