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पश्चिमी यूपी में अखिलेश का बड़ा दांव: ये दो पूर्व मंत्री होंगे साइकिल पर सवार, भाजपा और रालोद के सामने चुनौती?
Sun, 01 Nov 2026 02:25 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
अमर उजाला नेटवर्क, सहारनपुर
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 01 Nov 2026 02:25 PM IST
सार
पश्चिमी यूपी की सियासत में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ा सियासी दांव खेला है। इस दांव से भाजपा और रालोद को झटका लगेगा। दो पूर्व मंत्री सपा का दामन थामने की तैयारी में है।
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Akhilesh Yadav
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी की सियासत में बड़ा उलटफेर होने वाला है। भाजपा और राष्ट्रीय लोकदल को झटका देते हुए दो पूर्व मंत्री समाजवादी पार्टी का दामन थामने की तैयारी में हैं।
पूर्व कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी और रालोद खेल प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी व पूर्व मंत्री चौधरी नीरपाल सिंह की सपा में वापसी कराकर अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी में बड़ा सियासी दांव खेलने जा रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में दोनों पूर्व मंत्रियों ने इसकी पुष्टि की है। दोनों का कहना है कि दिवाली के तुरंत बाद सपा का दामन थाम लेंगे।
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पूर्व कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी और रालोद खेल प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी व पूर्व मंत्री चौधरी नीरपाल सिंह की सपा में वापसी कराकर अखिलेश यादव पश्चिमी यूपी में बड़ा सियासी दांव खेलने जा रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में दोनों पूर्व मंत्रियों ने इसकी पुष्टि की है। दोनों का कहना है कि दिवाली के तुरंत बाद सपा का दामन थाम लेंगे।
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भाजपा और रालोद के सामने क्या होगी चुनौती
साहब सिंह सैनी के जाने के बाद भाजपा के लिए चुनौती हो सकती है। इस सामाजिक समीकरण को लेकर पार्टी को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ सकती है।
साहब सिंह सैनी के जाने के बाद भाजपा के लिए चुनौती हो सकती है। इस सामाजिक समीकरण को लेकर पार्टी को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ सकती है।
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वहीं रालोद के लिए नीरपाल सिंह का जाना संगठन के एक ऐसे चेहरे का जाना है, जिसे खेल प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय जिम्मेदारी दी गई थी। दूसरी तरफ सपा को इन दोनों नेताओं के आने से पश्चिमी यूपी में संगठनात्मक और सामाजिक विस्तार की उम्मीद है।
साहब सिंह सैनी : सपा से भाजपा और अब फिर सपा की ओर
पूर्व कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उनकी पहचान सैनी समाज के प्रभावशाली नेताओं में होती है। वह समाजवादी पार्टी के पुराने नेताओं में रहे हैं और मुलायम सिंह यादव के दौर से उनका राजनीतिक जुड़ाव रहा है। अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
पूर्व कैबिनेट मंत्री साहब सिंह सैनी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उनकी पहचान सैनी समाज के प्रभावशाली नेताओं में होती है। वह समाजवादी पार्टी के पुराने नेताओं में रहे हैं और मुलायम सिंह यादव के दौर से उनका राजनीतिक जुड़ाव रहा है। अखिलेश यादव सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
जुलाई 2023 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग, विशेषकर सैनी समाज के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के उद्देश्य से उन्हें अपने साथ जोड़ा था। अब करीब तीन साल बाद उनका फिर सपा में लौटने का फैसला भाजपा के लिए राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
साहब सिंह सैनी की वापसी का सबसे अहम पहलू नकुड़ विधानसभा सीट को माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें 2027 के चुनाव में नकुड़ से टिकट देने का भरोसा दिया गया है। फिलहाल नकुड़ से भाजपा के मुकेश चौधरी विधायक हैं। इस सीट पर सैनी मतदाताओं का मजबूत आधार है।
नीरपाल सिंह : खिलाड़ी से राजनीति तक का सफर
चौधरी नीरपाल सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद के सक्रिय चेहरों में गिने जाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने वाले नीरपाल सिंह सपा में राज्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी खेल जगत में सक्रियता और खिलाड़ियों के बीच संपर्क उनकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
चौधरी नीरपाल सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद के सक्रिय चेहरों में गिने जाते रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने वाले नीरपाल सिंह सपा में राज्यमंत्री रह चुके हैं। उनकी खेल जगत में सक्रियता और खिलाड़ियों के बीच संपर्क उनकी राजनीतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने अगस्त 2022 में उन्हें पार्टी के खेल प्रोत्साहन प्रकोष्ठ का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया था। इस जिम्मेदारी के तहत उन्होंने खिलाड़ियों, युवाओं और खेल सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया। फिलहाल वह खेल प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी हैं।
नीरपाल सिंह का रालोद छोड़कर सपा में जाना पार्टी के लिए संगठनात्मक नुकसान हो सकता है। खासकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद की युवा और खेल जगत से जुड़ी गतिविधियों को इससे झटका लग सकता है।