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शहरीकरण की दौड़ में कम होता गया कृषि क्षेत्र

Sat, 06 Mar 2021 11:08 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 06 Mar 2021 11:08 PM IST
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Agricultural sector gets reduced in the race for urbanization
वैसे तो तेजी से विकास होना हर शहर की बेहतरी के लिए जरूरी है, लेकिन विकास की इस दौड़ में आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाला कृषि भूमि कम हुई है। बीते 20 साल के आंकड़े पर गौर करें तो कृषि भूमि का क्षेत्रफल करीब तीन हजार हेक्टेयर कम हुआ है। इसमें विकास के नए प्रोजेक्ट, कालोनियों की बढ़ती संख्या आदि वजह हैं। वर्तमान में जिले में कृषि भूमि की बात करें तो, 2.75 लाख हेक्टेयर है, जो 20 साल पूर्व करीब 2.78 लाख हेक्टेयर थी।
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सहारनपुर जिला कृषि प्रधान क्षेत्र है। यहां पर गन्ना, गेहूं, धान और उसके बाद बड़े पैमाने पर बागवानी होती है। गंगा यमुना के बीच की यह भूमि बेहद उपजाऊ है तो शिवालिक की तलहटी में बसा होने के कारण बंजर क्षेत्र भी काफी है। बात शहरीकरण की करें तो सहारनपुर शहर का आकार चारों दिशाओं में बढ़ा है। एक तरफ बेहट रोड पर साई धाम तक कालोनियां कट गई तो दिल्ली रोड पर चुन्हैटी फाटक तक कालोनियां विकसित हो रही हैं। इसी तरह मल्हीपुर रोड, नवादा रोड, गलीरा रोड, अंबाला रोड, चिलकाना रोड, नागल रोड पर शहर के बाहर दो से तीन किलोमीटरतक आबादी वाला क्षेत्र हो गया है। इन इलाकों में कभी कृषि भूमि होती थी। हालांकि काफी भूमि ऐसी भी है जो कृषि भूमि की श्रेणी में थी मगर बंजर अथवा अन्य कमियों के कारण उस पर खेती नहीं होती थी।
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यह रहे बड़े प्रोजेक्ट
सहारनपुर - मुजफ्फरनगर स्टेट हाइवे का निर्माण हुआ। दिल्ली - सहारनपुर हाइवे का चौड़ीकरण, अंबाला - देहारदून राष्ट्रीय राजमार्ग पर सहारनपुर बाईपास का निर्माण हुआ।
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इन फसलों का कम हुआ रकबा
जौं का रकबा 84 हेक्टेयर से घटकर 22 हो गया, मसूर का रकबा 2350 से घटकर 850 हेक्टेयर रह गया। मूंगफली का रकबा भी 3800 से घटकर 2800 हो गया। गेहूं और गन्ने का रकबा लगातार बढ़ा है। सबसे ज्यादा गिरावट सरसों में आई। पांच साल पूर्व सरसों का उत्पादन 23 हजार क्विंटल से ज्यादा था, तब सरसों का रकबा करीब 2000 हेक्टेयर था, लेकिन अब सिर्फ 1283 हेक्टेयर है।
बढ़ती जनसंख्या के साथ बदले हालात
2001 की जनगणना में सहारनपुर जिले की जनसंख्या 28,96,863 थी, जबकि 2011 की जनगणना में 34,64,228 हो गई। वर्तमान में जिले की जनसंख्या करीब 39,79,403 पहुंच गई है। आबादी क्षेत्र बढ़ने के पीछे जनसंख्या में वृद्धि होना भी बड़ी वजह है।
और होती रही उत्पादन में बढ़ोत्तरी
- गन्ना रकबा बीते वर्ष 1.06 लाख हेक्टेयर था और कुल उत्पादन 829.05 लाख क्विंटल हुआ था।
- गेहूं रकबा बीते वर्ष 111829 हेक्टेयर था और कुल उत्पादन 435238 मीट्रिक टन हुआ था। जबकि पांच साल पूर्व 397782 मीट्रिक टन था।
- धान का कुल रकबा करीब 60725 हेक्टेयर था, जिसमें कुल उत्पादन 168529 मीट्रिक टन हुआ, जबकि पांच साल पूर्व धान का उत्पादन करीब 13.75 मीट्रिक टन था।
रासायनिक खादों का बढ़ता प्रयोग
वर्तमान में जिले में 75 हजार मीट्रिक टन यूरिया प्रतिवर्ष खपत है। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो पांच साल में करीब 7 प्रतिशत यूरिया की खपत बढ़ी है। इस लिहाज से करीब 69 हजार मीट्रिक टन यूरिया की खपत पांच साल पूर्व थी।
3000 हेक्टेयर कृषि भूमि सहारनपुर में कम हुई है पिछले बीस सालों में
2303 हेक्टेयर कृषि भूमि शामली में कम हुई है पिछले दस सालों में
250 हेक्टेयर कृषि भूमि कम हुई है बागपत में पिछले 25 सालों में
10927 हेक्टेयर जमीन कम हुई है बिजनौर में पिछले 10 सालों में
खेती नहीं, नौकरी और व्यापार अब किसान के बेटों की प्राथमिकता
एक्सक्लूसिव
बंटवारे में बंट रही पुश्तैनी जमीन, घटती जोत में नहीं होता दिख रहा गुजारा, भविष्य के प्रति चिंतित किसानों की नई पीढ़ी
अजीत चौधरी
बिजनौर। पुश्तैनी जमीन बंट रही है, ऊपर से सड़क, उद्योग और आवासीय कालोनियों में कृषि योग्य जमीन जा रही है। कृषि भूमि लगातार कम हो रही है। गन्ना विभाग के आंकड़ों की बात करें तो
जिले में गन्ने की बुवाई करने वाले 74 प्रतिशत किसान ऐसे हैं, जिनके पास एक हेक्टेयर यानी साढ़े 12 बीघा से कम जमीन है। जमीन का रकबा कम होने का सीधा असर खेती और परिवार की आमदनी पर पड़ रहा है और किसानों के परिवार नई पीढ़ी भी खेती छोड़कर दूसरे कामों को अपना रही हैं। नौकरी और व्यापार की ओर उनका रुझान बढ़ा है।
वर्ष 2010 में जिले के किसानों के पास खेती की तीन लाख 90 हजार हेक्टेअर जमीन थी, इसमें से साल 2020 में करीब 10927 हेक्टेयर जमीन कम हो गई है और सड़क, आबादी और उद्योगों का इतना ही क्षेत्रफल बढ़ा है। गन्ना विभाग के आंकड़े बताते हैं कि करीब पिछले दस साल में गन्ने की खेती का क्षेत्रफल करीब 33 हजार हेक्टेयर कम हुआ है। साल 2019-2020 में बिजनौर में गन्ने की औसत पैदावार 864 प्रति क्विंटल थी, 325 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से एक हेक्टेयर की आय करीब दो लाख 80 हजार रुपये प्रति वर्ष बैठती है। इस आय में छह सदस्यों के औसत परिवार का को पूरे साल खर्च चलाना मुश्किल है। इसमें भी फसल पर आने वाली लागत अलग रही। इस स्थिति से जिले के 74 प्रतिशत परिवार जूझ रहे हैं। आने वाले समय में जमीन और भी कम होगी।
बिजनौर किसान जमीन छोटे किसान मंझोले किसान बड़े किसान
कुल 373068 302660 277496 66231 31356
(छोटे किसानों के पास एक हेक्टेयर से कम, मंझोले किसानों के पास दो और बड़े किसानों पर दो हेक्टेअर से अधिक जमीन है। आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।)
फसलों की पैदावार के आंकड़ों पर एक नजर
साल गन्ना धान गेहूं सरसों
2011-12 576.88 23.97 32.94 11.40
2019-20 864.92 26.55 34.99 12.54
केस एक
ब्लॉक नजीबाबाद निवासी रघुवीर सिंह के पास 100 बीघा जमीन थी। उनके चार बेटे और दस पौत्र हुए। अब उनके पौत्रों के पास कम जमीन है और वे प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं।

केस दो
ब्लॉक किरतपुर निवासी किसान भगवत सिंह के पास 150 बीघा जमीन थी। उनके पांच बेटे और दस पौत्र हुए। उनके दो बेटे सरकारी और चार बेटे प्राइवेट नौकरी कर रहे हैं।
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