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अफसरों की खींचतान में अटकी अमृत योजना
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 May 2018 01:33 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
260 करोड़ रुपये की सीवर परियोजना अफसरों की खींचतान में अटकी पड़ी है। जल निगम ने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को पर्याप्त सीवर न मिलने के लिए एमडीए को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं लोहियानगर में चल रहे भूमि विवाद के कारण पाइपलाइन अधूरा पड़ी है। एमडीए के सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों का सीवर मेन लाइन में नही दिया जाना भी इसके अटके होने का बड़ा कारण है। जल निगम अधिकारियों की माने तो कई बार जिला प्रशासन, एमडीए व नगर निगम को पत्र लिखे गए हैं। लेकिन लोहियानगर में भूमि विवाद का निस्तारण नहीं हो सका है।
अमर उजाला माय सिटी ने बुधवार के अंक में जेएनएनयूआरएम और अमृत योजना के तहत सीवर योजना की स्थिति को उजागर किया। सरकार की 260 करोड़ की योजना को किस तरह पलीता लगाया जा रहा है, यह स्थिति साफ की तो जल निगम के अधिकारियों ने सीवर योजना की दुर्दशा के लिए दूसरे विभागों को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया। जल निगम के परियोजना प्रबंधक मुन्ना सिंह की मानें तो जिला प्रशासन, एमडीए और नगर निगम का उन्हें सहयोग नहीं मिल रहा है।
परियोजना प्रबंधक का कहना है कि लोहियानगर में एमडीए और किसानों के बीच चल रहे विवाद के कारण सीवर लाइन का काम रुका पड़ा है। इसको लेकर डीएम को भी 2016 से पत्र लिखे जा रहे हैं। एमडीए उपाध्यक्ष और नगरायुक्त से लगातार पत्र और मौखिक वार्ता की जा रही है। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। परियोजना प्रबंधक का कहना है कि एसटीपी को पर्याप्त सीवर देने के लिए एमडीए के एसटीपी से निकलने वाले सीवर को मुख्य पाइप में डालने की प्रक्रिया चल रही है।
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90 किमी पाइप लाइन में एक बूंद सीवर नहीं
लोहियानगर में रुकी पाइप लाइन के कारण 90 किलोमीटर पाइप लाइन प्रभावित है। इतना ही नहीं चैम्बर बनाए जाने का कार्य भी नहीं हो पा रहा है। तीन साल पहले पाइप लाइन भूमिगत कर दी गई थी। जिसमें अभी तक एक बूंद सीवर नहीं पहुंच पाया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीवर योजना धरातल पर कैसे उतरेगी।
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अमर उजाला माय सिटी ने बुधवार के अंक में जेएनएनयूआरएम और अमृत योजना के तहत सीवर योजना की स्थिति को उजागर किया। सरकार की 260 करोड़ की योजना को किस तरह पलीता लगाया जा रहा है, यह स्थिति साफ की तो जल निगम के अधिकारियों ने सीवर योजना की दुर्दशा के लिए दूसरे विभागों को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया। जल निगम के परियोजना प्रबंधक मुन्ना सिंह की मानें तो जिला प्रशासन, एमडीए और नगर निगम का उन्हें सहयोग नहीं मिल रहा है।
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परियोजना प्रबंधक का कहना है कि लोहियानगर में एमडीए और किसानों के बीच चल रहे विवाद के कारण सीवर लाइन का काम रुका पड़ा है। इसको लेकर डीएम को भी 2016 से पत्र लिखे जा रहे हैं। एमडीए उपाध्यक्ष और नगरायुक्त से लगातार पत्र और मौखिक वार्ता की जा रही है। लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। परियोजना प्रबंधक का कहना है कि एसटीपी को पर्याप्त सीवर देने के लिए एमडीए के एसटीपी से निकलने वाले सीवर को मुख्य पाइप में डालने की प्रक्रिया चल रही है।
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90 किमी पाइप लाइन में एक बूंद सीवर नहीं
लोहियानगर में रुकी पाइप लाइन के कारण 90 किलोमीटर पाइप लाइन प्रभावित है। इतना ही नहीं चैम्बर बनाए जाने का कार्य भी नहीं हो पा रहा है। तीन साल पहले पाइप लाइन भूमिगत कर दी गई थी। जिसमें अभी तक एक बूंद सीवर नहीं पहुंच पाया है। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीवर योजना धरातल पर कैसे उतरेगी।