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स्मार्ट स्कूलों के लिए ढूंढे से नहीं मिल रहे अंग्रेजी शिक्षक
Updated Thu, 05 Apr 2018 02:56 AM IST
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मेरठ। जिले में परिषदीय स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने की प्रक्रिया फिलहाल पटरी से उतर गई है। शासन ने सरकारी स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने के आदेश तो दे दिए। लेकिन इनके लिए अंग्रेजी के शिक्षक ढूंढे से नहीं मिल रहे हैं। यहां तक कि कम आवेदन होने से इंटरव्यू तक रद्द कर दिया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलों में ब्लॉक वाइज सात-सात मॉडल स्कूल बनाने की घोषणा की थी। सरकार के निर्देशों के बाद जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में 65 स्कूलों का चयन किया। जबकि जिले के कुल 14 ब्लॉकों में 98 स्कूलों को मॉडल बनाने का लक्ष्य है। लेकिन इन 65 स्कूलों को मॉडल बनाने की प्रक्रिया को दो अप्रैल तक धरातल पर उतारा नहीं जा सका है। विभाग ने विज्ञापन देकर मॉडल स्कूलों के लिए प्रधानाध्यापक सहित 300 से ज्यादा अध्यापकों के आवेदन मांगे थे। लेकिन कुल 120 अध्यापकों के ही आवेदन प्राप्त हुए। 28 मार्च को साक्षात्कार का विज्ञापन भी जारी किया गया था। लेकिन कम आवेदन के चलते विभाग ने साक्षात्कार रद्द कर दिया। जबकि नया सत्र दो अप्रैल से शुरू हो गया है। ऐसे में नये सत्र से पहले मॉडल स्कूलों का संचालित होना विभाग के लिए सिरदर्द बन गया है।
शिक्षक नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
जिले में अधिकांश शिक्षक अपनी सुविधाओं के मुताबिक स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। ऐसे में वे दूसरे स्कूल के लिए आवेदन देंगे तो उनको स्कूल बदलना होगा। जबकि जिन स्कूलों का चयन मॉडल स्कूलों के लिए हुआ है। उसके लिए विभाग ने अलग योग्यता मांगी है। अगर वो मॉडल स्कूलों के योग्य नहीं हैं तो उन शिक्षकों को स्कूल छोड़ना होगा। ऐसे में प्राथमिक स्कूलों में तैनात सहायक अध्यापक मॉडल स्कूलों में तैनाती के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
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हल निकाला जा रहा है
बीएसए सतेंद्र कुमार ढाका का कहना है कि विभागीय कार्यों में व्यस्तता के कारण फिलहाल साक्षात्कार टाल दिए गए हैं। जल्द ही अगली तिथि तय कर विज्ञापन जारी किया जाएगा। मॉडल स्कूलों में शिक्षकों का चयन थोड़ा मुश्किल हो रहा है। लेकिन इसका हल निकाला जा रहा है।
खास बातें
- सरकार ने जिले के 14 ब्लॉकों में दिया 98 सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने का लक्ष्य
- दो अप्रैल से शुरू होने थे मॉडल स्कूल, 98 में 65 का हुआ चयन लेकिन पटरी से उतरी व्यवस्था
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिलों में ब्लॉक वाइज सात-सात मॉडल स्कूल बनाने की घोषणा की थी। सरकार के निर्देशों के बाद जिला बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में 65 स्कूलों का चयन किया। जबकि जिले के कुल 14 ब्लॉकों में 98 स्कूलों को मॉडल बनाने का लक्ष्य है। लेकिन इन 65 स्कूलों को मॉडल बनाने की प्रक्रिया को दो अप्रैल तक धरातल पर उतारा नहीं जा सका है। विभाग ने विज्ञापन देकर मॉडल स्कूलों के लिए प्रधानाध्यापक सहित 300 से ज्यादा अध्यापकों के आवेदन मांगे थे। लेकिन कुल 120 अध्यापकों के ही आवेदन प्राप्त हुए। 28 मार्च को साक्षात्कार का विज्ञापन भी जारी किया गया था। लेकिन कम आवेदन के चलते विभाग ने साक्षात्कार रद्द कर दिया। जबकि नया सत्र दो अप्रैल से शुरू हो गया है। ऐसे में नये सत्र से पहले मॉडल स्कूलों का संचालित होना विभाग के लिए सिरदर्द बन गया है।
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शिक्षक नहीं दिखा रहे दिलचस्पी
जिले में अधिकांश शिक्षक अपनी सुविधाओं के मुताबिक स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। ऐसे में वे दूसरे स्कूल के लिए आवेदन देंगे तो उनको स्कूल बदलना होगा। जबकि जिन स्कूलों का चयन मॉडल स्कूलों के लिए हुआ है। उसके लिए विभाग ने अलग योग्यता मांगी है। अगर वो मॉडल स्कूलों के योग्य नहीं हैं तो उन शिक्षकों को स्कूल छोड़ना होगा। ऐसे में प्राथमिक स्कूलों में तैनात सहायक अध्यापक मॉडल स्कूलों में तैनाती के लिए दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
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हल निकाला जा रहा है
बीएसए सतेंद्र कुमार ढाका का कहना है कि विभागीय कार्यों में व्यस्तता के कारण फिलहाल साक्षात्कार टाल दिए गए हैं। जल्द ही अगली तिथि तय कर विज्ञापन जारी किया जाएगा। मॉडल स्कूलों में शिक्षकों का चयन थोड़ा मुश्किल हो रहा है। लेकिन इसका हल निकाला जा रहा है।
खास बातें
- सरकार ने जिले के 14 ब्लॉकों में दिया 98 सरकारी स्कूलों को स्मार्ट स्कूल बनाने का लक्ष्य
- दो अप्रैल से शुरू होने थे मॉडल स्कूल, 98 में 65 का हुआ चयन लेकिन पटरी से उतरी व्यवस्था