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रालोद का ले डूबेगी नेताओं की गुटबाजी
Updated Fri, 17 Nov 2017 02:18 AM IST
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मेरठ। पहली बार सिंबल पर निकाय चुनाव में उतरे रालोद को उसके नेताआें की आपसी गुटबाजी ही झटका दे रही है। मेयर प्रत्याशी से लेकर पार्षद प्रत्याशियों के जनसंपर्क और सभाओं में कई दर्जन नेताओं में से केवल आधा दर्जन नेता ही सक्रिय नजर आ रहे हैं। कई नेता तो ऐसे भी है जो जिलाध्यक्ष के यहां होने वाली पार्टी मीटिंग में भी उपस्थिति दर्ज कराने से बच रहे हैं।
निकाय चुनाव में पार्टी ने मेयर पद के लिए बसपा से पार्टी में शामिल हुए डॉ. सुशील कुमार की पत्नी संगीता रानी को प्रत्याशी बनाया और पार्षद पद के लिए 32 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा। फिलहाल चुनाव प्रचार चरम पर पहुंचता जा रहा है। प्रत्याशियों ने जनसंपर्क के साथ सभा के माध्यम से पूरी ताकत लगा रखी है। लेकिन शहर में रह रहे पार्टी के प्रदेश और जिला स्तर के करीब चार दर्जन से अधिक नेताओं की फौज में से जिलाध्यक्ष राहुल देव के अलावा आधा दर्जन नेता ही सक्रियता के साथ जुटे नजर आ रहे हैं। प्रत्याशियों का कहना है कि वे इसकी शिकायत हाईकमान से करेंगेे। इस बारे में निकाय चुनाव कमेटी के मंडल अध्यक्ष एनुद्दीन शाह और पूर्व संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान ने बताया कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। सभी नेता मिलकर चुनाव लड़ा रहे हैं। फर्क इतना है कि कुछ ज्यादा सक्रिय है तो कुछ कम। जो बिल्कुल ही नजर नहीं आ रहे है तो उनकी रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी। चुनाव में पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी।
खास बात
रालोद में नेताओं का नहीं मिल रहा प्रत्याशियों को समर्थन
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निकाय चुनाव में पार्टी ने मेयर पद के लिए बसपा से पार्टी में शामिल हुए डॉ. सुशील कुमार की पत्नी संगीता रानी को प्रत्याशी बनाया और पार्षद पद के लिए 32 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा। फिलहाल चुनाव प्रचार चरम पर पहुंचता जा रहा है। प्रत्याशियों ने जनसंपर्क के साथ सभा के माध्यम से पूरी ताकत लगा रखी है। लेकिन शहर में रह रहे पार्टी के प्रदेश और जिला स्तर के करीब चार दर्जन से अधिक नेताओं की फौज में से जिलाध्यक्ष राहुल देव के अलावा आधा दर्जन नेता ही सक्रियता के साथ जुटे नजर आ रहे हैं। प्रत्याशियों का कहना है कि वे इसकी शिकायत हाईकमान से करेंगेे। इस बारे में निकाय चुनाव कमेटी के मंडल अध्यक्ष एनुद्दीन शाह और पूर्व संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान ने बताया कि पार्टी में कोई गुटबाजी नहीं है। सभी नेता मिलकर चुनाव लड़ा रहे हैं। फर्क इतना है कि कुछ ज्यादा सक्रिय है तो कुछ कम। जो बिल्कुल ही नजर नहीं आ रहे है तो उनकी रिपोर्ट हाईकमान को भेजी जाएगी। चुनाव में पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी।
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खास बात
रालोद में नेताओं का नहीं मिल रहा प्रत्याशियों को समर्थन