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कागजों में स्थापित हुआ बाढ़ नियंत्रण केंद्र
Updated Fri, 07 Jul 2017 02:43 AM IST
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कागजों में स्थापित हुआ बाढ़ नियंत्रण केंद्र
खादर क्षेत्र में बाढ़ राहत चौकियाें का है बुरा हाल, बारिश से बढ़ता जा रहा गंगा का जल स्तर
मेरठ।
खादर क्षेत्र में बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने बाढ़ राहत केंद्र स्थापित करने के साथ ही कंट्रोल रूम स्थापित करने की बात कही है। लेकिन बाढ़ राहत केंद्र सिर्फ कागजों में संचालित होते नजर आ रहे हैं। फिलहाल बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन गंगा में पहाड़ों पर हो रही बारिश से लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं बाढ़ राहत चौकियों की हालत बेहद खराब है।
मवाना तहसील अंतर्गत खादर क्षेत्र में हर साल बाढ़ आती है। जिसमें जहां फसलों का सबसे ज्यादा नुकसान होता है, तो गंगा किनारे के गांवों में पानी भर जाने के कारण यहां रहने वाले ग्रामीणों को बाढ़ राहत चौकी पर विस्थापित किया जाता है। खादर क्षेत्र में प्रशासन द्वारा 17 बाढ़ चौकियां स्थापित की हुई हैं। जिनके पास हैंडपंप के साथ ही आने जाने का रास्ता और पशुओं के बांधे जाने का स्थान भी होता है। ये बाढ़ चौकियां जुलाई और अगस्त दो माह प्रभावी होती हैं।
जिला प्रशासन ने बाढ़ राहत केंद्र स्थापित करते हुए मुख्यालय पर जहां कंट्रोल रूम स्थापित किया है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की चौकियों पर भी व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही है। लेकिन अमर उजाला ने जब खादर क्षेत्र में दौरा किया तो कोई भी बाढ़ राहत चौकी दुरुस्त नहीं थी। इन बाढ़ राहत चौकियाें पर जो व्यवस्था की गई है, उसके अनुसार एक चौकी पर 8 से 12 तक शौचालय और दो-दो हैंडपंप लगे होते हैं। लेकिन एक भी चौकी ऐसी नही है, जिस पर इस समय एक भी शौचालय सही स्थिति में हो या हैंडपंप काम कर रहा हो।
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बाढ़ राहत चौकियों पर व्यवस्था दुरुस्त करने का जिम्मा ग्राम पंचायतों का है। संबंधित ग्राम पंचायतों को इस दिशा में सख्ती से निर्देश दिए जाएंगे। चार-पांच दिन में व्यवस्थाएं दुरुस्त करा दी जाएंगी। आलोक शर्मा, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी
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खादर क्षेत्र में बाढ़ राहत चौकियाें का है बुरा हाल, बारिश से बढ़ता जा रहा गंगा का जल स्तर
मेरठ।
खादर क्षेत्र में बाढ़ से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने बाढ़ राहत केंद्र स्थापित करने के साथ ही कंट्रोल रूम स्थापित करने की बात कही है। लेकिन बाढ़ राहत केंद्र सिर्फ कागजों में संचालित होते नजर आ रहे हैं। फिलहाल बाढ़ की स्थिति नहीं है, लेकिन गंगा में पहाड़ों पर हो रही बारिश से लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। वहीं बाढ़ राहत चौकियों की हालत बेहद खराब है।
मवाना तहसील अंतर्गत खादर क्षेत्र में हर साल बाढ़ आती है। जिसमें जहां फसलों का सबसे ज्यादा नुकसान होता है, तो गंगा किनारे के गांवों में पानी भर जाने के कारण यहां रहने वाले ग्रामीणों को बाढ़ राहत चौकी पर विस्थापित किया जाता है। खादर क्षेत्र में प्रशासन द्वारा 17 बाढ़ चौकियां स्थापित की हुई हैं। जिनके पास हैंडपंप के साथ ही आने जाने का रास्ता और पशुओं के बांधे जाने का स्थान भी होता है। ये बाढ़ चौकियां जुलाई और अगस्त दो माह प्रभावी होती हैं।
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जिला प्रशासन ने बाढ़ राहत केंद्र स्थापित करते हुए मुख्यालय पर जहां कंट्रोल रूम स्थापित किया है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की चौकियों पर भी व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही है। लेकिन अमर उजाला ने जब खादर क्षेत्र में दौरा किया तो कोई भी बाढ़ राहत चौकी दुरुस्त नहीं थी। इन बाढ़ राहत चौकियाें पर जो व्यवस्था की गई है, उसके अनुसार एक चौकी पर 8 से 12 तक शौचालय और दो-दो हैंडपंप लगे होते हैं। लेकिन एक भी चौकी ऐसी नही है, जिस पर इस समय एक भी शौचालय सही स्थिति में हो या हैंडपंप काम कर रहा हो।
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बाढ़ राहत चौकियों पर व्यवस्था दुरुस्त करने का जिम्मा ग्राम पंचायतों का है। संबंधित ग्राम पंचायतों को इस दिशा में सख्ती से निर्देश दिए जाएंगे। चार-पांच दिन में व्यवस्थाएं दुरुस्त करा दी जाएंगी। आलोक शर्मा, प्रभारी जिला पंचायत राज अधिकारी