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सिंडिकेट के शिकंजे में सिस्टम, सवाल शत्रु संपति के
Updated Mon, 16 Jul 2018 02:25 AM IST
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मेरठ। मेनका सिनेमा हॉल प्रकरण में नया खेल सामने आया है। सिंडिकेट का सिस्टम पर ऐसा शिकंजा रहा कि 14 हजार वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया और शोर मेनका सिनेमा हॉल की महज 1135 वर्ग मीटर जमीन का मच रहा है। एक और पहलू यह भी चर्चा में है कि करीब 47 साल पहले एक सभासद ने मेनका सिनेमा हॉल खुद का बताकर कराची में सिनेमा हॉल ले लिया था। अगर यह सही है तो इस हिसाब से मेनका सिनेमा हॉल शत्रु संपत्ति हुई।
मेनका सिनेमा को तोड़े जाने के बाद सबका फोकस मेनका सिनेमा पर है। लेकिन अगर भूमाफियाओं का पूरा खेल देखें तो खसरा नंबर 542 जिसका पूरा क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा है, मेनका हॉल तो उसके बहुत छोटे से हिस्से में मात्र 1135 वर्ग मीटर में बना है। बाकी दूसरी जमीन पर भी पूरी तरह कब्जा है। लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। जबकि मेनका को तोड़ने में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन्हीं लोगों के सिंडिकेट का इस पूरे खसरे नंबर पर कब्जा है।
क्यों खंगाल रहे रिकॉर्ड
इस मामले में भूमाफिया जहां अपना खेल करते रहे, तो निगम और प्रशासन ने इस पूरे मामले को फुटबाल बना दिया। दोनों ही विभाग एक-दूसरे को पत्र लिखते रहे। लेकिन कार्रवाई के नाम पर किसी ने कुछ नहीं किया। बड़ी बात ये रही कि इस पूरे प्रकरण में एक तरफ जहां नगर निगम जांच करता रहा तो दूसरी तरफ उसके ही विभाग के कर्मचारी खेल कराते रहे। पुरानी सारी जांच में खसरा नंबर 542 सरकारी होना सामने आया। लेकिन प्रशासन अभी भी नजूल को लेकर रिकार्ड खंगाल रहा है।
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नगर निगम करता रहा खेल
खसरा नंबर 542 के एक हिस्से पर पॉवर हाउस था, जो निगम अभिलेखों में दर्ज था। लेकिन नगर निगम के संपत्ति विभाग ने इस जमीन को पॉवर हाउस से हटाकर फिरोज इलाही के नाम चढ़ा दिया और भवन कर भी चढ़ा दिया। साथ ही फर्जी शपथ पत्र पर नगर निगम द्वारा ही मेनका सिनेमा को तोड़ने की भी स्वीकृति दे दी गयी।
करते रहे सिर्फ पत्राचार
जिलाधिकारी कार्यालय में वर्ष 2011 में शिकायत हुई, जिस पर नगरायुक्त को जांच के लिए कहा गया। इस जांच रिपोर्ट में तत्कालीन नगरायुक्त ने स्पष्ट पत्र लिखा कि जमीन नजूल की है और भूमाफिया कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने पत्र में कार्रवाई के लिए भी लिखा। लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद जिला प्रशासन की तरफ से फिर रिपोर्ट मांगी गयी। लेकिन उस पर निगम द्वारा रिपोर्ट नहीं भेजी गयी। यह मामला फिर 2014 में उठा तो प्रशासन ने फिर से नगरायुक्त को फटकार लगायी। उस समय के डीएम ने नगरायुक्त को भेजे पत्र में कहा कि सिविल डिविजन न्यायालय में दायर दो वाद जो नासिर इलाही और फिरोज इलाही ने दायर किए थे, वह 13 अक्तूबर 2011 को खारिज हो चुके हैं। लेकिन अभी तक अवैध निर्माण के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही नहीं हुई जो गलत है। इस पर नगरायुक्त ने जवाब दिया कि इस मामले में नगर निगम ने नोटिस जारी किया था। लेकिन मामले में कोर्ट का स्थगन आदेश है।
इधर खेल, उधर चुप्पी
इस जमीन पर कब्जा कराने में निगम ने कोई कसर नही छोड़ी। लेकिन प्रशासन भी सिर्फ पत्राचार तक सिमटा रहा। जबकि पूरा रिकॉर्ड उसके सामने था। जिससे प्रशासन पर कहीं न कहीं दबाव साफ नजर आता है।
ताहिर हुसैन ने कराची में बताया मेनका हॉल अपना
मेनका सिनेमा को लेकर नयी बात चर्चा में है। सन 1970 में जब मेरठ नगर पालिका हुआ करता था तो एक सभासद ताहिर हुसैन थे। पेशे से अधिवक्ता ताहिर हुसैन नादिर अली शाह की संपत्ति के मामले देखा करते थे। 1971 में भारत-पाक युद्ध हुआ तो ताहिर हुसैन के साथ बहुत से लोग पाकिस्तान जाकर बस गए थे। इसमें नियम लागू हुआ कि जो संपत्ति वह भारत में छोड़कर आए हैं, ऐसी ही संपत्ति उन्हें पाकिस्तान में मिलेगी। ताहिर हुसैन ने पाकिस्तान में साक्ष्य देते हुए बताया कि भारत के मेरठ शहर में उनका मेनका सिनेमा था, जिसे वह छोड़कर आए हैं। इस पर पाक सरकार ने उन्हें कराची में सिनेमा हॉल दे दिया। अब जिस तरह ताहिर ने पाक में मेनका को अपना बताकर वहां संपत्ति हासिल की है, उसके अनुसार मेनका सिनेमा हॉल शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आता है।
खास बातें:
मेनका सिनेमा हॉल
14 हजार वर्ग मीटर जमीन से ज्यादा का है ये फर्जीवाड़ा
1135 वर्ग मीटर जमीन पर ही बना है मेनका सिनेमा हॉल
47 साल पहले एक शख्स ने मेनका हॉल अपना बताकर कराची में ले लिया था सिनेमा हॉल
- भूमाफिया ने मेनका सिनेमा को आगे कर पूरी जमीन हड़पी, किसी को नहीं सुध
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मेनका सिनेमा को तोड़े जाने के बाद सबका फोकस मेनका सिनेमा पर है। लेकिन अगर भूमाफियाओं का पूरा खेल देखें तो खसरा नंबर 542 जिसका पूरा क्षेत्रफल 14 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा है, मेनका हॉल तो उसके बहुत छोटे से हिस्से में मात्र 1135 वर्ग मीटर में बना है। बाकी दूसरी जमीन पर भी पूरी तरह कब्जा है। लेकिन इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है। जबकि मेनका को तोड़ने में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उन्हीं लोगों के सिंडिकेट का इस पूरे खसरे नंबर पर कब्जा है।
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क्यों खंगाल रहे रिकॉर्ड
इस मामले में भूमाफिया जहां अपना खेल करते रहे, तो निगम और प्रशासन ने इस पूरे मामले को फुटबाल बना दिया। दोनों ही विभाग एक-दूसरे को पत्र लिखते रहे। लेकिन कार्रवाई के नाम पर किसी ने कुछ नहीं किया। बड़ी बात ये रही कि इस पूरे प्रकरण में एक तरफ जहां नगर निगम जांच करता रहा तो दूसरी तरफ उसके ही विभाग के कर्मचारी खेल कराते रहे। पुरानी सारी जांच में खसरा नंबर 542 सरकारी होना सामने आया। लेकिन प्रशासन अभी भी नजूल को लेकर रिकार्ड खंगाल रहा है।
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नगर निगम करता रहा खेल
खसरा नंबर 542 के एक हिस्से पर पॉवर हाउस था, जो निगम अभिलेखों में दर्ज था। लेकिन नगर निगम के संपत्ति विभाग ने इस जमीन को पॉवर हाउस से हटाकर फिरोज इलाही के नाम चढ़ा दिया और भवन कर भी चढ़ा दिया। साथ ही फर्जी शपथ पत्र पर नगर निगम द्वारा ही मेनका सिनेमा को तोड़ने की भी स्वीकृति दे दी गयी।
करते रहे सिर्फ पत्राचार
जिलाधिकारी कार्यालय में वर्ष 2011 में शिकायत हुई, जिस पर नगरायुक्त को जांच के लिए कहा गया। इस जांच रिपोर्ट में तत्कालीन नगरायुक्त ने स्पष्ट पत्र लिखा कि जमीन नजूल की है और भूमाफिया कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने पत्र में कार्रवाई के लिए भी लिखा। लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद जिला प्रशासन की तरफ से फिर रिपोर्ट मांगी गयी। लेकिन उस पर निगम द्वारा रिपोर्ट नहीं भेजी गयी। यह मामला फिर 2014 में उठा तो प्रशासन ने फिर से नगरायुक्त को फटकार लगायी। उस समय के डीएम ने नगरायुक्त को भेजे पत्र में कहा कि सिविल डिविजन न्यायालय में दायर दो वाद जो नासिर इलाही और फिरोज इलाही ने दायर किए थे, वह 13 अक्तूबर 2011 को खारिज हो चुके हैं। लेकिन अभी तक अवैध निर्माण के विरुद्ध वैधानिक कार्यवाही नहीं हुई जो गलत है। इस पर नगरायुक्त ने जवाब दिया कि इस मामले में नगर निगम ने नोटिस जारी किया था। लेकिन मामले में कोर्ट का स्थगन आदेश है।
इधर खेल, उधर चुप्पी
इस जमीन पर कब्जा कराने में निगम ने कोई कसर नही छोड़ी। लेकिन प्रशासन भी सिर्फ पत्राचार तक सिमटा रहा। जबकि पूरा रिकॉर्ड उसके सामने था। जिससे प्रशासन पर कहीं न कहीं दबाव साफ नजर आता है।
ताहिर हुसैन ने कराची में बताया मेनका हॉल अपना
मेनका सिनेमा को लेकर नयी बात चर्चा में है। सन 1970 में जब मेरठ नगर पालिका हुआ करता था तो एक सभासद ताहिर हुसैन थे। पेशे से अधिवक्ता ताहिर हुसैन नादिर अली शाह की संपत्ति के मामले देखा करते थे। 1971 में भारत-पाक युद्ध हुआ तो ताहिर हुसैन के साथ बहुत से लोग पाकिस्तान जाकर बस गए थे। इसमें नियम लागू हुआ कि जो संपत्ति वह भारत में छोड़कर आए हैं, ऐसी ही संपत्ति उन्हें पाकिस्तान में मिलेगी। ताहिर हुसैन ने पाकिस्तान में साक्ष्य देते हुए बताया कि भारत के मेरठ शहर में उनका मेनका सिनेमा था, जिसे वह छोड़कर आए हैं। इस पर पाक सरकार ने उन्हें कराची में सिनेमा हॉल दे दिया। अब जिस तरह ताहिर ने पाक में मेनका को अपना बताकर वहां संपत्ति हासिल की है, उसके अनुसार मेनका सिनेमा हॉल शत्रु संपत्ति की श्रेणी में आता है।
खास बातें:
मेनका सिनेमा हॉल
14 हजार वर्ग मीटर जमीन से ज्यादा का है ये फर्जीवाड़ा
1135 वर्ग मीटर जमीन पर ही बना है मेनका सिनेमा हॉल
47 साल पहले एक शख्स ने मेनका हॉल अपना बताकर कराची में ले लिया था सिनेमा हॉल
- भूमाफिया ने मेनका सिनेमा को आगे कर पूरी जमीन हड़पी, किसी को नहीं सुध