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कॉलेजों में लगेगी नैतिक शिक्षा की कक्षा
Updated Sat, 25 Nov 2017 02:18 AM IST
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मेरठ। कॉलेेजों में छात्रों को पढ़ाई के साथ नैतिकता का पाठ पढ़ाया जाएगा। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता ने शुक्रवार को जिले के सभी डिग्री कॉलेजों के प्राचार्यों को पत्र लिखकर आदेश जारी किया। छात्रों को कक्षाओं की भांति प्रार्थना सभा में एकत्र कर नैतिक मूल्यों का ज्ञान दिया जाए।
उन्होंने चिंता जताई कि अपराध में युवाओं की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति का बड़ा कारण नैतिक मूल्यों का हनन होना है। इसलिए छात्रों को उच्चशिक्षा के साथ नैतिकता का पाठ पढ़ाना आवश्यक है। कॉलेजों में छात्रों को प्रतिदिन 10 मिनट के लिए एक स्थान पर एकत्र किया जाए। जहां उन्हें नैतिक मूल्यों की जानकारी दी जाए। इससे छात्रों के नैतिक मूल्यों का विस्तार होगा। उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। साथ ही अनुशासित जीवन जीने की समझ बढ़ेगी। शिक्षकों के अलावा छात्र स्वयं नैतिकता पर विचार रखें। कॉलेजों की जिम्मेदारी केवल युवाओं को उच्च शिक्षा ग्रहण कर उपाधि देना नहीं, बल्कि युवाओं को एक समझदार नागरिक बनाना है। अगर प्रतिदिन एक स्थान पर एकत्र होकर नैतिक शिक्षा देना संभव नहीं है तो सप्ताह में कम से कम एक बार यह कार्य अवश्य किया जाए। इसमें छात्र नैतिक विचार प्रस्तुत करें। गीता, कुरान, बाइबिल, गुरुग्रंथ साहिब जैसे धार्मिक ग्रंथों को पढ़कर नैतिक व चारित्रिक गुण सीखें। संस्कृत भाषा के विकास के लिए संस्कृत का श्लोक भावार्थ सहित प्रस्तुत करने का प्रयास भी कॉलेजों में किया जाए।
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उन्होंने चिंता जताई कि अपराध में युवाओं की बढ़ती संख्या चिंता का विषय है। युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति का बड़ा कारण नैतिक मूल्यों का हनन होना है। इसलिए छात्रों को उच्चशिक्षा के साथ नैतिकता का पाठ पढ़ाना आवश्यक है। कॉलेजों में छात्रों को प्रतिदिन 10 मिनट के लिए एक स्थान पर एकत्र किया जाए। जहां उन्हें नैतिक मूल्यों की जानकारी दी जाए। इससे छात्रों के नैतिक मूल्यों का विस्तार होगा। उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। साथ ही अनुशासित जीवन जीने की समझ बढ़ेगी। शिक्षकों के अलावा छात्र स्वयं नैतिकता पर विचार रखें। कॉलेजों की जिम्मेदारी केवल युवाओं को उच्च शिक्षा ग्रहण कर उपाधि देना नहीं, बल्कि युवाओं को एक समझदार नागरिक बनाना है। अगर प्रतिदिन एक स्थान पर एकत्र होकर नैतिक शिक्षा देना संभव नहीं है तो सप्ताह में कम से कम एक बार यह कार्य अवश्य किया जाए। इसमें छात्र नैतिक विचार प्रस्तुत करें। गीता, कुरान, बाइबिल, गुरुग्रंथ साहिब जैसे धार्मिक ग्रंथों को पढ़कर नैतिक व चारित्रिक गुण सीखें। संस्कृत भाषा के विकास के लिए संस्कृत का श्लोक भावार्थ सहित प्रस्तुत करने का प्रयास भी कॉलेजों में किया जाए।
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