{"_id":"69e27363d0fe62f1140cddac","slug":"70-of-streetlights-are-out-questioning-the-corporations-working-style-meerut-news-c-14-1-mrt1004-1163818-2026-04-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: 70 फीसदी स्ट्रीट लाइटें बंद, निगम की कार्यशैली पर सवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: 70 फीसदी स्ट्रीट लाइटें बंद, निगम की कार्यशैली पर सवाल
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। महानगर में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति से रात का अंधेरा बढ़ गया है। मुख्य मार्गों, बाजारों व कॉलोनियों में सन्नाटा लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। इससे निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित करता है। शहर में कुल 96 हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। इनमें से लगभग 70 फीसदी लाइटें बंद हैं। यह स्थिति बजट के भारी घालमेल को दर्शाती है। स्थानीय पार्षदों और लोगों में इस अव्यवस्था को लेकर आक्रोश है। शास्त्रीनगर, पल्लवपुरम और गंगानगर जैसे इलाकों में रात के समय अंधेरा छाया रहता है। पार्षद अजय चंद्रा, संदीप रेवड़ी और कुलदीप वाल्मीकि का कहना है कि शहर में लाइटें ठीक नहीं होतीं। हंगामा करने या सिफारिश के बाद ही निगम लाइटें ठीक कराता है।
-- -- -- -- -- -- -- --
विज्ञापन
मेरठ। महानगर में स्ट्रीट लाइटों की स्थिति से रात का अंधेरा बढ़ गया है। मुख्य मार्गों, बाजारों व कॉलोनियों में सन्नाटा लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। इससे निगम की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
नगर निगम स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष 5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित करता है। शहर में कुल 96 हजार स्ट्रीट लाइटें लगी हैं। इनमें से लगभग 70 फीसदी लाइटें बंद हैं। यह स्थिति बजट के भारी घालमेल को दर्शाती है। स्थानीय पार्षदों और लोगों में इस अव्यवस्था को लेकर आक्रोश है। शास्त्रीनगर, पल्लवपुरम और गंगानगर जैसे इलाकों में रात के समय अंधेरा छाया रहता है। पार्षद अजय चंद्रा, संदीप रेवड़ी और कुलदीप वाल्मीकि का कहना है कि शहर में लाइटें ठीक नहीं होतीं। हंगामा करने या सिफारिश के बाद ही निगम लाइटें ठीक कराता है।
विज्ञापन